अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत के खिलाफ एक बड़ा आर्थिक कदम उठाते हुए 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला 1 अगस्त की अंतिम तारीख से ठीक पहले आया है और इसमें एक अतिरिक्त पेनल्टी भी शामिल है। इससे पहले 2 अप्रैल, 2025 को Trump ने भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जो अब लगभग इसी स्तर पर बरकरार है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैरिफ से भारत की Gross Domestic Product (GDP) पर लगभग $30 बिलियन का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। Trump ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए भारत को “मित्र” बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि भारत को ये टैरिफ और पेनल्टी झेलनी होंगी क्योंकि वह रूस से तेल और सैन्य उपकरण खरीदना जारी रखे हुए है। Trump ने यह भी दोहराया कि भारत विश्व के उच्चतम टैरिफ लगाने वाले देशों में से एक है। विशेषज्ञों ने बताया कि अप्रैल में जब पहली बार टैरिफ की घोषणा हुई थी, तब भी इसके प्रभाव का अनुमान बहुत गंभीर था। 26 प्रतिशत टैरिफ से भारत के 2025 के अंत तक अनुमानित $4.3 ट्रिलियन की GDP में लगभग 0.7 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। अगर 25 प्रतिशत टैरिफ के साथ पेनल्टी भी लगती है, तो यह प्रभाव और भी ज्यादा गंभीर हो सकता है। ICRA की Chief Economist Aditi Nayar ने कहा, “जब अमेरिका ने शुरू में टैरिफ लगाए थे, तब हमने भारत की GDP वृद्धि के अनुमान को 6.2 प्रतिशत तक घटा दिया था
इसका कारण था निर्यात में धीमी वृद्धि और निजी पूंजी निवेश में देरी। ” उन्होंने आगे कहा कि “अब प्रस्तावित टैरिफ और पेनल्टी हमारी अपेक्षा से भी अधिक हैं, जो भारत की GDP वृद्धि के लिए बाधा साबित हो सकते हैं। नकारात्मक प्रभाव की सीमा इस बात पर निर्भर करेगी कि पेनल्टी कितनी बड़ी लगाई जाती है। ” अंतरराष्ट्रीय ब्रोकिंग फर्म Macquarie ने भी कहा है कि 20 प्रतिशत से अधिक टैरिफ से भारत की GDP पर 50 बेसिस पॉइंट से अधिक का प्रभाव पड़ सकता है। Goldman Sachs का मानना है कि 26 प्रतिशत टैरिफ के चलते भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो सकता है। इसके बावजूद, RBI शायद मुद्रा को बचाने के लिए कड़े हस्तक्षेप से बचेगा। Morgan Stanley ने एक सकारात्मक पहलू बताया है कि भारत की अर्थव्यवस्था ज्यादातर घरेलू मांग पर निर्भर है और इसका निर्यात हिस्सा कम है, इसलिए यह टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था पर अन्य एशियाई देशों की तुलना में कम प्रभाव डालेगा। उन्होंने कहा, “भारत की कम वस्तु व्यापार निर्भरता और घरेलू मांग जनरेट करने की क्षमता इसे क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में सबसे कम प्रभावित अर्थव्यवस्था बनाती है। ” Elara Capital की Economist और Executive Vice President Garima Kapoor ने भी इस स्थिति में एक उम्मीद की किरण दिखाई है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को कृषि और डेयरी सेक्टर में बड़ा समझौता करना पड़ता, तो इसके राजनीतिक, सामाजिक और आजीविका पर गहरे नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते थे
उन्होंने यह भी कहा कि एक सुविचारित और संतुलित समझौता जो व्यापार, निवेश, टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को सितंबर-अक्टूबर 2025 तक हल कर दे, उससे लंबी अवधि में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इस फैसले के आर्थिक प्रभावों को लेकर बाजार में चिंता का माहौल है। टैरिफ और पेनल्टी के कारण भारत के निर्यात पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर असर आएगा। वहीं घरेलू बाजार में भी निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ेगी। हालांकि, भारत की मजबूत घरेलू मांग और विविधीकृत अर्थव्यवस्था इसे इस वैश्विक आर्थिक टकराव से बचाए रखने में मदद कर सकती है। यह टैरिफ का मामला केवल व्यापारिक विवाद से कहीं अधिक है, यह भारत-यूएस संबंधों के राजनीतिक और रणनीतिक आयामों को भी प्रभावित कर सकता है। भारत के लिए अब चुनौती है कि वह अपने व्यापक आर्थिक हितों को सुरक्षित रखते हुए इस दबाव का सामना किस तरह करता है और अपने निर्यात तथा निवेश को कैसे बढ़ावा देता है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान IMF और विभिन्न ब्रोकिंग फर्मों की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि यह टैरिफ भारत की आर्थिक वृद्धि दर को कम कर सकता है, लेकिन भारत की घरेलू मांग और आर्थिक विविधता इसे संभावित झटकों से उबरने में सहायता कर सकती है। वित्तीय विशेषज्ञ भी इस बात पर सहमत हैं कि भारत को अपनी आर्थिक नीतियों में लचीलापन लाना होगा ताकि वैश्विक दबावों का सामना किया जा सके। ट्रंप प्रशासन के इस फैसले ने वैश्विक व्यापार के परिदृश्य को फिर से चुनौती दी है
भारत के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह किस तरह से अपने निर्यात को संरक्षित करता है और घरेलू उद्योगों को मजबूत बनाता है ताकि विदेशी टैरिफ के प्रभाव को कम किया जा सके। साथ ही, दीर्घकालीन रणनीति के तहत भारत को अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों में संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता होगी। इस तरह, 25 प्रतिशत टैरिफ और अतिरिक्त पेनल्टी का मामला भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है, जो आने वाले समय में आर्थिक विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की सतर्कता और कुशल निर्णय क्षमता की परीक्षा लेगा