पिछले कुछ समय से Vodafone Idea (Vi) के Adjusted Gross Revenue (AGR) बकाया मामले को लेकर बाजार में चर्चा जोरों पर थी। एक रिपोर्ट में यह संकेत मिला था कि Department of Telecommunications (DoT) ने Prime Minister’s Office (PMO) को कंपनी के लिए कई राहत विकल्प प्रस्तावित किए हैं, जिनमें दो साल के नए moratorium, छोटी वार्षिक किस्तें, साथ ही penalties और interest में छूट शामिल है। लेकिन इस सप्ताह के अंत में Telecom Ministry की ओर से मिली स्पष्टता ने निवेशकों को निराश कर दिया और इसके चलते Vodafone Idea के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। 26 अगस्त को शुरुआती ट्रेडिंग में Vodafone Idea के शेयर लगभग 9 प्रतिशत गिर गए, जो कि पिछले साल की शुरुआत से अब तक 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्शाता है। Indus Towers के शेयर भी Vodafone Idea के साथ 3.5 प्रतिशत नीचे आ गए, हालांकि उनका YTD प्रदर्शन स्थिर है। यह गिरावट मुख्य रूप से तब आई जब Minister of State for Communications Pemmasani Chandra Sekhar ने साफ कहा कि सरकार की ओर से फिलहाल कोई नई राहत योजना पर विचार नहीं किया जा रहा है, और जो राहत पहले दी जा चुकी है, वही लागू रहेगी। उन्होंने कहा, “हमने पहले ही उनकी बहुत सी देनदारियों को इक्विटी में बदल दिया है। सरकार ने जितना संभव था किया है और इस समय कोई नई योजना या चर्चा नहीं चल रही है। ” सरकार के इस रुख से यह स्पष्ट हो गया कि Vodafone Idea की AGR बकाया राशि के संदर्भ में किसी भी अतिरिक्त सहायता का फैसला Union Cabinet के स्तर पर होगा, जिसमें PMO, Finance Ministry, Telecom Ministry और DoT के अधिकारी शामिल होंगे। Pemmasani Chandra Sekhar ने यह भी कहा कि उन्हें किसी भी नई राहत प्रस्ताव की जानकारी नहीं है जो PMO के पास पहुंची हो
Vodafone Idea पर AGR बकाया राशि करीब ₹17,213 करोड़ थी (FY19 तक की राशि), जिसे कंपनी ने अंतिम मानते हुए interest और penalty माफ करने की मांग की थी। कंपनी के CEO Akshaya Moondra ने हाल ही में निवेशकों से बातचीत में कहा था कि कंपनी पूरी तरह व्यवसाय में निवेश पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के साथ किसी प्रकार की बातचीत में उनका उद्देश्य केवल बिजनेस को मजबूत करना है न कि सरकार की हिस्सेदारी या अन्य मुद्दों पर ध्यान देना। Moondra ने बताया कि बैंकिंग संस्थान भी फंडिंग को लेकर Vodafone Idea के साथ जुड़े हुए हैं, लेकिन AGR बकाया मामले में स्पष्टता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले भी कई बार समय पर मदद कर चुकी है, जैसे 2019 में spectrum installments का स्थगन, 2021 के reforms package, 2023 में सरकारी देनदारियों का इक्विटी में रूपांतरण, और 2025 में भी ऐसा ही कुछ होना था। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार भी सरकार मार्च की समय सीमा से पहले इस मामले को सुलझा दे ताकि बैंकिंग फंडिंग प्रक्रिया में बाधा न आए और कंपनी अपने निवेश योजनाओं को आगे बढ़ा सके। Vodafone Idea की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। पिछले कुछ वर्षों से कंपनी लगातार वित्तीय दबाव में है और AGR बकाया मामले ने उनकी आर्थिक स्थिति पर भारी दबाव डाला है। सरकार की तरफ से राहत न मिलने की खबर से निवेशकों ने अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए, जिससे बाजार में गिरावट आई। Indus Towers, जो Vodafone Idea की एक सहायक कंपनी है, के शेयर भी इस घटना से प्रभावित हुए
हालांकि Indus Towers का YTD प्रदर्शन स्थिर बना हुआ है, लेकिन टेलीकॉम सेक्टर में इस तरह की अस्थिरता ने निवेशकों के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं। Vodafone Idea के महत्वपूर्ण शेयरधारक और वित्तीय संस्थान अब इस स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए हैं, क्योंकि फंडिंग की स्थिति को लेकर किसी भी अनिश्चितता का असर कंपनी के संचालन पर पड़ सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कोई नया moratorium या ब्याज छूट देने की योजना नहीं है। यह फैसला Union Cabinet और संबंधित मंत्रालयों की सहमति के बिना संभव नहीं होगा। इस बयान के बाद Vodafone Idea के शेयर बाजार में दबाव में आ गए हैं और निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में इस स्टॉक को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। Vodafone Idea के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है। कंपनी को न केवल अपने AGR बकाया का समाधान निकालना है, बल्कि बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी बनाए रखना है। वित्तीय संस्थानों से फंडिंग मिलने में बाधा आने से कंपनी के विस्तार और तकनीकी निवेश प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, CEO Akshaya Moondra की रणनीति कंपनी को वित्तीय मजबूती की ओर ले जाने की कोशिश कर रही है, लेकिन सरकार की ओर से समर्थन की कमी ने कंपनी की राह कठिन कर दी है। टेलीकॉम क्षेत्र में सरकारी नीतियों और वित्तीय राहतों का प्रभाव कंपनियों के शेयरों पर तेजी से पड़ता है
Vodafone Idea के मामले में भी इसी का उदाहरण देखने को मिला है। निवेशकों के लिए यह स्पष्ट संकेत है कि सरकारी निर्णय और मंत्रालयों के बयान बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। अंततः, Vodafone Idea की वित्तीय स्थिरता और विस्तार की दिशा में अगला कदम सरकार और कंपनी के बीच चल रही चर्चाओं पर निर्भर करेगा। फिलहाल, शेयर बाजार में इस कंपनी के प्रति निवेशकों का भरोसा कुछ झटके खा चुका है और भविष्य में भी इस पर नजर बनाना जरूरी होगा