Tata Motors के शेयरों में 3% की जोरदार छलांग, Q1FY26 में मुनाफे में 30% की गिरावट के बावजूद मजबूती बरकरार

Saurabh
By Saurabh

Tata Motors के शेयर सोमवार को 3% के लगभग उछाल के साथ बंद हुए, जबकि कंपनी ने जून तिमाही (Q1FY26) में अपने सभी कारोबारों में बिक्री और मुनाफे में गिरावट की सूचना दी। भारत की सबसे बड़ी कमर्शियल व्हीकल निर्माता कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में ₹3,924 करोड़ का समेकित नेट प्रॉफिट रिपोर्ट किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹5,643 करोड़ से लगभग 30% कम है। इसके बावजूद, शेयर ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ₹648.20 प्रति शेयर के स्तर पर 2.29% की बढ़त दर्ज की। Tata Motors के Group Chief Financial Officer, PB Balaji ने बताया कि “जैसे-जैसे टैरिफ में स्पष्टता आएगी और त्योहारों का सीजन शुरू होगा, हम अपने प्रदर्शन को तेज करने और पूरे पोर्टफोलियो में गति फिर से हासिल करने की योजना बना रहे हैं। अक्टूबर 2025 में होने वाली डिमर्जर प्रक्रिया के मद्देनजर हमारा पूरा ध्यान वर्ष के दूसरे भाग में मजबूत प्रदर्शन देने पर केंद्रित रहेगा। ” कंपनी के Q1FY26 के आंकड़ों पर नजर डालें तो, April-June अवधि में Tata Motors का कुल रेवेन्यू ₹1.04 लाख करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹1.07 लाख करोड़ से 2.5% कम है। ऑपरेटिंग प्रॉफिट भी 33% गिरकर ₹10,224 करोड़ हो गया, जबकि ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 9.79% पर आ गया। Jaguar Land Rover (JLR) की आय भी प्रभावित हुई, जिसकी रेवेन्यू 9.2% कम होकर £6.6 बिलियन रही, साथ ही EBIT मार्जिन 4.0% पर आ गया, जो कि पिछले साल की तुलना में 490 बेसिस पॉइंट्स कम है। इस गिरावट का मुख्य कारण US ट्रेड टैरिफ का प्रभाव रहा। Tata Motors के पैसेंजर व्हीकल सेक्टर में, अप्रैल-जून तिमाही में ₹10,900 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया गया, जिसमें EBITDA मार्जिन 4% रही

हालांकि, पैसेंजर व्हीकल की होलसेल 10% गिरकर 1,24,800 यूनिट रह गई, जबकि इलेक्ट्रिक व्हीकल सेल्स 2.1% घटकर 16,200 यूनिट रही। कमर्शियल व्हीकल सेक्टर में भी कंपनी की होलसेल 6% गिरकर 88,000 यूनिट पर आ गई। PB Balaji ने कहा कि “इस तिमाही में JLR को लगभग 250 मिलियन पाउंड का US टैरिफ चार्ज भुगतना पड़ा, क्योंकि यद्यपि यूके-यूएस ट्रेड डील 8 मई को घोषित हो गई थी, लेकिन इसे 30 जून को ही औपचारिक रूप से मंजूरी मिली और इसका रेट्रोस्पेक्टिव प्रभाव नहीं था। ” उन्होंने आगे बताया कि आने वाले समय में US-UK ट्रेड डील के तहत टैरिफ को 27.5% से घटाकर 10% और US-EU डील के तहत 27.5% से 15% तक लाने की प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, अमेरिका में उत्सर्जन से जुड़ी पेनल्टी हटने से भी कंपनी को लाभ होगा। रियर अर्थ मैगनेट की कमी के मुद्दे पर Balaji ने स्पष्ट किया कि यह Tata Motors और JLR की इलेक्ट्रिक व्हीकल उत्पादन को प्रभावित नहीं कर रही है और निकट भविष्य में भी इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ने वाला है, हालांकि आने वाले क्वार्टरों में कुछ चुनौतियां बनी रह सकती हैं। Tata Motors ने कहा कि मांग की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी रहेगी, इसलिए कंपनी व्यापार के मूलभूत तत्वों को मजबूत करने और टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए ब्रांड की मजबूती का उपयोग कर बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और लक्षित कदम उठाएगी ताकि कॉन्ट्रिब्यूशन मार्जिन सुधारा जा सके। कंपनी ने यह भी बताया कि Q1 के अंत में Tiago और Altroz मॉडलों की बुकिंग्स में 22% की वृद्धि देखी गई, जबकि Harrier.ev लॉन्च को बेहद सकारात्मक रिस्पॉन्स मिला है। Harrier और Safari के क्यूरेटेड वेरिएंट्स को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बाजार में उतारा गया है। जुलाई महीने में कंपनी ने अब तक की सबसे अधिक मासिक EV बिक्री दर्ज की, जो शून्य उत्सर्जन की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है

Tata Motors का मानना है कि नए लॉन्च—हैचबैक और SUV—की मदद से वह EV सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करेगा और साथ ही आफ्टरसेल्स ट्रांसफॉर्मेशन, टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल और स्ट्रक्चरल कॉस्ट कटौती के जरिए लाभप्रदता में सुधार करेगा। कुल मिलाकर, भले ही Tata Motors के Q1FY26 के वित्तीय परिणामों में गिरावट आई हो, लेकिन कंपनी के शेयरों में आई तेजी और भविष्य के लिए की गई रणनीतियां संकेत देती हैं कि Tata Motors ने बाजार की चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने का प्रयास जारी रखा है

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