Waaree Energies और Premier Energies जैसे सोलर पैनल निर्माताओं के शेयर शुक्रवार, 18 जुलाई को निवेशकों की नजरों में रहेंगे। यह स्थिति इसलिए उत्पन्न हुई है क्योंकि अमेरिकी सोलर पैनल निर्माताओं के एक समूह ने US Commerce Department से भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले सोलर पैनल आयातों पर टैरिफ लगाने की मांग की है। इस समूह ने आरोप लगाया है कि ये विदेशी कंपनियां सस्ते उत्पादों को अमेरिकी बाजार में डंप कर रही हैं, जिससे अमेरिका में बनी नई फैक्ट्रियों को नुकसान पहुंच रहा है। इस प्रकार की मांग अमेरिकी सोलर मैन्युफैक्चरिंग उद्योग की ओर से व्यापार संरक्षण की एक नई कोशिश मानी जा रही है, जिससे हाल ही में हुए भारी निवेशों की रक्षा की जा सके। इस मामले में Alliance for American Solar Manufacturing and Trade ने यह पेटिशन दायर की है, जिसमें Tempe, Arizona स्थित First Solar, Korea की Hanwha की सोलर डिवीजन Qcells, Talon PV, और Mission Solar जैसी कंपनियां शामिल हैं। इस मांग का असर भारत की प्रमुख सोलर कंपनियों पर गहरा हो सकता है, खासकर Waaree Energies पर, जो अपनी कुल राजस्व का 58% FY24 में निर्यात से अर्जित करती है, और अमेरिका उसका मुख्य बाजार है। Waaree Energies ने FY22 में अपने राजस्व में 50% की बढ़ोतरी की थी और FY23 तथा FY24 में इसे दोगुना कर दिया। Waaree Energies का व्यवसाय मुख्य रूप से निर्यात-आधारित है, जहां FY23 में लगभग 70% राजस्व अमेरिका, कनाडा, हांगकांग, और तुर्की जैसे देशों से आया था। हालांकि FY24 में इसका रुझान बदल गया और घरेलू बाजार से 40% राजस्व प्राप्त हुआ। यह बदलाव भारत में सोलर ऊर्जा की बढ़ती मांग को दर्शाता है, जो स्थानीय खिलाड़ियों के लिए राजस्व वृद्धि का बड़ा कारण बन रहा है
दूसरी ओर, Premier Energies भी अमेरिकी बाजार में सबसे बड़े सोलर सेल निर्यातकों में से एक है। FY24 में इसने 31.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर के सोलर सेल्स अमेरिका को निर्यात किए। कंपनी के पास हैदराबाद, तेलंगाना में पांच उत्पादन केन्द्र हैं और यह भारत व विदेश में आठ सहायक कंपनियों के माध्यम से अपने कारोबार का संचालन करती है। यह टैरिफ विवाद Waaree Energies और Premier Energies के साथ-साथ भारतीय सोलर उद्योग के लिए चुनौतियां उत्पन्न कर सकता है क्योंकि अमेरिकी बाजार उनकी आय का एक बड़ा हिस्सा है। यदि अमेरिकी सरकार टैरिफ लागू करती है, तो इन कंपनियों के उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं और उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है। यह स्थिति निवेशकों के लिए भी चिंता का विषय है क्योंकि इससे इन कंपनियों के शेयरों में दबाव आ सकता है। हालांकि, भारत में सोलर ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है, जो स्थानीय उत्पादन और बिक्री को प्रोत्साहित कर रही है। FY24 में Waaree Energies के राजस्व में घरेलू हिस्सेदारी का बढ़ना इस प्रवृत्ति का प्रमाण है। यह घरेलू बाजार में विस्तार कंपनियों की स्थिरता के लिए सहायक हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितताएं बढ़ रही हों। सोलर पैनल उद्योग के इस नए टैरिफ विवाद के बीच, निवेशकों की नजरें Waaree Energies, Premier Energies और अन्य संबंधित कंपनियों के Q1 परिणामों पर भी टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में सामने आएंगे
यह परिणाम कंपनी की वर्तमान स्थिति और भविष्य की रणनीतियों को समझने में मदद करेंगे। अमेरिकी बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और व्यापार संरक्षण के कदम भारतीय सोलर पैनल निर्माताओं के लिए एक बड़ा इम्तिहान साबित हो सकते हैं। इसके बावजूद, भारत में ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे लगातार निवेश और बढ़ती मांग से यह उम्मीद की जा रही है कि ये कंपनियां अपनी मजबूती बनाए रखेंगी। संक्षेप में, Waaree Energies और Premier Energies के शेयरों पर अमेरिकी टैरिफ विवाद का असर नजर आएगा, जो निवेशकों को सतर्क रहना सिखाएगा। साथ ही, घरेलू बाजार की मजबूती से भी इन कंपनियों को काफी हद तक सहारा मिलेगा। इस तरह, यह संघर्ष भारतीय सोलर उद्योग के लिए चुनौतियां और अवसर दोनों लेकर आया है