Sebi का बड़ा फैसला: Margin Obligations के लिए Pledge Framework की डेडलाइन हुई आगे, जानिए कैसे बदलेगा पूरा सिस्टम

Saurabh
By Saurabh

Sebi ने market intermediaries के लिए margin obligations पर नए pledge और re-pledge framework को लागू करने की डेडलाइन 10 अक्टूबर 2025 तक बढ़ा दी है। यह नया नियम मूल रूप से 1 सितंबर 2025 से लागू होने वाला था, लेकिन depositories CDSL और NSDL द्वारा अतिरिक्त समय मांगने के बाद regulator ने इसे आगे बढ़ाने का फैसला किया है। Sebi ने इस फैसले को smooth implementation सुनिश्चित करने के लिए लिया है ताकि market participants और investors को किसी तरह की दिक्कत न हो। इस नए framework का मकसद margin obligations को पूरा करने की प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। Sebi ने जून 3, 2025 को एक विस्तृत circular जारी किया था जिसमें कहा गया था कि equity और derivatives segment में margin obligations केवल depository system के माध्यम से ही पूरी की जाएंगी। इसका मतलब है कि सभी pledge और re-pledge अब demat accounts के जरिए ही होंगे, जिससे securities के misuse के जोखिम को कम किया जा सकेगा। CDSL और NSDL ने Sebi को बताया कि इस सिस्टम में महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव, नए processes का परीक्षण और market participants की readiness के लिए और समय चाहिए। Sebi ने उनकी बात मानते हुए extension देने का फैसला किया ताकि नए नियम बिना किसी disruption के लागू हो सकें। अब brokers को physical या electronic instructions के लिए अलग से प्रयास करने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि यह पूरा process automated होगा। इस नए सिस्टम के तहत client की securities को सीधे उनके demat account में early pay-in के लिए block किया जाएगा

इसका फायदा यह होगा कि brokers द्वारा securities के गलत उपयोग की संभावना कम हो जाएगी। साथ ही, एक नई सुविधा ‘pledge release for pay-in’ भी लाई गई है। इस सुविधा से pledged securities को एक ही निर्देश में release किया जा सकेगा और साथ ही client के demat account में pay-in block भी बनाया जाएगा। इससे manual intervention की जरूरत खत्म हो जाएगी और प्रक्रिया तेज और आसान हो जाएगी। Depositories को Sebi द्वारा आवश्यक infrastructure और functionality को सक्षम करने की जिम्मेदारी दी गई है। जब यह framework अक्टूबर 2025 से लागू होगा, तो brokers को un-pledging और delivery के लिए अलग से कोई physical या electronic instruction देने की आवश्यकता नहीं रहेगी। सिस्टम अपने आप client के pay-in obligations को validate और process करेगा। यह पहल Sebi के broader efforts का हिस्सा है, जिसका मकसद investor protection और market transparency को मजबूत करना है। पिछले कुछ वर्षों में brokers द्वारा client securities के misuse के कई मामले सामने आए हैं, जिससे margin funding process में जोखिम बढ़े हैं। Sebi की यह नई व्यवस्था उन गलत प्रथाओं को रोकने और intermediaries के लिए compliance को आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है

अब market intermediaries, brokers और depositories को करीब सात सप्ताह से भी कम समय में अपने सिस्टम्स को इस नए framework के अनुरूप तैयार करना होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि 10 अक्टूबर 2025 से नया pledge और re-pledge सिस्टम बिना किसी तकनीकी बाधा या बाजार में व्यवधान के काम करना शुरू कर सके। इस फैसले से निवेशकों को भी लाभ होगा क्योंकि securities की सुरक्षा बढ़ेगी और margin obligations की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। Sebi की यह पहल भारतीय स्टॉक मार्केट के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो निवेशकों के विश्वास को मजबूत करती है और बाजार की स्थिरता को बढ़ावा देती है

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