SEBI का बड़ा फैसला: Credit Rating Agencies को मिलेगी नई छूट, जानिए कैसे बदलेंगे नियम!

Saurabh
By Saurabh

SEBI ने Credit Rating Agencies (CRAs) के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है, जो वित्तीय बाजारों में क्रेडिट रेटिंग की प्रक्रिया और उनके कारोबार के दायरे को व्यापक रूप से प्रभावित कर सकता है। इस प्रस्ताव के तहत, SEBI ने सुझाव दिया है कि CRAs को उन गतिविधियों को करने की अनुमति दी जाए जो वर्तमान में SEBI के नियंत्रण में नहीं हैं, बशर्ते वे संबंधित वित्तीय क्षेत्र के नियामक द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करें। इसका मतलब यह है कि CRAs अब उन वित्तीय उपकरणों के रेटिंग कर सकते हैं जो अन्य वित्तीय क्षेत्रीय नियामकों के अधीन आते हैं, जैसे RBI, IRDAI, PFRDA, IFSCA आदि। SEBI ने इस प्रस्ताव में कई कड़े और स्पष्ट शर्तें भी रखी हैं ताकि CRAs की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता बनी रहे और निवेशकों के हित सुरक्षित रहें। सबसे पहले, यह स्पष्ट किया गया है कि CRAs केवल fee-based और non-fund-based rating services ही प्रदान कर सकते हैं। इसका मतलब है कि ये एजेंसियां फंड मैनेजमेंट या निवेश से जुड़ी कोई सेवा नहीं देंगी, बल्कि केवल रेटिंग सेवा तक सीमित रहेंगी। इसके साथ ही, SEBI ने इस बात पर जोर दिया है कि CRAs को गैर-SEBI-नियंत्रित गतिविधियों को पूरी तरह से SEBI-नियंत्रित गतिविधियों से अलग करना होगा। इसके लिए CRAs को ऐसे अलग-अलग Business Units (SBUs) बनाना होंगे, जो एक-दूसरे से पूरी तरह से स्वतंत्र और Chinese Wall के जरिए अलग-थलग हों। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी तरह का कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट न हो और SEBI के नियमों के तहत आई गतिविधियों पर कोई असर न पड़े। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि CRAs को छह महीने के भीतर अपनी सभी गैर-SEBI गतिविधियों को अलग SBU में ट्रांसफर करना होगा

इन SBUs के लिए अलग-अलग रिकॉर्ड्स बनाए जाएंगे और इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि इन यूनिट्स के स्टाफ SEBI-नियंत्रित यूनिट के स्टाफ से अलग हों। हालांकि, IT Infrastructure को शेयर करने की अनुमति दी जाएगी, बशर्ते इस प्रक्रिया के लिए CRAs के बोर्ड द्वारा उचित नीतियां बनाई गई हों। नेट वर्थ के मामले में भी SEBI ने कड़े नियम बनाए हैं। CRAs की न्यूनतम नेट वर्थ को इस तरह से रिंग-फेंस किया जाएगा ताकि गैर-SEBI गतिविधियों से उत्पन्न जोखिम या नुकसान का प्रभाव SEBI-नियंत्रित गतिविधियों पर न पड़े। यह कदम CRAs की वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए जरूरी माना गया है। इसके अलावा, SEBI ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए CRAs को अपनी वेबसाइट पर उन सभी गतिविधियों की सूची प्रकाशित करने को कहा है, जो SEBI के नियंत्रण में नहीं आतीं। इसके साथ ही, CRAs को हर क्लाइंट, बेनेफिशियरी और काउंटरपार्टी को पहले से इस बात की जानकारी देनी होगी कि वे ऐसी गतिविधियों में लगे हैं, जिन पर SEBI की निवेशक सुरक्षा प्रणाली लागू नहीं होती। Engagement letters, contracts और अन्य व्यापारिक संचारों में भी यह घोषणा अनिवार्य होगी। साथ ही, इन स्टेकहोल्डर्स से एक पुष्टिकरण लेना होगा कि वे इन गतिविधियों की प्रकृति, जोखिमों एवं SEBI की गैर-उपस्थिति को समझते हैं। पुराने और चल रहे समझौतों के लिए भी CRAs को छह महीने के भीतर जरूरी disclosures करने होंगे, स्टेकहोल्डर्स से पुष्टिकरण लेना होगा और SEBI को अनुपालन रिपोर्ट सौंपनी होगी

यह कदम सुनिश्चित करेगा कि बाजार में पूरी पारदर्शिता बनी रहे और निवेशकों का विश्वास बना रहे। SEBI ने इस प्रस्ताव पर जनता और संबंधित पक्षों से 30 जुलाई तक सुझाव मांगें हैं, ताकि इस दिशा में अंतिम निर्णय लेने से पहले विभिन्न दृष्टिकोणों को समझा जा सके। यह पहल SEBI की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह वित्तीय बाजारों के नियमन को और प्रभावी बनाने के साथ-साथ नवाचार और विस्तार को भी बढ़ावा देना चाहता है। यह प्रस्ताव खासतौर पर उन CRAs के लिए अहम है जो अब तक केवल SEBI के नियंत्रण में सीमित रेटिंग सेवाएं प्रदान करते थे। अब उन्हें अन्य वित्तीय क्षेत्रीय नियामकों के तहत आने वाले वित्तीय उपकरणों की रेटिंग करने का मौका मिलेगा, जिससे उनका व्यवसायिक दायरा और प्रभावक्षेत्र बढ़ेगा। इससे न केवल CRAs की सेवा क्षमताएं बढ़ेंगी, बल्कि वित्तीय बाजारों में क्रेडिट रेटिंग की विश्वसनीयता और गुणवत्ता में भी सुधार हो सकता है। साथ ही, SEBI के ये नियम निवेशकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं ताकि CRAs के गैर-SEBI-नियंत्रित कामकाज में कोई गड़बड़ी न हो और निवेशकों को पूरी जानकारी मिलती रहे। यह कदम वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ावा देने और बाजार के समग्र विकास में सहायक साबित होगा। इस तरह, SEBI ने Credit Rating Agencies के व्यवसाय में नई संभावनाएं खोलते हुए भी कड़े नियंत्रण और पारदर्शिता के नियम निर्धारित किए हैं, जो भारतीय वित्तीय बाजारों के नियमन में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करते हैं। आने वाले महीनों में इस प्रस्ताव पर आए फीडबैक और SEBI के अंतिम फैसले पर बाजार की नजर रहेगी

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