SEBI ने हाल ही में retail algo trading के नए नियमों को लागू करने की अंतिम तारीख को 1 अक्टूबर 2025 तक बढ़ा दिया है। यह फैसला बाजार के विभिन्न हिस्सेदारों से मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर लिया गया है, ताकि नए नियमों को बिना किसी व्यवधान के प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। पहले ये नियम 1 अगस्त 2025 से लागू होने थे, लेकिन अब इसके लिए बाजार की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए अधिक समय दिया गया है। फरवरी में SEBI ने एक सर्कुलर जारी किया था जिसका शीर्षक था ‘Safer participation of retail investors in Algorithmic trading’। इस सर्कुलर का उद्देश्य था कि retail investors को algorithmic trading में सुरक्षित रूप से भागीदारी का अवसर मिले। इसके लिए Stock Brokers और Stock Exchanges को जोखिम प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई थी। SEBI ने इस नई व्यवस्था के तहत सभी हितधारकों – निवेशक, ब्रोकर्स, algo providers/vendors, और Market Infrastructure Institutions (जैसे exchanges, depositories और clearing corporations) के अधिकार और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने का प्रयास किया। 22 जुलाई को National Stock Exchange (NSE) ने algo providers के empanelment और retail algo के registration के लिए विस्तृत ऑपरेशनल मोडैलिटीज जारी कीं। NSE ने कहा कि अब सभी algorithmic trading strategies को अनिवार्य रूप से पंजीकृत करना होगा और उन्हें एक unique identification दिया जाएगा। यह revised unique identification mechanism exchanges को client Direct API (Application Programming Interface) से आने वाले algo orders की पहचान करने में मदद करेगा
NSE ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी algo providers को अपने algo products को पंजीकृत करने से पहले exchange के साथ empanel होना आवश्यक होगा। इसके अलावा, algo strategy की application और registration trading member के माध्यम से ही की जा सकेगी, तभी exchange द्वारा algo ID जारी की जाएगी। यह प्रक्रिया बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और जोखिमों को नियंत्रित करने में सहायक होगी। SEBI ने कहा है कि इस कदम का मकसद retail investors की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बाजार की ईमानदारी बनाए रखना है। बाजार में algorithmic trading की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए यह आवश्यक हो गया था कि एक सुदृढ़ नियमावली तैयार की जाए जिससे बाजार के विभिन्न पक्षों के बीच संतुलन बना रहे। Stock brokers और ISF (Investment Service Firms) के प्रतिनिधियों ने SEBI को समय सीमा बढ़ाने के लिए कई बार अनुरोध किया था ताकि वे नए नियमों के अनुसार अपनी तैयारियों को पूरा कर सकें। SEBI ने इन अनुरोधों को स्वीकार करते हुए कहा कि 1 अक्टूबर 2025 से यह नया नियम लागू होगा। इससे बाजार में किसी भी प्रकार की अराजकता या निवेशकों के लिए जोखिम की संभावना को कम किया जा सकेगा। यह बदलाव खासकर उन retail investors के लिए महत्वपूर्ण है जो algorithmic trading में बढ़ती दिलचस्पी दिखा रहे हैं। पहले retail investors इस क्षेत्र में बिना पर्याप्त नियामक नियंत्रण के प्रवेश कर रहे थे, जिससे उन्हें और पूरे बाजार को जोखिम हो सकता था
नए नियमों के तहत, सभी algo strategies की पंजीकरण प्रक्रिया और unique IDs के माध्यम से उनकी निगरानी संभव होगी। NSE और SEBI का यह कदम algorithmic trading को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे बाजार प्रतिभागियों को बेहतर नियंत्रण मिलेगा और संभावित दुरुपयोग की संभावना कम होगी। इस प्रक्रिया के तहत exchanges को भी यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे risk management के लिए आवश्यक कदम उठाएं और सभी algo providers की पैनलिंग तथा पंजीकरण की जांच करें। इस पूरे ढांचे का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि retail investors algorithmic trading में भाग लें, लेकिन उनके हितों की रक्षा हो और बाजार की स्थिरता बनी रहे। यह नियम बाजार के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए और निवेशकों को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी हैं। इस प्रकार, SEBI और NSE द्वारा जारी किए गए नए नियमों और विस्तार की घोषणा से यह स्पष्ट हो गया है कि बाजार नियामक संस्थान retail investors को algorithmic trading में सुरक्षित और नियंत्रणीय भागीदारी देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अब इस प्रक्रिया के तहत सभी हितधारकों को समय रहते तैयार होकर नए नियमों का पालन करना होगा ताकि 1 अक्टूबर 2025 के बाद यह व्यवस्था पूरी तरह से लागू हो सके