Sebi ने निवेश सलाहकारों और रिसर्च एनालिस्ट्स के लिए डिजिटल एक्सेसिबिलिटी नियमों की समय सीमा बढ़ाई, जानिए क्या हैं नए बदलाव

Saurabh
By Saurabh

Securities and Exchange Board of India (Sebi) ने निवेश सलाहकारों (Investment Advisors – IAs) और रिसर्च एनालिस्ट्स (Research Analysts – RAs) के लिए डिजिटल एक्सेसिबिलिटी संबंधित अनुपालन समय सीमाओं को बढ़ा दिया है और रिपोर्टिंग आवश्यकताओं में भी संशोधन किया है। यह कदम Sebi द्वारा जुलाई 31 को जारी किए गए डिजिटल एक्सेसिबिलिटी फ्रेमवर्क के तहत लागू नियमों के पालन के लिए अतिरिक्त समय देने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस फ्रेमवर्क के तहत सभी रेगुलेटेड संस्थाओं को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 और उससे संबंधित नियमों के अनुरूप बनाना अनिवार्य कर दिया गया था। Sebi की ओर से शुक्रवार को जारी सर्कुलर में बताया गया कि पहले अगस्त 30, 2025 तक जो रिपोर्टिंग और अनुपालन की समय सीमा निर्धारित की गई थी, उसे अब सितंबर 30, 2025 तक बढ़ा दिया गया है। इस नई तारीख तक IAs और RAs को अपनी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सूची Sebi को जमा करनी होगी और साथ ही अनुपालन या कार्रवाई रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी। यह बदलाव इस बात को ध्यान में रखते हुए किया गया है कि कई संस्थाओं ने अपनी प्रणालियों और प्रक्रियाओं को नए नियमों के अनुरूप ढालने में कठिनाइयों का सामना किया है। साथ ही, IAAP (Independent Accessibility Audit Professional) प्रमाणित विशेषज्ञों की नियुक्ति के लिए जो अंतिम तिथि 30 सितंबर, 2025 थी, उसे दिसंबर 14, 2025 तक बढ़ा दिया गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के एक्सेसिबिलिटी ऑडिट के लिए भी समय सीमा बढ़ाते हुए अब इसे अप्रैल 30, 2026 तक पूरा करना होगा। ऑडिट के बाद पाए गए मुद्दों को सुधारने और पूरी तरह से अनुपालन सुनिश्चित करने की अंतिम तारीख भी 31 जुलाई, 2026 कर दी गई है। इसके अलावा, अब से प्रत्येक वर्ष डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के एक्सेसिबिलिटी ऑडिट की रिपोर्ट Sebi को जमा करने की भी समय सीमा एक साल बढ़ाई गई है, जो अब अप्रैल 30, 2027 है

इससे पहले जारी जुलाई 31 के सर्कुलर में एक चरणबद्ध रोडमैप दिया गया था, जिसमें सभी रेगुलेटेड संस्थाओं को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सूची बनानी थी, IAAP नियुक्त करना था, ऑडिट कराना था और सुधारात्मक कार्रवाई को पूरा करना था। इसके साथ ही, एक्सेसिबिलिटी अनुपालन की वार्षिक रिपोर्टिंग और शिकायत निवारण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने की भी व्यवस्था की गई थी। Sebi ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब IAs और RAs के लिए रिपोर्टिंग प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। स्टॉक ब्रोकर्स और डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स की रिपोर्टिंग जिम्मेदारी स्टॉक एक्सचेंजों और डिपॉजिटरीज को सौंपी गई है, जबकि IAs और RAs की रिपोर्टिंग BSE Limited को करनी होगी। इसके विपरीत, MIIs और अन्य रेगुलेटेड संस्थाओं की रिपोर्टिंग Sebi को ही देनी होगी। यह बदलाव अनुपालन प्रक्रिया को सरल और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। Sebi का यह निर्णय इस बात को दर्शाता है कि वह समावेशिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ व्यावहारिक चुनौतियों को भी समझता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की एक्सेसिबिलिटी सुनिश्चित करना न केवल दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि व्यापक निवेशक सुरक्षा और वित्तीय समावेशन को भी मजबूत करता है। समय सीमाओं में विस्तार से IAs और RAs को अपनी प्रणालियों को परिष्कृत करने और बेहतर तरीके से नए नियमों के अनुरूप कार्य करने का अवसर मिलेगा। यह बदलाव ऐसे समय में आया है, जब डिजिटल वित्तीय सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है और निवेशकों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है

Sebi के इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सभी निवेशकों के लिए सहज और समावेशी उपयोग की सुविधा सुनिश्चित होगी। इससे न केवल दिव्यांग निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि पूरे वित्तीय बाजार की पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी मजबूत होगी। इस प्रकार, Sebi ने डिजिटल एक्सेसिबिलिटी के नियमों को लागू करने में लचीलापन दिखाते हुए नियमों की जटिलताओं को कम करने का प्रयास किया है। आगे आने वाले महीनों में इस दिशा में और भी सुधार और सख्ती की संभावना बनी रहेगी, ताकि निवेशकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ तकनीकी प्रगति का लाभ सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंच सके

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