Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने भारत के index derivatives बाजार में एक महत्वपूर्ण बदलाव करने पर विचार शुरू कर दिया है। वर्तमान में जो weekly expiry सिस्टम लागू है, उसे बदलकर fortnightly expiry मॉडल अपनाने की योजना बनाई जा रही है। यह योजना खासतौर पर index options सेक्टर में बढ़ते हुए speculative ट्रेडिंग और रिटेल इन्वेस्टर्स की तीव्र भागीदारी को नियंत्रित करने के मकसद से सामने आई है। अभी BSE के Sensex options हर मंगलवार को expire होते हैं, जबकि NSE के Nifty options का expiry हर गुरुवार को होता है। SEBI की नई योजना के तहत यह dual weekly expiry सिस्टम हटाकर हर दो हफ्ते में एक बार expiry को लागू किया जा सकता है। इस बदलाव से expiry-induced volatility और अनावश्यक speculation में कमी आने की उम्मीद है। पिछले कुछ वर्षों में index options में रिटेल निवेशकों की भागीदारी में जबरदस्त इजाफा हुआ है। कम पूंजी की जरूरत और त्वरित लाभ की संभावना ने इसे आकर्षक विकल्प बना दिया है। लेकिन SEBI की आंतरिक जांच में यह बात सामने आई कि ज्यादातर रिटेल ट्रेडर फ्यूचर्स और ऑप्शन्स (F&O) के मैदान में लगातार नुकसान में हैं। आंकड़ों के अनुसार, हर 10 में से 9 रिटेल ट्रेडर F&O ट्रेडिंग में घाटे में जाते हैं, भले ही बाजार में टर्नओवर रिकॉर्ड स्तर पर हो
इस परिस्थिति को देखते हुए SEBI ने 2024 में F&O 2.0 नियम लागू किए, जिनमें index options के position limits में संशोधन, open interest की गणना में सुधार और कुछ खास पोजीशनों को ही risk exposure कम करने के लिए अनुमति देने जैसे कदम शामिल थे। इसके अलावा, SEBI ने इस साल एक बड़ी कार्रवाई करते हुए U.S. की ट्रेडिंग फर्म Jane Street को Bank Nifty contracts से बाहर कर दिया। SEBI का आरोप था कि Jane Street ने बाजार भावना को प्रभावित करने के लिए एक ही सत्र में भ्रामक bullish और bearish ट्रेडिंग की, जबकि Jane Street ने इन आरोपों का खंडन किया है। SEBI की यह सख्ती इस बात की ओर इशारा करती है कि वह बाजार में अनुचित गतिविधियों को रोकने और निवेशकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए गंभीर है। अब SEBI आगामी हफ्तों में index options के ट्रेडिंग वॉल्यूम पर नजर रखेगा ताकि यह आंका जा सके कि लागू किए गए नए नियम कितने प्रभावी हैं। यदि ये नियम अपेक्षित परिणाम नहीं देते हैं, तो fortnightly expiry मॉडल को जल्द ही लागू किया जा सकता है। यह बदलाव न केवल ट्रेडिंग रणनीतियों को प्रभावित करेगा, बल्कि निवेशकों और ब्रोकर्स दोनों के लिए ऑपरेशनल कैलेंडर और रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क में भी आवश्यक समायोजन की मांग करेगा। fortnightly expiry से expiry-day के दौरान होने वाली भारी उतार-चढ़ाव और अत्यधिक ट्रेडिंग गतिविधि को कम करने की उम्मीद है, जिससे बाजार में स्थिरता और संतुलन बढ़ेगा। SEBI का उद्देश्य है कि index derivatives बाजार में अधिक समझदारी से और दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि केवल त्वरित लाभ की होड़ से बाजार प्रभावित न हो। इस रणनीति से निवेशकों को बेहतर जोखिम प्रबंधन के साथ अधिक सुरक्षित और स्थिर निवेश के अवसर मिल सकेंगे
वर्तमान में चल रहे weekly expiry का मॉडल जहां तेज़ ट्रेडिंग को बढ़ावा देता है, वहीं fortnightly expiry से निवेशकों को अपने निर्णयों पर सोच-विचार करने का ज्यादा समय मिलेगा। यह कदम निश्चित रूप से भारतीय स्टॉक मार्केट के derivatives सेक्टर में एक नया अध्याय लिख सकता है। अगले कुछ महीनों में SEBI की नीतियों और नियमों में यह बदलाव किस तरह से बाजार को प्रभावित करता है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल, बाजार के सभी प्रमुख खिलाड़ी इस संभावित बदलाव के लिए तैयार हैं और इसे लेकर चर्चा जोरों पर है। इस बदलाव से न केवल retail investors बल्कि institutional players और ब्रोकिंग हाउस भी अपनी रणनीतियों को फिर से परिभाषित करेंगे। यदि fortnightly expiry लागू होती है तो व्यापारिक गतिविधियों में अधिक स्थिरता आएगी, जो अंततः भारतीय स्टॉक मार्केट के विकास के लिए सकारात्मक साबित होगी। इसलिए, SEBI का यह कदम भारत में index options ट्रेडिंग के भविष्य को आकार देने वाला साबित हो सकता है, जो बाजार में अनुशासन और पारदर्शिता दोनों को बढ़ावा देगा