हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में विदेशी निवेशकों द्वारा शेयर बाजार से भारी मात्रा में निकासी के कारण एक बड़ा sell-off देखने को मिला है, जो अक्टूबर 2024 के US चुनाव परिणाम के बाद देखे गए पैटर्न से मेल खाता है। उस समय ट्रम्प की जीत ने Emerging Markets (EM) में बड़े पैमाने पर बिकवाली की लहर दौड़ा दी थी, और अब फिर से उसी तरह की स्थिति नजर आ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक शेयर बाजारों में पिछले दो साल के सबसे बड़े साप्ताहिक पूंजी पलायन का सामना करना पड़ा है, जिसमें विदेशी निवेशकों ने कुल $41.7 बिलियन की निकासी की है। इनमें से सबसे अधिक निकासी US बाजारों से हुई है, जहां $35 बिलियन से ज्यादा विदेशी पूंजी वापस ली गई, जो अगस्त 2011 के बाद से सबसे बड़ा साप्ताहिक outflow है, जब S&P ने US की क्रेडिट रेटिंग डाउनग्रेड की थी। भारत के संदर्भ में यह रिपोर्ट बताती है कि जनवरी 15 के बाद से यह सबसे बड़ी redemption है, जिसमें लगभग दो-तिहाई निकासी ($418 मिलियन) India-focused active funds से हुई है। यह निकासी पिछले फरवरी 19 के बाद सबसे अधिक है। Active funds ने लगातार पांच हफ्तों तक कुल $362 मिलियन की निकासी दर्ज की है। इसके अलावा, India ट्रैकिंग ETFs ने भी पिछले दो हफ्तों में कुल $456 मिलियन की notable withdrawals देखी हैं, जिनमें प्रमुख ETFs जैसे iShares MSCI India ETF से $120 मिलियन, Franklin FTSE India ETF से $48 मिलियन, WisdomTree India Earnings Fund से $45 मिलियन, और Schroder ISF Indian Equity से $34 मिलियन की निकासी हुई है। यह रिपोर्ट यह भी बताती है कि यह sell-off अप्रैल 7 को US द्वारा नई tariffs के ऐलान के बाद शुरू हुआ। उस वक्त भारत में कुछ inflows आए थे, लेकिन वैश्विक जोखिम से बचने के रुख ने बाद में इसे दबा दिया
US में passive investment vehicles से भी बड़ी निकासी हुई है, जैसे BlackRock ACS US Equity Tracker Fund से $28.5 बिलियन, SPDR S&P 500 ETF से $5.6 बिलियन, और iShares Russell 2000 ETF से $1.7 बिलियन निकाले गए। विश्लेषकों का मानना है कि US Dollar Index में पिछले दो हफ्तों में तेज rebound ने पूंजी को US और UK की ओर वापस खींचा है, जिससे Emerging Markets को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 86% EMs में एक साथ outflows देखे गए हैं। इस सूची में चीन सबसे ऊपर है, जहां से $723 मिलियन निकाले गए हैं, इसके बाद भारत का नंबर आता है, जहां $632 मिलियन की निकासी हुई है। इसके अलावा Taiwan ($381 मिलियन), South Korea ($155 मिलियन), और Brazil ($133 मिलियन) ने भी पूंजी निकाली है। इस बीच, सोने में केवल मामूली inflows देखने को मिले हैं, जो इस सप्ताह $53 मिलियन तक सीमित रहे, जो जून के बाद से सबसे धीमी गति है। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक पूरी तरह से commodities में नहीं जा रहे हैं, भले ही equity markets में भारी बिकवाली हो रही हो। यह स्थिति भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय है क्योंकि विदेशी निवेशकों की निकासी से बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। Active और passive दोनों तरह के funds से निकासी ने बाजार की कमजोरी को उजागर किया है। हालांकि, भारत में फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में बाजार किस दिशा में जाता है, खासकर जब वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाएं इस पर गहरा प्रभाव डाल रही हैं
इस पूरे परिदृश्य में, निवेशकों को सतर्क रहने और बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनानी होगी क्योंकि वैश्विक पूंजी प्रवाह में हो रहे बदलाव सीधे भारत जैसे उभरते बाजारों को प्रभावित कर रहे हैं