US President Trump के हालिया बयान और उनकी ओर से भारत पर लगाए गए 25% tariff और अतिरिक्त penalties ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। CLSA के विश्लेषण में कहा गया है कि ये कदम भारत की विदेशी निवेश प्रवाह (FII) आकर्षण को कमजोर कर सकते हैं और देश के global safe haven के रूप में स्थापित स्थान को खतरा पहुंचा सकते हैं। CLSA ने 31 जुलाई को जारी अपने नोट में बताया कि ट्रंप की यह कार्रवाई भारत की US और Russia दोनों के साथ ट्रेड संबंधों को चुनौती देती है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दोनों महाशक्तियों के बीच संतुलन बनाकर एक खास geopolitical advantage हासिल किया था, लेकिन अब यह फायदा खतरे में दिख रहा है। नोट में यह भी कहा गया कि भारत-US संबंधों में मध्यम अवधि में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन निकट भविष्य में इस अनिश्चितता के कारण पहले से कमजोर और महंगे Indian equity market पर और दबाव पड़ सकता है। ट्रंप के tariff और penalties का सीधा असर भारत के बढ़ते हुए electronics और refined petroleum के निर्यात पर पड़ेगा। CLSA ने यह भी कहा कि निवेशक export-oriented sectors जैसे IT, gems and jewellery, textile में किसी भी नई निवेश के पहले स्पष्टता चाहते हैं। इसके अलावा, भारत के oil refiners को भी नुकसान हो सकता है क्योंकि वे सस्ते Russian crude पर निर्भर हैं। रूस के साथ व्यापार पर संभावित penalties से भारत के लिए यह स्थिति और जटिल हो जाएगी। रूस से तेल की आपूर्ति में कमी के कारण कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जो देश के लिए नकारात्मक साबित होगी
रक्षा क्षेत्र में भी रूस की equipment की मौजूदगी के कारण समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। CLSA के अनुसार, भारत ने पिछले चार वर्षों में US और Russia के बीच संतुलन बनाकर दोनों के साथ संबंध बनाए रखे हैं, जो अब खतरे में हैं। 1 अगस्त से लागू होने वाले 25% tariff के साथ-साथ अन्य penalties का असर अभी साफ नहीं है, लेकिन ट्रंप ने बातचीत के लिए दरवाजा खुला रखा है। CLSA का मानना है कि ट्रंप अक्सर अपने फैसलों पर पुनर्विचार करते रहे हैं, इसलिए यह अंतिम निर्णय नहीं हो सकता और दोनों देशों के बीच अगस्त में चल रही व्यापार वार्ता में कोई समझौता संभव है। Equity markets विशेष रूप से दोनों देशों की बातचीत के संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं। CLSA ने कहा कि ट्रंप की penalties व्यापक व्यापार वार्ता के लिए एक negotiation tactic हो सकती है, खासकर भारत और रूस के बीच। हालांकि, भारत की ऊंची valuations और earnings में कटौती के कारण market अभी भी underperform कर सकता है। CLSA ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति FII inflow को आकर्षित करने में बाधा बनेगी, जो पहले भारत के underperformance के समय में देखा गया नहीं था। इस बीच, निवेशक यह देख रहे हैं कि भारत की export-oriented industries पर इन tariffs और penalties का क्या प्रभाव पड़ेगा। विशेषकर IT, gems and jewellery और textile सेक्टर में निवेशकों की शंका बढ़ गई है
साथ ही, oil refining कंपनियों को भी रूस से सस्ते तेल की आपूर्ति में बाधा आने की संभावना से जूझना पड़ेगा, जिससे उत्पादन लागत बढ़ सकती है। रक्षा क्षेत्र में भी रूस से जुड़ी खरीददारी और उपकरणों के कारण भारत के लिए चुनौतियां बढ़ेंगी। यह क्षेत्र भारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और इसके प्रभावित होने से रणनीतिक स्थिति में कमजोरी आ सकती है। CLSA ने यह भी बताया कि ट्रंप के इस कदम से भारत की वैश्विक व्यापार स्थिति पर कई सवाल उठेंगे, खासकर जब रूस और अमेरिका दोनों के साथ संतुलन बनाना भारत की मजबूती था। इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारतीय equity market में निवेशकों की सतर्कता बढ़ गई है। FII की निकासी का खतरा मंडरा रहा है, जिससे बाजार में और गिरावट आ सकती है। निवेशक इस अनिश्चितता के चलते नए निवेश करने से बच सकते हैं, जिससे बाजार की liquidity प्रभावित होगी। अगले कुछ महीनों में भारत-US व्यापार वार्ता की दिशा और परिणाम महत्वपूर्ण रहेंगे। CLSA ने उम्मीद जताई है कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकती है और किसी समाधान की संभावना बनी रहेगी। लेकिन फिलहाल ट्रंप के tariffs और penalties की वजह से भारत के निवेश आकर्षण और बाजार की स्थिरता पर सवाल उठने लगे हैं
कुल मिलाकर, ट्रंप के इस फैसले ने भारत की विदेशी निवेश और वैश्विक व्यापार स्थिति को चुनौती दी है। निवेशक और बाजार दोनों इस अनिश्चितता से प्रभावित हो रहे हैं, और आने वाले समय में भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति पर इसका गहरा असर पड़ सकता है