भारतीय शेयर बाजार में हाल ही में एक गंभीर गिरावट देखी जा रही है, जहां करीब 743 कंपनियों के शेयर अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर से 50% से अधिक नीचे आ गए हैं। खासतौर पर छोटे कैप और वित्तीय क्षेत्र के स्टॉक्स सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जो कुल नुकसान का लगभग 80% हिस्सा हैं। Ace Equity के डेटा के अनुसार, लगभग 4,000 सूचिबद्ध कंपनियों में से सभी ने अपने उच्चतम स्तर से गिरावट दर्ज की है, जिनमें से 743 कंपनियां 50% से ज्यादा नीचे हैं। इनमें से 614 छोटे कैप कंपनियां हैं, जबकि मिड-कैप में 95 और 34 बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं, जिनमें कमजोर आय, टैरिफ चिंताएं, और पहले से अधिक मूल्यांकन शामिल हैं। छोटे कैप कंपनियों में खासकर यह समस्या बहुत गहरी है क्योंकि उनकी आय में स्थिरता नहीं है और बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। वित्तीय सेवाएं सबसे अधिक प्रभावित सेक्टर हैं, जहां 132 कंपनियों के शेयर 50% से अधिक गिर चुके हैं। AGS Transact, AME Fin trade India, और Aretha Finest जैसे स्टॉक्स ने 85% से 95% के बीच गिरावट दर्ज की है, जो नियामकीय दबाव और फंडिंग की कमी के कारण हुआ है। इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल सेक्टर भी पीछे नहीं हैं, यहां 121 कंपनियों के शेयर गिरावट में हैं। हाल ही में जारी हुई Udayshivakumar Infra IPO ने 90% से अधिक का नुकसान उठाया है, जबकि VRC Construction और Bharat Global Developers को प्रोजेक्ट में देरी और कमजोर बैलेंस शीट ने नीचे गिराया है
IT और डिजिटल सर्विसेज सेक्टर में भी महामारी के बाद मूल्यांकन में सुधार हो रहा है, जिसके कारण 79 कंपनियां दबाव में हैं। उपभोक्ता और रिटेल सेक्टर में 64 कंपनियां कमजोर मांग और बढ़ती लागतों के चलते प्रभावित हुई हैं, जिनमें Add-Shop E-Retail, SM Gold और Karim India शामिल हैं। फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में 49 कंपनियां कीमतों में गिरावट और विदेशों में मांग घटने की वजह से दबाव में हैं। Gland Pharma, Laurus Labs और Marksans Pharma जैसे नाम इन नुकसान में शामिल हैं। रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी भारी गिरावट देखी गई है, DB Realty, Ajmera Realty और Godrej Properties के शेयर 55% से 70% तक नीचे आ गए हैं, जिनके पीछे उच्च कर्ज और धीमे प्रोजेक्ट लॉन्च का कारण है। शिक्षा और प्रशिक्षण क्षेत्र में Vantage Knowledge Academy और CL Educate जैसे स्टॉक्स ने 90% से अधिक की गिरावट दर्ज की है। कृषि और FMCG सेक्टर भी कमोडिटी की अस्थिरता से प्रभावित हुए हैं, जबकि मीडिया और एंटरटेनमेंट के 27 स्टॉक्स भी 50% से अधिक नीचे हैं। Kesoram Industries इस गिरावट में सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाली कंपनी है, जिसका शेयर 97.8% गिरकर Rs 235.95 से Rs 5.12 हो गया है। कंपनी की स्थिति कर्ज के बोझ और कमजोर मौलिक तत्वों के कारण चिंताजनक बनी हुई है। Spright Agro का शेयर भी 95.8% गिरा है, वहीं Vantage Knowledge Academy और AGS Transact Technologies ने क्रमशः 95.7% और 95.6% की गिरावट दर्ज की है
Bharat Global Developers, Mercury Trade Links, Sunshine Capital, Sadhana Nitro Chem, AF Enterprises, Money Masters Leasing & Finance, और K&R Rail Engineering जैसे अन्य नाम भी 90% से अधिक नीचे आ गए हैं। कुछ बड़ी और प्रसिद्ध कंपनियों जैसे PB Fintech (Policy Bazaar के ऑपरेटर) और Gland Pharma ने भी अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर से 8% से अधिक गिरावट देखी है। SBI Securities के Head of Fundamental Research Sunny Agrawal के अनुसार, सितंबर 2024 में नए उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद भारतीय इक्विटी बाजार में गिरावट की शुरुआत हुई है, जो धीमी आय वृद्धि, सरकार के पूंजीगत व्यय में कमी, महंगे मूल्यांकन और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण आई है। उन्होंने कहा कि छोटे कैप और मिडकैप में यह गिरावट कमजोर आय और अत्यधिक मूल्यांकन के संयोजन से हुई है। Kotak Securities के Executive Vice President और Head of Equity Research श्री शृकांत चौहान ने बताया कि यह गिरावट कई कारणों से हुई है, जिनमें कमजोर आय, व्यापार तनाव और मूल्यांकन में समायोजन प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ भारत के व्यापार पर 50% टैरिफ का खतरा भी 70% निर्यात पर असर डाल रहा है, वहीं रुपया 88 के स्तर पर पहुंचने से निवेशकों की भावना प्रभावित हुई है। चौहान ने उम्मीद जताई कि Q2 के नतीजे बेहतर हो सकते हैं और इस स्थिति में गिरावट पर खरीदारी का अवसर आ सकता है। Anand Rathi Stock Brokers के Head of Fundamental Research नरेंद्र सोलंकी ने कहा कि यह समायोजन कोविड के बाद के अत्यधिक मूल्यांकन के कारण भी जरूरी था। कोविड महामारी के बाद कई स्टॉक्स में तेजी आई थी, जो अब वैश्विक तरलता में कमी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) के निकास से प्रभावित हो रही है। वर्तमान में बाजार 23,700 से 24,000 के समर्थन स्तर पर टिके रहने की कोशिश कर रहा है, जबकि 25,000 से 25,500 के बीच प्रतिरोध नजर आ रहा है
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू संस्थागत निवेशक (Domestic Institutional Investors) की प्रविष्टि इस गिरावट को सीमित कर सकती है और Q2 आय या नीति में सकारात्मक आश्चर्य बाजार में तेजी ला सकता है। इस तरह बाजार फिलहाल दबाव में है लेकिन विशेषज्ञों की नजरें आगामी तिमाही की आय और नीतिगत फैसलों पर टिकी हैं, जो भविष्य में बाजार के रुख को प्रभावित कर सकते हैं