SEBI ने Investment Advisers (IAs) और Research Analysts (RAs) के लिए नए नियमों और प्रस्तावों की एक श्रृंखला पेश की है, जिसका लक्ष्य इन पेशेवरों के लिए काम करने की प्रक्रिया को आसान बनाना और मौजूदा नियमों में व्यावहारिक चुनौतियों को दूर करना है। गुरुवार को जारी एक consultation paper में SEBI ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिनमें IAs और RAs को अपने क्लाइंट्स को past performance प्रदान करने की अनुमति देना, IAs को pre-distributed assets पर second opinion देने की मंजूरी देना, और शिक्षा मानदंडों में रियायत शामिल है। SEBI ने कहा है कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य निवेश सलाहकारों और रिसर्च एनालिस्टों के लिए व्यवसाय की सुविधा बढ़ाना और नियमों में सुधार करना है ताकि उनके सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान हो सके। इसके लिए regulator ने जनता से सुझाव मांगे हैं। सबसे अहम प्रस्तावों में शामिल है कि अब IAs और RAs अपने क्लाइंट्स को उनके अनुरोध पर past performance का डाटा प्रदान कर सकेंगे। हालांकि, यह past performance केवल एक-से-एक आधार पर ही साझा किया जाएगा और इसे सार्वजनिक मीडिया, वेबसाइट या अन्य किसी माध्यम से साझा नहीं किया जाएगा। इस डाटा के साथ एक disclaimer भी अनिवार्य होगा, जो क्लाइंट्स को आवश्यक चेतावनी देगा। इसके अलावा, SEBI ने यह भी प्रस्तावित किया है कि IAs को pre-distributed assets पर दूसरे राय (second opinion) देने की अनुमति दी जाए। इसका मतलब है कि यदि किसी क्लाइंट के पास पहले से किसी अन्य संस्था के साथ asset distribution arrangement है और वह दूसरा राय लेना चाहता है, तो IA यह सेवा दे सकता है। इस सेवा के लिए IA को assets के मूल्य का वार्षिक 2.5% तक शुल्क लेने की अनुमति होगी
इस प्रक्रिया में IA को क्लाइंट से स्पष्ट रूप से यह भी बताना होगा कि उन्हें advisory fees के अलावा distributor consideration के लिए अतिरिक्त खर्च भी देना होगा, और इस सहमति को हर साल दोबारा लेना होगा। IAs के लिए compulsorily corporatization की प्रक्रिया को भी SEBI ने आसान बनाने की योजना बनाई है। नए नियमों के अनुसार, यदि कोई individual IA 300 क्लाइंट्स की संख्या पार कर लेता है या किसी वित्तीय वर्ष में 3 करोड़ रुपये से अधिक फीस वसूल करता है, तो उसे तुरंत Investment Advisers Administration and Supervisory Body (IAASB) को सूचित करना होगा और non-individual IA के रूप में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करना होगा। इस प्रक्रिया में IA को तीन महीने के अंदर in-principle approval लेना होगा और उसके बाद तीन महीने के अंदर संक्रमण पूरा करना होगा। संक्रमण काल के दौरान IA नए क्लाइंट्स को onboard कर सकता है और फीस भी वसूल सकता है। शैक्षणिक योग्यता के मानदंडों में भी SEBI ने कुछ बदलाव प्रस्तावित किए हैं। वर्तमान में, finance, business management, accountancy, commerce, economics, capital market जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में स्नातक होना आवश्यक था। नए प्रस्तावों के अनुसार, किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री या समकक्ष योग्यता, या CFA Institute से CFA Charter, और NISM या अन्य मान्यता प्राप्त संस्थान से संबंधित प्रमाणपत्र भी IA/RA के लिए योग्य माना जाएगा। इसके अलावा, IAs के लिए Post Graduate Program in Securities Market (Investment Advisory) या Post Graduate Program in Financial Planning या अन्य NISM के द्वारा निर्दिष्ट कोई प्रोग्राम भी मान्य होगा। Research Analysts के लिए भी Post Graduate Program in Securities Market (Research Analysis) या अन्य NISM द्वारा निर्दिष्ट प्रोग्राम को योग्यता के रूप में स्वीकार किया जाएगा
इसके अलावा, SEBI ने IAs और RAs के लिए proof of address, CIBIL रिपोर्ट, net worth/asset liability statement, और infrastructure details प्रस्तुत करने की आवश्यकताओं में भी छूट देने का प्रस्ताव रखा है। इससे इन पेशेवरों की पंजीकरण प्रक्रिया और संचालन में आसानी होगी। यह सभी प्रस्ताव भारतीय पूंजी बाजार में निवेश सलाहकारों और रिसर्च एनालिस्टों के लिए काम करने की प्रक्रिया को सरल बनाने और उनके व्यवसाय में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक कदम हैं। SEBI की ये पहल न केवल इन पेशेवरों को अपने क्लाइंट्स के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने में मदद करेगी, बल्कि निवेशकों को भी बेहतर सलाह और सेवा मिलने की उम्मीद बढ़ाएगी। नए नियमों के लागू होने से पहले SEBI जनता और संबंधित हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियां प्राप्त करेगा, जिसके बाद अंतिम रूप से इन बदलावों को लागू किया जाएगा। इससे भारतीय निवेश बाजार में बेहतर नियामक व्यवस्था और व्यवसाय के सुगम माहौल का निर्माण होगा