RBI ने किया बड़ा फैसला: Repo Rate 5.50% पर स्थिर, क्या आगे होगा रियायत का इंतजार?

Saurabh
By Saurabh

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी अगस्त 6 की मोनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) बैठक में सभी की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए अपनी पॉलिसी repo rate को 5.50% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। यह फैसला इस बात को दर्शाता है कि RBI फिलहाल मौद्रिक नीति में बदलाव के प्रति सतर्क है, भले ही देश की रिटेल मुद्रास्फीति जून में छह साल के निचले स्तर 2.10% पर आ गई हो। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक और संरचनात्मक जोखिमों के कारण, जैसे कि अमेरिका द्वारा भारत के निर्यात पर बढ़ते हुए टैरिफ, आर्थिक विकास पर अनिश्चितता बनी हुई है, जो तत्काल किसी कटौती के पक्ष में नहीं दिखती। RBI ने जून में अप्रत्याशित रूप से 50 बेसिस प्वाइंट (bps) की कटौती कर सभी को चौंका दिया था और नीति को ‘न्यूट्रल’ रखने की ओर इशारा किया था। उस समय यह भी कहा गया था कि आगे की कोई भी कटौती आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार की व्यापक सहमति यही है कि कोई भी अगली दर में कटौती वित्त वर्ष के बाद के हिस्सों में ही देखने को मिल सकती है। पहले तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर लगभग 7.4% रही, जो काफी मजबूत संकेत है, वहीं FY 2026 के लिए औसत मुद्रास्फीति लगभग 3.4% के आसपास रहने का अनुमान है। इसके बावजूद, व्यापारिक अनिश्चितता और पहले से हुई दर कटौती के प्रभाव का पूरी तरह से प्रसार न होना RBI की नीतिगत फैसलों में सावधानी बरतने का कारण बना है। RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों का Capital to Risk-Weighted Assets Ratio (CRAR) 17% से ऊपर बना हुआ है, जो बैंकिंग प्रणाली की मजबूत स्थिति को दर्शाता है

साथ ही, Net Interest Margin (NIM) 3.5% पर है, और liquidity coverage ratio भी 132% के मजबूत स्तर पर कायम है। बैंकिंग सेक्टर के Gross Non-Performing Assets (GNPA) 2.2% पर हैं, जबकि credit-deposit (CD) ratio 78.9% दर्ज किया गया है। गवर्नर ने यह भी कहा कि बैंकिंग प्रणाली में तरलता को पर्याप्त बनाए रखना RBI की प्राथमिकता है ताकि अर्थव्यवस्था की उत्पादक जरूरतें पूरी हो सकें और बाजार में नीतिगत फैसलों का प्रभाव सुचारू रूप से पहुंचे। उन्होंने बताया कि RBI ने एक आंतरिक समूह बनाकर liquidity management framework की समीक्षा की है, जिसका रिपोर्ट जल्द ही RBI वेबसाइट पर सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया जाएगा। RBI के मुताबिक, पिछले MPC बैठक के बाद से दैनिक औसत प्रणालीगत तरलता लगभग ₹3 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है, जो इससे पहले के दो महीनों के ₹1.6 लाख करोड़ के औसत से दोगुनी है। इसके अतिरिक्त, पिछली बैठक में CRR में 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती से तरलता की स्थिति और बेहतर होने की उम्मीद है। राजकोषीय दरों की बात करें तो Standing Deposit Facility (SDF) rate 5.25% पर स्थिर है, जबकि Marginal Standing Facility (MSF) rate और Bank Rate दोनों 5.75% पर कायम हैं। MPC बैठक में गवर्नर ने यह भी बताया कि Q1 में merchandise trade deficit और बढ़ा है। अप्रैल-मई 2025-26 में gross FDI स्थिर रहा, लेकिन net FDI में कमी आई क्योंकि outward investments में वृद्धि हुई। Core inflation में भी हल्की बढ़ोतरी हुई है, जो मुख्य रूप से सोने की कीमतों में हुई तेजी के कारण है

CPI inflation चौथे तिमाही में लगभग 4% तक बढ़ सकता है। RBI ने FY 2026 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.5% रखा है, जिसमें Q2 में 6.7%, Q3 में 6.6% और Q4 में 6.3% की वृद्धि दर शामिल है। संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि MPC ने एकमत से फैसला किया कि 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती के बाद अब repo rate को 5.50% पर स्थिर रखा जाएगा। नीति दृष्टिकोण को ‘Neutral’ बनाए रखा गया है, जो संकेत देता है कि RBI फिलहाल मौद्रिक नीति में किसी भी बड़े बदलाव से बचना चाहता है और आने वाले आंकड़ों के आधार पर ही आगे की रणनीति बनाएगा। यह फैसला वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, व्यापार जोखिमों और भारत की घरेलू आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। बाजार इस निर्णय को संतुलित और अपेक्षित मान रहा है, क्योंकि यह विकास और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है। आज की इस MPC बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि RBI फिलहाल दरों में कटौती की ओर नहीं बढ़ रहा है, लेकिन आर्थिक संकेतकों के आधार पर भविष्य में अपनी नीति में आवश्यकतानुसार परिवर्तन कर सकता है। बैंकिंग क्षेत्र की मजबूत पूंजी स्थिति और तरलता प्रबंधन के कदम भी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं। इस निर्णय से स्टॉक मार्केट और आर्थिक गतिविधियों पर असर होगा, लेकिन फिलहाल निवेशक इस स्थिर नीति से संतुष्ट नजर आ रहे हैं। आने वाले महीनों में आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक आर्थिक माहौल पर नजर रखी जाएगी कि RBI कब और किस दिशा में अपनी मौद्रिक नीति में बदलाव करता है

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