Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने mutual fund उद्योग में एक अहम बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जो ₹46 लाख करोड़ के इस विशाल बाजार को पूरी तरह से नया आकार दे सकता है। SEBI ने mutual fund houses को एक ही fund category में दूसरी scheme लॉन्च करने की अनुमति देने का सुझाव दिया है, लेकिन यह अनुमति कुछ सख्त शर्तों के साथ दी जाएगी। इस प्रस्ताव के तहत, large-cap, mid-cap जैसी fund categories में fund houses अब दो schemes चला सकेंगे, जो निवेशकों और fund managers दोनों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव होगा। वर्तमान में SEBI एक ही category में mutual fund कंपनियों को केवल एक ही scheme चलाने की अनुमति देता है, ताकि निवेशकों में भ्रम की स्थिति न बने। लेकिन कई funds का AUM (Assets Under Management) ₹50,000 करोड़ से ऊपर पहुंच चुका है, जिससे portfolio rebalancing, trade execution और liquidity बनाए रखने में fund managers को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन चुनौतियों को देखते हुए SEBI ने यह नया draft circular 18 जुलाई 2025 को जारी किया है, जिसका public feedback 8 अगस्त तक मांगा गया है। इस नए मसौदे के मुख्य बिंदु यह हैं कि दूसरी scheme उसी category में तभी लाई जा सकेगी जब पहली scheme कम से कम पांच साल पुरानी हो और उसका AUM ₹50,000 करोड़ से अधिक हो। दूसरी scheme शुरू होने के बाद मौजूदा निवेशक पहली scheme में निवेश जारी रख सकेंगे, लेकिन नई scheme में नए lump sum और SIP निवेश स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके अलावा, नई scheme का Total Expense Ratio (TER) पहली scheme से अधिक नहीं हो सकता, जिससे निवेशकों को अतिरिक्त खर्च से बचाने का प्रयास किया गया है। दोनों schemes के नामकरण में भी बदलाव सुझाए गए हैं, जैसे “Large Cap Fund – Series I” और “Series II”, ताकि निवेशकों को स्पष्टता मिल सके और भ्रम की स्थिति न बने
म्यूचुअल फंड उद्योग ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। WhiteOak Capital के CEO Aashish Somaiyya ने कहा कि दूसरी scheme से operational stress कम होगा क्योंकि ₹50,000 करोड़ से अधिक के fund का संचालन करना चुनौतीपूर्ण होता है। DSP Mutual Fund के Anil Ghelani ने इस प्रस्ताव की तुलना होटल के मेहमानों से की, जहां अलग-अलग समय पर नाश्ता करने से व्यवस्थापन आसान हो जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि SIPs को दूसरी scheme में ट्रांसफर करने या जारी रखने से कोई बड़ी logistical समस्या नहीं आएगी। हालांकि, कुछ वित्तीय विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव को लेकर सावधानी भी जताई है। Credence Wealth के संस्थापक Kirtan A Shah ने चिंता जताई है कि मूल scheme को नए निवेशों के लिए बंद करने से fund के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि निरंतर redemption के कारण fund में ताजगी वाली पूंजी की कमी हो जाएगी। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक नई schemes की ओर आकर्षित होंगे, जिससे पुरानी schemes में निकासी बढ़ सकती है और वे कमजोर पड़ सकती हैं। SEBI ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक category में केवल दो schemes ही होंगी और जरूरत पड़ने पर fund houses को उन्हें merge करने की भी अनुमति होगी। इसके अलावा, SEBI ने draft में और भी 20 से अधिक प्रस्ताव शामिल किए हैं, जिनमें debt fund के नामकरण में सुधार, value/contra और thematic categories के बीच स्पष्टता, तथा REITs और InvITs में residual investments से जुड़ी नियमावली शामिल है। यह प्रस्ताव mutual fund उद्योग के विकास और निवेशकों के विश्वास को बनाए रखने के लिए एक संतुलित कदम माना जा रहा है
SEBI ने निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए सख्त नियम और वित्तीय प्रतिबंध तय किए हैं ताकि दूसरी scheme के परिचय से कोई अनुचित लाभ या नुकसान न हो। हालांकि, SIP continuity, बंद होने वाली schemes की स्थिति जैसे मुद्दों पर अंतिम निर्णय लेने से पहले और विचार-विमर्श आवश्यक होगा। इस बदलाव से mutual fund उद्योग को अपने assets under management को बेहतर तरीके से संभालने और operational challenges से निपटने का अवसर मिलेगा। निवेशकों के लिए भी यह एक नई संभावना है कि वे अपनी पसंद के अनुसार अलग-अलग series की schemes में निवेश कर सकेंगे, बशर्ते वे नियमों और शर्तों को समझें। SEBI का यह प्रस्ताव mutual fund बाजार की परिपक्वता और उसकी स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है