SEBI के whole-time member Ananth Narayan G ने भारत के पूंजी बाजार में निवेशकों की बढ़ती संख्या के बीच बाजार जोखिम और अस्थिरता को समझने की अहमियत पर जोर दिया है। उन्होंने International Conference on Financial Planning में कहा कि बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं और हर निवेशक को अपनी जोखिम सहनशीलता के अनुसार निवेश पोर्टफोलियो तैयार करना चाहिए। Narayan ने बताया कि मार्च 2020 में 4.2 करोड़ थे जो निवेशक, अब बढ़कर 13 करोड़ से अधिक हो गए हैं। इस वृद्धि के बावजूद, बहुत से निवेशक अभी भी जोखिम और Volatility के सही मायने को समझने में पीछे हैं। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2019 से जून 2025 के बीच घरेलू निवेशकों ने risk-seeking, equity-oriented mutual fund schemes में लगभग Rs 18 लाख करोड़ (करीब $210 बिलियन) का निवेश किया है। यह राशि विदेशी पूंजी निवेशकों (FPIs) द्वारा भारतीय equity markets में किए गए $29 बिलियन के निवेश से सात गुना अधिक है। Narayan ने बाजार के विश्वास और governance की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने चेतावनी दी कि गंभीर governance failures या market manipulation से निवेशकों का विश्वास टूट सकता है। इसलिए first-line regulators जैसे exchanges, depositories के साथ Sebi और अन्य हितधारकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उन्होंने एक प्रसिद्ध कहावत का उल्लेख किया, “If something sounds too good to be true, it probably is too good to be truthful,” यानी निवेशकों को बाजार में सतर्क रहना चाहिए और अपनी निवेश निर्णयों की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए
उन्होंने diversification को भी जरूरी बताया। Narayan ने कहा कि sound financial planning के लिए asset classes में diversification जरूरी है, लेकिन छोटे निवेशकों में equity में अत्यधिक निवेश करने की प्रवृत्ति देखी गई है। इस चुनौती को देखते हुए Sebi debt और commodities markets को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है ताकि निवेशकों के सामने बेहतर विकल्प आ सकें। डिजिटल युग में cyber risks और digital frauds की बढ़ती घटनाओं पर भी Narayan ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी करने वाले अक्सर highly organized और sophisticated होते हैं, जो unsuspecting investors को निशाना बनाते हैं। इस कारण निवेशकों को सतर्क रहना और आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए। इसके अलावा, Narayan ने SEBI की एक नई पहल का भी जिक्र किया जिसमें एक household survey किया जाएगा। इस सर्वे का उद्देश्य यह समझना है कि कैसे और अधिक निवेशकों को बाजार में लाया जा सकता है और वे जोखिमों के प्रति कितने जागरूक हैं। इसके साथ ही यह सर्वे responsible investing को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कदमों की पहचान करेगा। Narayan ने आगे बताया कि Sebi निकट भविष्य में डिजिटल फ्रॉड awareness पर विशेष ध्यान देगा
Sebi exchanges, depositories और AMFI (Association of Mutual Funds in India) के साथ मिलकर एक समन्वित अभियान चला रहा है, जिसका लक्ष्य है fraudsters को रोकना और unregistered financial entities को बंद करवाना। SEBI के whole-time member Ananth Narayan G की यह बात यह साफ करती है कि भारत के पूंजी बाजार में निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ ही बाजार के जोखिम और अस्थिरता को समझना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है निवेशकों की सुरक्षा और विश्वास बनाए रखना। निवेशकों को चाहिए कि वे बाजार की वास्तविकताओं को समझें, अपनी risk appetite के अनुसार निवेश करें और डिजिटल फ्रॉड से सतर्क रहें। भारतीय equity markets में घरेलू निवेशकों का दबदबा लगातार बढ़ रहा है और Sebi की यह पहल इस दिशा में एक मजबूत कदम है, जो निवेशकों के अनुभव को बेहतर बनाएगा और बाजार को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाएगा। Ananth Narayan की बातों से यह भी स्पष्ट होता है कि सही financial planning और diversification के बिना निवेशकों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, निवेशक न केवल returns के प्रति उत्साहित हों, बल्कि market volatility, risk और governance के महत्व को भी समझें और अपने निवेश निर्णयों में सतर्कता बरतें। साथ ही डिजिटल सुरक्षा को लेकर भी वे अधिक जागरूक हों ताकि fraudsters के जाल में न फंसें। SEBI की यह नई पहल और जागरूकता अभियान भारतीय पूंजी बाजार को और अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाने में सहायक साबित होगा