SEBI ने पिछले सप्ताह एक ऐसे मामले में जबरदस्त कार्रवाई की है जिसने न केवल भारत बल्कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में हड़कंप मचा दिया है। न्यूयॉर्क स्थित हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग फर्म Jane Street पर भारतीय स्टॉक और डेरिवेटिव बाजारों को नियंत्रित कर भारी लाभ कमाने का आरोप लगाया गया है। SEBI ने Jane Street समूह को भारतीय शेयर बाजार में किसी भी गतिविधि से प्रतिबंधित कर दिया है और उनसे 4,843 करोड़ रुपये के “अवैध मुनाफे” की वसूली का आदेश दिया है। SEBI के पास इस आरोप को साबित करने के लिए इतने सटीक और विस्तृत डेटा हैं कि वैश्विक वित्तीय मीडिया भी इस पर काफी चर्चा कर रही है। Jane Street ने फिलहाल इस आदेश को Securities Appellate Tribunal में चुनौती नहीं दी है, लेकिन कंपनी ने अपने कर्मचारियों को एक आंतरिक मेमो भेजकर आरोपों से इनकार किया है। इस मेमो में Jane Street ने कहा है कि जो गतिविधि SEBI ने “Intraday Index Manipulation” कहा है, वह सिर्फ सामान्य इंडेक्स आर्बिट्रेज ट्रेडिंग थी, जो बाजार में कीमतों के संतुलन के लिए की जाती है। आसान भाषा में कहें तो Jane Street का दावा है कि वे बैंक निफ्टी के विकल्प (options) और कैश/फ्यूचर्स मार्केट के बीच कीमतों के अंतर को खत्म करने के लिए ट्रेडिंग कर रहे थे। आर्बिट्रेज ट्रेडिंग में सस्ते बाजार से खरीदकर महंगे बाजार में बेचकर लाभ कमाना शामिल होता है। लेकिन SEBI का तर्क है कि Jane Street ने केवल विपरीत पोजीशन लेने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने कीमतों को अपनी पसंद के अनुसार नियंत्रित किया ताकि विकल्प बाजार में उनकी पोजीशन लाभकारी हो सके। SEBI ने जनवरी 17, 2024 के दिन की ट्रेडिंग को उदाहरण के तौर पर पेश किया है
उस दिन Jane Street ने सुबह के पहले आधे घंटे में बैंक निफ्टी इंडेक्स और उसके अंतर्निहित स्टॉक्स में लगभग 4,370 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जो उस समय के कुल बाजार ट्रेडिंग वॉल्यूम का 15 से 25 प्रतिशत था। यह वॉल्यूम दूसरी सबसे बड़ी ट्रेडर से तीन से चार गुना अधिक था। इसका मतलब है कि Jane Street न केवल खरीदारी कर रहा था, बल्कि शेयरों की कीमतों को ऊपर धकेल रहा था। इसके चलते बैंक निफ्टी का इंडेक्स भी ऊपर गया और खुदरा निवेशकों को कॉल खरीदने और पुट बेचने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसी दौरान, Jane Street ने बैंक निफ्टी के विकल्प बाजार में भारी शॉर्ट पोजीशन ली, जो लगभग 32,115 करोड़ रुपये के बराबर थी। उन्होंने पुट खरीदे और कॉल बेचे। दिन के अंत में, SEBI के डेटा के अनुसार Jane Street ने अपने सुबह के खरीदे गए शेयर और फ्यूचर्स बेच दिए, जिनका ट्रेंड लगभग 25 से 37 प्रतिशत बाजार के कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम के बराबर था। इस भारी बिक्री के कारण शेयर की कीमतें नीचे आ गईं और विकल्प बाजार में उनके शॉर्ट पोजीशन से भारी मुनाफा हुआ। वहीं, बैंक निफ्टी के विकल्प में उस दिन Jane Street ने लगभग 735 करोड़ रुपये का लाभ कमाया, जबकि कैश और फ्यूचर्स मार्केट में लगभग 616 करोड़ का नुकसान हुआ। SEBI ने कुल 21 दिनों की ट्रेडिंग का विश्लेषण कर Jane Street के “अवैध लाभ” को 4,843 करोड़ रुपये आंका है
SEBI और Jane Street के बीच विवाद का मूल प्रश्न यही है कि क्या यह गतिविधि सिर्फ “बेसिक आर्बिट्रेज” थी या “मैनिपुलेशन”। SEBI का तर्क है कि सामान्य आर्बिट्रेज में खरीदी और बिक्री का मूल्य लगभग बराबर होता है, जबकि Jane Street के मामले में विकल्प बाजार में बिक्री मूल्य कैश और फ्यूचर्स बाजार में खरीद मूल्य से सात गुना अधिक था। इसके अलावा, Jane Street ने बाजार के दिशा-निर्देशन में भी भारी भूमिका निभाई। Jane Street ने भारत में दो कंपनियां, JS1 Investments Pvt Ltd और JS2 Investments Pvt Ltd, बनाई हैं जिनके माध्यम से सुबह में शेयर खरीदे और शाम को बेचे जाते थे। जबकि उनके सिंगापुर स्थित सहयोगी Jane Street Singapore Pte Ltd और Jane Street Asia Trading Ltd विकल्प बाजार में ट्रेडिंग करते थे। यह व्यवस्था भारत के नियमों को दरकिनार करने के लिए लगती है क्योंकि विदेशी कंपनियों को भारत में डे-टू-डे शेयर खरीदने और बेचने की अनुमति नहीं है। SEBI ने यह भी साबित किया है कि सुबह के समय Jane Street के कई ट्रेड अंतिम ट्रेड कीमत (LTP) से ऊपर थे, जबकि शाम को वे LTP से नीचे थे, जिससे पता चलता है कि उनका उद्देश्य कीमतों को मुनाफे के लिए नियंत्रित करना था। SEBI के अनुसार, यह स्पष्ट रूप से Prohibition of Fraudulent and Unfair Trade Practices Regulations (PFUTP) का उल्लंघन है, जो बाजार में धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकता है। इस मामले पर विदेशी ट्रेडिंग फर्म XTX Markets के सह-संस्थापक Alex Gerko ने भी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि SEBI के आरोप बहुत गंभीर हैं और कहीं भी इस तरह की गतिविधियां अवैध मानी जाती हैं। अमेरिका में तो इस तरह के मामलों में जेल भी हो सकती है
भारतीय नियम भी समान हैं। अभी अंतिम निर्णय Securities Appellate Tribunal पर आना बाकी है, लेकिन SEBI के पास इतने ठोस सबूत हैं कि Jane Street के लिए अपनी सफाई देना आसान नहीं होगा। यह मामला भारतीय पूंजी बाजार की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। इस तरह का खुलासा न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी हाइ-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और आर्बिट्रेज रणनीतियों के नियमों और निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करता है। SEBI ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बाजार में कोई भी खिलाड़ी यदि नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह विदेशी हो या घरेलू