Zee Entertainment Enterprises के शेयरों में शुक्रवार, 11 जुलाई को भारी बिकवाली देखने को मिली जब कंपनी के प्रमोटर्स द्वारा ₹2,237 करोड़ की ताजा पूंजी लगाने के प्रस्ताव को शेयरधारकों ने खारिज कर दिया। इस प्रस्ताव के तहत प्रमोटर्स को preferential warrants के जरिए पूंजी जुटानी थी, लेकिन लगभग 40% शेयरधारकों ने इस विशेष प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। विशेष प्रस्ताव को पारित होने के लिए कम से कम 75% शेयरधारकों का समर्थन आवश्यक होता है, जबकि सामान्य प्रस्ताव के लिए 50% से ज्यादा वोटिंग पर्याप्त होती है। इस मामले में प्रमोटर्स का प्रस्ताव आवश्यक समर्थन हासिल करने में विफल रहा। उल्लेखनीय है कि करीब 80% retail investors ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया, जबकि institutional investors ने इस पर विरोध जताया। लगभग 52% institutional investors ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया, जिससे प्रस्ताव का पास होना असंभव हो गया। Zee Entertainment में retail investors की हिस्सेदारी 40% से अधिक है, इसलिए उनके समर्थन के बावजूद institutional investors के विरोध ने प्रस्ताव को गिरा दिया। ट्रेडिंग के दौरान कंपनी के शेयर ₹137.36 प्रति शेयर पर आ गए, जो कि NSE पर 3.2% की गिरावट दर्शाता है। पिछले एक साल में Zee के शेयरों में 4% की गिरावट आ चुकी है, जो निवेशकों के बीच चिंता का विषय बना हुआ है। इस विरोध के पीछे proxy advisory firms की भी अहम भूमिका रही
भारत की प्रमुख proxy advisory कंपनियों ने Zee के शेयरधारकों से इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट करने का आह्वान किया था। उनका तर्क था कि इस प्रस्ताव में कई “red flags” हैं, जो कंपनी की गवर्नेंस और सार्वजनिक शेयरधारकों के हितों के लिए खतरा हैं। विशेष रूप से, CEO Punit Goenka और उनके परिवार को कंपनी में अधिक नियंत्रण देने से सार्वजनिक निवेशकों की हिस्सेदारी में भारी dilution होगा। इस प्रस्ताव के तहत Goenka परिवार की हिस्सेदारी 3.99% से बढ़कर 18.39% हो जानी थी, जो कि कंपनी के नियंत्रण में बड़ी बदलाव लाता। पिछले साल भी शेयरधारकों ने Punit Goenka को Managing Director नियुक्त करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। यह दर्शाता है कि शेयरधारकों में प्रमोटर्स के खिलाफ लगातार असंतोष बना हुआ है। Proxy advisory firms ने यह भी कहा कि कंपनी को वर्तमान में किसी बड़ी पूंजी की जरूरत नहीं है क्योंकि मार्च 31, 2025 तक कंपनी के पास नकद और कैश इकोवलेंट्स के रूप में ₹2,240 करोड़ की पर्याप्त राशि मौजूद थी। इसलिए प्रमोटर्स का यह प्रस्ताव अनावश्यक और निवेशकों के हितों के खिलाफ माना गया। इस अस्वीकृति के बाद Zee Entertainment के शेयरों में दबाव बना हुआ है। व्यापार विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रमोटर कंट्रोल को लेकर यह विवाद कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति पर सवाल खड़े करता है
निवेशकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि Zee प्रबंधन इस स्थिति से कैसे निपटता है और भविष्य में कंपनी की पूंजी संरचना में क्या बदलाव करता है। बाजार विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि institutional investors का विरोध इस बात का संकेत है कि बड़े निवेशक Zee के प्रबंधन की वर्तमान नीति से संतुष्ट नहीं हैं। जहां retail investors ने प्रस्ताव का समर्थन किया, वहीं institutional investors की नाराजगी कंपनी के शेयरों के प्रदर्शन पर असर डाल रही है। Zee Entertainment की इस स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि कंपनी के प्रमोटर्स और शेयरधारकों के बीच विश्वास का संकट गहराता जा रहा है। प्रमोटर्स का यह प्रयास कि वे कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाएं, निवेशकों के व्यापक विरोध के चलते असफल रहा है। इस घटना से कंपनी के शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा है और भविष्य में इसके वित्तीय और प्रबंधन संबंधी फैसलों की दिशा पर सवाल उठ रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, Zee Entertainment के प्रबंधन को अब निवेशकों का विश्वास बहाल करने और कंपनी की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। फिलहाल, बाजार में Zee के शेयरों की कमजोरी और प्रमोटर्स के प्रस्ताव की अस्वीकृति ने कंपनी की छवि को चुनौती दी है, जो आने वाले समय में कंपनी की विकास यात्रा पर असर डाल सकती है