Securities and Exchange Board of India (SEBI) के नए अध्यक्ष Tuhin Kanta Pandey ने वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ती चिंता जताते हुए खासतौर पर preferential allotments और false corporate disclosures की समस्याओं पर कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने एक वित्तीय मंच पर कहा कि SEBI उन कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से नहीं हिचकिचाएगा, जो इन गलत प्रथाओं का इस्तेमाल कर वित्तीय बाजारों को गुमराह करने की कोशिश करती हैं। Preferential allotments का मतलब है कि कंपनियां अपने शेयर कुछ चुनिंदा अंदरूनी निवेशकों को बाजार मूल्य से कम कीमत पर जारी करती हैं। Pandey ने बताया कि जब ये allotments गलत तरीके से इस्तेमाल किए जाते हैं, तो यह corporate control को प्रभावित करता है और निवेशकों के साथ अन्याय करता है। इसके जरिए संदिग्ध promoters को संरक्षण मिलता है या कुछ खास पक्षों को अवैध लाभ पहुंचाने के लिए मूल्य का हस्तांतरण होता है। उन्होंने कंपनियों से अपील की कि वे इन allotments में पूरी पारदर्शिता बरतें और SEBI भी इसके लिए कड़ी निगरानी और नियम लागू करेगा। Pandey ने false corporate disclosures पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई बार कंपनियां अपनी आय या महत्वपूर्ण वित्तीय आंकड़ों को गलत तरीके से रिपोर्ट करती हैं, जिससे बाजार और आम जनता गुमराह होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि SEBI के surveillance सिस्टम अब असामान्य पैटर्नों की तेजी से पहचान कर रहे हैं और उल्लंघन पाए जाने पर regulator तुरंत कड़ी कार्रवाई करेगा। SEBI के अध्यक्ष ने यह भी बताया कि उन्होंने SEBI के नियामक ढांचे को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं
1 मार्च 2025 से पद संभालने के बाद, Pandey ने एक समिति बनाई है जो बोर्ड सदस्यों के हितों के टकराव (conflict-of-interest) के नियमों में सुधार करेगी। यह खासकर 17 साल पुराने कोड में मौजूद कमियों को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। इसके अलावा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (foreign portfolio investors) के लिए disclosure नियमों को भी कड़ा किया जाएगा, जिससे अधिक पारदर्शिता और बाजार की बदलती जरूरतों के अनुरूप रिपोर्टिंग सुनिश्चित हो सके। Pandey ने SEBI के अंदर वरिष्ठ पदों के लिए governance नियमों को भी सख्त किया है। इसमें नए cooling-off क्लॉज और प्रमुख नियुक्तियों की निगरानी शामिल हैं, ताकि बाजार संस्थानों में बेहतर जवाबदेही बनी रहे। उन्होंने कहा कि यह सभी उपाय SEBI के surveillance और enforcement तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाएंगे। इस नए regulatory दृष्टिकोण का मतलब यह है कि अब preferential allotments और corporate disclosures जैसे मुद्दे SEBI की नजरों से बच नहीं पाएंगे। जो पहले तकनीकी या मामूली समझे जाते थे, अब उन्हें पारदर्शिता और सच्चाई के उच्चतम मानकों के तहत देखा जाएगा। Pandey के शब्दों में, “अब superficial compliance से काम नहीं चलेगा। कंपनियों को अपने कामकाज को पूरी तरह से स्पष्ट और निष्पक्ष बनाना होगा
” यह कदम खासतौर पर उन निवेशकों और लिस्टेड कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है जो भारत के पूंजी बाजारों में भरोसे और स्थिरता की उम्मीद रखते हैं। हाल के वर्षों में कई corporate और market upheavals ने इस बात को और स्पष्ट कर दिया है कि regulator को और सख्त होना होगा। SEBI के renewed focus और updated governance norms के साथ, अब बाजार में opaque corporate conduct की सहनशीलता बहुत कम हो जाएगी। Tuhin Kanta Pandey ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि preferential allotments और false disclosures के दुरुपयोग को अब SEBI बर्दाश्त नहीं करेगा। नए surveillance technology और enforcement readiness के साथ, regulator का मकसद भारत के capital markets को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। इससे न केवल निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि कंपनियों को भी बेहतर corporate governance अपनाने के लिए प्रेरणा मिलेगी। इस नए युग में SEBI का संदेश साफ है: अब कोई भी कंपनी या promoter अपने हितों के लिए नियमों की अनदेखी नहीं कर सकता। पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही अब बाजार की बुनियादी शर्तें होंगी। ऐसे माहौल में ही भारत के शेयर बाजार और आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी