पिछले पाँच वर्षों में भारत में Public capex में जबरदस्त तेजी देखी गई है, लेकिन इसके विपरीत Private sector investment में कमजोरी ने आर्थिक गति को प्रभावित करने की चेतावनी दी है। Finance Ministry की जून की मासिक समीक्षा में साफ कहा गया है कि “Slow credit growth और private investment की कम रुचि आर्थिक गति के तेज होने में बाधा डाल सकती है,” जिससे यह स्पष्ट होता है कि निजी क्षेत्र को निवेश बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है। भारत की बड़ी कंपनियां यानी India Inc. रिकॉर्ड-उच्च मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन निवेश करने की इच्छा उनके पास मौजूद क्षमता के अनुरूप नहीं है। इसका नतीजा यह हुआ कि private investment पिछड़ता रहा, जबकि सरकार ने कोविड के बाद पूंजीगत व्यय (capital expenditure) को दोगुना कर दिया। Private capex में आई इस सुस्ती के पीछे कई कारण हैं। YES Securities के अनुसार, घरेलू मांग में कमजोरी इसका एक बड़ा कारण है। Urban और rural दोनों ही क्षेत्रों में उपभोग में नरमी आई है, जिससे कुल मांग का माहौल कमजोर हुआ है। इसके अलावा, भारत के निर्यात का खर्च वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में 9 से 15 प्रतिशत अधिक है, जो घरेलू कंपनियों को नए उत्पादन क्षमता जोड़ने से रोक रहा है। वैश्विक व्यापार की अनिश्चितताएं भी निवेश को प्रभावित कर रही हैं। US-China व्यापार नीति के चलते बनी अनिश्चितता और चीनी माल पर अपेक्षित टैरिफ में कमी ने भारत में उत्पादन को चीन से हटाने के प्रोत्साहन को कम कर दिया है
वहीं, RBI के हालिया सर्वे के मुताबिक, capacity utilisation लगभग 74-75 प्रतिशत पर अटका हुआ है, जबकि सामान्यतः 80-85 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचने पर ही नई निवेश की पहल होती है। Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI) के एक अध्ययन ने भी कंपनियों के बीच FY26 के लिए पूंजीगत व्यय को लेकर “conservative approach और apprehension” की बात कही है। इस बीच, Public capital expenditure ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। FY20 में Rs 3.4 लाख करोड़ से बढ़कर FY25 में यह Rs 10.2 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो 25 प्रतिशत की CAGR दर्शाता है। यह वृद्धि मुख्य रूप से रेल, सड़क, राजमार्ग और संचार क्षेत्रों में हुई है। पिछले तीन वर्षों से सरकार के बजट में capex का हिस्सा 20 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है। हालांकि, 2024 के आम चुनावों के कारण केंद्र और राज्य सरकारों का खर्च कुछ समय के लिए धीमा हो गया था। उम्मीद थी कि बड़ी निजी कंपनियां इस कमी को पूरा करेंगी, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया औसत से कम रही। फिर भी कुछ क्षेत्रों में निवेश के संकेत मिल रहे हैं। Data centres और renewables में नया निवेश आकर्षित हो रहा है, जबकि सीमेंट और खनन में 2028-30 तक विस्तार की योजनाएं बनाई जा रही हैं
हालांकि, oil & gas क्षेत्र में capex लगभग स्थिर बना हुआ है, जबकि utilisation रेट 100 प्रतिशत से ऊपर है। CareEdge Ratings के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच private investment निकट भविष्य में सीमित रह सकता है। लेकिन Public capex मजबूती से बना हुआ है, और पिछले दो तिमाहियों में Rs 2 लाख करोड़ से अधिक का पूरा निवेश हुआ है। निजी क्षेत्र में हाल ही में बिजली और निर्माण क्षेत्रों में निवेश की नई योजनाएं सामने आई हैं। Metals, Chemicals और Machinery क्षेत्रों में निवेश की घोषणाएं बढ़ रही हैं, जो कुल निवेश में क्रमशः 13%, 8% और 6% की हिस्सेदारी रखती हैं। आगे की राह में, सरकार की नीति बदलाव निवेश के माहौल को और अनुकूल बना सकते हैं। वित्तीय घाटे को कम करने का लक्ष्य, जो FY24 में 5.6%, FY25 में 4.8% था, FY26 में लगभग 4.4% तक लाना, सरकारी उधारी को घटाकर पूंजी लागत को कम कर सकता है। यदि RBI benchmark lending rate में और कटौती करता है, तो सस्ती क्रेडिट से कंपनियों में निवेश बढ़ने की संभावना है। मुद्रास्फीति में कमी, बढ़ती उपभोग की क्षमता और अनुकूल मानसून के साथ, ये सभी कारक मिलकर Private capex को पुनः गति देने में सहायक हो सकते हैं। भारत की अर्थव्यवस्था के लिए यह जरूरी है कि Public और Private दोनों ही क्षेत्र मिलकर निवेश बढ़ाएं ताकि विकास की रफ्तार बनी रहे
इस समय निवेश के माहौल में सुधार की उम्मीदें बनी हुई हैं, लेकिन इसके लिए Private sector की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। तभी भारत की आर्थिक गाड़ी तेज गति से चल पाएगी और नई ऊंचाइयां छू पाएगी