SEBI ने Jane Street और उसकी भारत शाखा JSI Investment Pvt Ltd पर सिक्योरिटीज़ मार्केट में ट्रेडिंग करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कार्रवाई इस आरोप के बाद हुई है कि कंपनी ने एक्सपायरी-डे पर कैश और फ्यूचर्स ट्रेडिंग के माध्यम से ऑप्शन्स के प्राइसिंग में हेरफेर कर अवैध लाभ कमाए। SEBI ने इस मामले में लगभग ₹4,843.5 करोड़ की अवैध कमाई को जब्त करने का आदेश भी जारी किया है। हालांकि, इस सख्त कदम के बावजूद, नियामक सूत्रों का मानना है कि इस कार्रवाई का डेरिवेटिव वॉल्यूम्स पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। जानकारी के अनुसार, Jane Street भारत में ऑप्शन्स ट्रेडिंग के सबसे बड़े खिलाड़ियों में से एक था, खासकर वीकली ऑप्शन्स में, जहां वह एक्सपायरी दिनों पर हजारों करोड़ों रुपये के ट्रेड करता था। इसके उन्नत ट्रेडिंग स्ट्रेटेजीज़ के कारण उसकी मौजूदगी बाजार में बड़ी भूमिका निभाती थी। इसलिए, उसके अचानक बाहर होने से स्प्रेड्स और ट्रेडिंग वॉल्यूम्स में कमी आ सकती है। लेकिन SEBI की ओर से बताया गया है कि अब इंडेक्स ऑप्शन्स में डेल्टा-बेस्ड लिमिट्स लागू कर दी गई हैं, जो अत्यधिक जोखिम लेने को रोकेंगी, लेकिन नियमित ट्रेडर्स पर इसका नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। Jane Street के बाजार से हटने को लेकर कुछ विशेषज्ञों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। Zerodha के संस्थापक और CEO Nithin Kamath ने सोशल मीडिया पर लिखा कि SEBI ने Jane Street के खिलाफ अच्छा काम किया है, लेकिन इससे खुदरा निवेशकों की गतिविधि प्रभावित हो सकती है
उन्होंने कहा कि प्रॉप ट्रेडिंग फर्में, जैसे Jane Street, ऑप्शन्स ट्रेडिंग वॉल्यूम्स का लगभग 50% हिस्सा संभालती हैं। अगर वे पीछे हटती हैं, तो खुदरा निवेशकों की सक्रियता (लगभग 35%) पर भी असर पड़ेगा, जो एक्सचेंज और ब्रोकर दोनों के लिए बुरी खबर हो सकती है। Kamath ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में F&O वॉल्यूम्स बताएंगे कि हम इन बड़े प्रॉप ट्रेडिंग खिलाड़ियों पर कितना निर्भर हैं। इसी संदर्भ में स्वतंत्र डेरिवेटिव्स एनालिस्ट Preeti Chhabra ने कहा कि Jane Street के अचानक बाजार से बाहर होने से लिक्विडिटी में कमी आ सकती है क्योंकि यह बाजार में एक बड़ा वॉल्यूम प्रोवाइडर था। हालांकि, उन्होंने कहा कि लंबी अवधि में यह निवेशक विश्वास और बाजार की निगरानी के लिए सकारात्मक होगा, लेकिन अल्पकाल में इस बड़े खिलाड़ी के बाहर होने का प्रभाव महसूस किया जाएगा। डेरिवेटिव मार्केट में सक्रिय अन्य प्रतिभागियों का कहना है कि Jane Street ने विशेष रूप से एक्सपायरी दिनों में भारी मात्रा में ट्रेडिंग की है और इसके बिना बाजार में स्प्रेड्स बढ़ सकते हैं तथा ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट आ सकती है। इस मामले ने बाजार की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं, लेकिन नियामक सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई बाजार में जिम्मेदार निवेश को बढ़ावा देने और पूंजी निर्माण को आसान बनाने में मदद करेगी। SEBI की इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि भारतीय प्रतिभूति बाजार में हेरफेर और अनुचित लाभ कमाने वालों के खिलाफ कड़ी निगरानी रखी जा रही है। Jane Street के खिलाफ यह प्रतिबंध एक संदेश है कि कोई भी बड़ा या छोटा खिलाड़ी नियमों की अवहेलना नहीं कर सकता। हालांकि, कुछ ट्रेडर्स और निवेशक फिलहाल इस फैसले से असमंजस में हैं कि आने वाले दिनों में बाजार की स्थिति कैसी रहेगी
इस पूरे घटनाक्रम से यह भी साफ है कि भारतीय डेरिवेटिव्स मार्केट में प्रॉप ट्रेडिंग फर्मों की भूमिका काफी बड़ी है और उनका हटना या कम होना बाजार की गतिशीलता पर असर डाल सकता है। हालांकि, डेल्टा-बेस्ड लिमिट्स जैसे तकनीकी उपायों के कारण अत्यधिक जोखिम वाले ट्रेडर्स को नियंत्रित किया जा सकेगा, जिससे बाजार अधिक स्थिर और विश्वसनीय बनेगा। अंततः, यह कदम भारतीय बाजार में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो लंबी अवधि में निवेशकों के विश्वास को मजबूती देगा। लेकिन फिलहाल, बाजार सहभागियों को Jane Street की अनुपस्थिति के कारण आने वाले दिनों में ट्रेडिंग वॉल्यूम और लिक्विडिटी में कुछ अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले हफ्तों में F&O वॉल्यूम्स और एक्सचेंजों की रिपोर्ट इस बात का बेहतर संकेत देंगी कि इस कार्रवाई का वास्तविक प्रभाव कितना व्यापक है