Dollar Index इस समय एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लाइन के करीब मंडरा रहा है। अप्रैल से U.S. dollar index 100 के नीचे मजबूती से बना हुआ है, जब से President Trump ने अपने tariff announcements किए थे। इसके बाद निवेशकों ने डॉलर की होल्डिंग्स बेचना शुरू कर दिया, जिससे dollar कई वर्षों के निचले स्तर तक गिर गया। इस गिरावट ने global-fund inflows को emerging markets (EMs) की ओर आकर्षित किया, खासकर Indian equities में। Elara Capital के अनुसार, डॉलर के प्रति bearish consensus ने इस प्रवाह को बढ़ावा दिया है। लेकिन अगर Dollar Index एक बार फिर 100 के स्तर को पार कर पाता है, तो यह long-EM positions के unwind होने का खतरा पैदा कर सकता है, जिससे EMs से outflows हो सकते हैं और Indian equities पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। फंडामेंटल लेवल पर कई analysts “imminent breakdown” की भविष्यवाणी कर रहे हैं, जो कि U.S. की trade और economic policies को लेकर बढ़ती चिंताओं की वजह से है। लेकिन technical charts कुछ और ही कहानी कहते हैं। चार्ट्स पर Dollar Index एक लंबी अवधि के महत्वपूर्ण सपोर्ट के करीब है और bulls इसे बचाने के लिए कड़ी लड़ाई लड़ेंगे। यदि यह सपोर्ट सफलतापूर्वक बचाया गया और Dollar फिर से उभरा, तो इसका दबाव emerging market assets पर काफी बढ़ जाएगा
Elara Capital ने बताया कि दिसंबर 2017 से लेकर फरवरी 2018 तक भी एक समान पैटर्न देखा गया था। उस समय Dollar Index के breakdown ने EM और Indian equities में जबरदस्त उछाल लाया था। लेकिन जैसे ही Dollar Index ने अपने निचले स्तर से रिकवरी शुरू की, बाजार तेजी से उलट गया और equities में sharp sell-off हुआ। यह ट्रेंड 2010-2011 में भी देखा गया था, जब जून 2010 में Dollar Index उच्चतम स्तर पर पहुंचा और फिर अप्रैल 2011 तक गिरावट आई। उस समय भी sustained dollar weakness की उम्मीद थी, लेकिन इंडेक्स ने अचानक तेजी से वापसी की, जिससे emerging market equities में volatility और nervousness फैल गई। हालांकि Dollar Index में sharp rebound देखने को मिला है, फिर भी global emerging market (GEM) funds में positive net flows जारी हैं, लेकिन गति धीमी हो गई है। पिछले तीन हफ्तों में average weekly inflows $700 million पर आ गए हैं, जो पहले के $2.3 billion के मुकाबले काफी कम हैं। नवीनतम सप्ताह में EM funds में $990 million के inflows आए, जो JPMorgan EM Fund ($733 million), Lazard EM Fund ($572 million), और Vanguard FTSE EM ETF ($392 million) में मजबूत allocations के कारण थे। हालांकि, Invesco Developing Markets Fund से $1.1 billion, iShares MSCI EM ex-China ETF से $375 million, और Vontobel EM Fund से $160 million के तेज outflows भी हुए हैं, जिसने कुल inflows को कुछ हद तक कम किया। Dollar Index का यह उतार-चढ़ाव और उससे जुड़े inflows-outflows का खेल emerging markets और Indian equities के लिए एक बड़ा संकेतक बनता जा रहा है
डॉलर के समर्थन स्तर पर टिके रहने या टूटने से बाजार में भारी तेजी या गिरावट आ सकती है। निवेशकों के लिए यह समय सावधानी से बाजार की हलचल पर नजर रखने का है, क्योंकि Dollar Index की दिशा से ही आने वाले समय में EM और Indian equities की दिशा तय हो सकती है। इस तरह से Dollar Index का टेक्निकल और फंडामेंटल पक्ष दोनों ही बाजार में उतार-चढ़ाव के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यदि डॉलर को सपोर्ट मिल गया, तो EM markets में दबाव बढ़ेगा, लेकिन अगर डॉलर टूट गया तो EMs और Indian equities में फिर से रौनक लौट सकती है। निवेशकों और फंड मैनेजर्स के लिए यह एक संवेदनशील दौर है, जिसमें बाजार की हर हलचल पर नजर रखना आवश्यक होगा