Nifty 50 में गिरावट का सिलसिला जारी, 100-day EMA के नीचे फिसला इंडेक्स – क्या आने वाले दिनों में आएगा रिवर्सल?

Saurabh
By Saurabh

Nifty 50 में बिकवाली का दबाव दूसरे दिन भी बरकरार रहा, जिससे यह लगातार दूसरे सत्र में गिरावट के साथ 100-day EMA (24,630) के नीचे आ गया। 28 अगस्त को समाप्त हुए मासिक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के एक्सपायरी के दौरान लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाजार की मंदी का माहौल जारी है और तकनीकी संकेत भी कमजोर होते दिख रहे हैं। मुमकिन है कि यदि यह सुधार और गहरा हुआ तो 24,400 (जो ऊपर की ओर बढ़ती ट्रेडलाइन सपोर्ट है) और 24,340 (अगस्त का निचला स्तर) महत्वपूर्ण समर्थन स्तर बन सकते हैं। तकनीकी विश्लेषण में देखा गया है कि Nifty 50 ने एक और लंबी bearish candle बनाई है, जिसमें lower highs और lower lows की संरचना स्पष्ट है, साथ ही ट्रेडिंग वॉल्यूम भी औसत से अधिक रहा। इसके साथ ही इंडेक्स 20-, 50- और 100-day EMAs के नीचे ट्रेड कर रहा है। RSI 40.79 पर आकर bearish crossover का संकेत दे रहा है, जो कमजोर होते मूवमेंट की ओर संकेत करता है। MACD भी नकारात्मक क्रॉसओवर के करीब है और इसके हिस्टोग्राम में सकारात्मक मोमेंटम धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। ये सभी संकेत एक मजबूत bearish setup की तरफ इशारा करते हैं और यदि कोई तेज रिवर्सल नहीं आया तो गिरावट बढ़ने की संभावना बनी हुई है। Bank Nifty की बात करें तो यह benchmark Nifty 50 की तुलना में और भी कमजोर दिख रहा है

Bank Nifty में 1.16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और इसने भी लंबी bearish candle बनाई। यह इंडेक्स Bollinger Bands के निचले स्तर से नीचे ट्रेड कर रहा है। Bank Nifty अपने 200-day EMA से लगभग 250 अंक दूर है और 50% Fibonacci retracement स्तर से लगभग 400 अंक नीचे है। इसके साथ 10-, 20- और 50-day EMAs भी नीचे की ओर ट्रेंड कर रहे हैं। RSI 28.58 तक गिर गया है, जो oversold ज़ोन में प्रवेश दर्शाता है। MACD ने भी bearish crossover दिया है और हिस्टोग्राम कमजोर होता जा रहा है। इसका मतलब है कि Bank Nifty में भी बिकवाली का दबाव बना हुआ है और गिरावट जारी रहने की संभावना है। ऑप्शन्स मार्केट की स्थिति भी इस bearish भावना को और पुष्ट करती है। Nifty के 25,000 स्ट्राइक प्राइस पर सबसे अधिक Call open interest (96.04 लाख कॉन्ट्रैक्ट) है, जो फिलहाल एक मजबूत resistance के रूप में काम कर सकता है। इसके बाद 24,800 और 25,100 स्ट्राइक प्राइस पर भी Call open interest उच्च है

वहीं Put side पर 24,000 स्ट्राइक प्राइस पर सबसे अधिक Put open interest (59.03 लाख कॉन्ट्रैक्ट) दर्ज है, जो एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल हो सकता है। Put writing भी इसी 24,000 स्ट्राइक पर अधिक हुई है, जो बताता है कि निवेशक इस स्तर को मजबूत सपोर्ट मान रहे हैं। Bank Nifty के ऑप्शन्स में भी 55,000 स्ट्राइक पर अधिकतम Call open interest (7.88 लाख कॉन्ट्रैक्ट) है, जो resistance के तौर पर काम कर सकता है। Put open interest में 54,000 स्ट्राइक पर सबसे अधिक (9.77 लाख कॉन्ट्रैक्ट) है, जो सपोर्ट के रूप में महत्वपूर्ण है। Put-Call Ratio (PCR) में भी बदलाव देखने को मिला है। 28 अगस्त को Nifty का PCR 0.86 तक बढ़ गया, जो पिछले सत्र के 0.72 से अधिक है। सामान्यतः PCR का बढ़ना यह दर्शाता है कि Put की बिक्री अधिक हो रही है, जो बाजार में एक तरह की bullish भावना को दर्शा सकता है। हालांकि, अभी भी बाजार की तकनीकी स्थिति कमजोर है और यदि PCR फिर से नीचे गिरता है तो यह bearish संकेत होगा। India VIX, जो बाजार की अनिश्चितता और वोलैटिलिटी को मापता है, में थोड़ी गिरावट आई है और यह 12.18 के स्तर पर बना हुआ है। यह लेवल अभी भी उसके शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर है, जिससे वोलैटिलिटी की उम्मीद बनी हुई है

खास बात यह है कि बाजार में 187 स्टॉक्स में long unwinding देखा गया, यानी इनका open interest गिरा और कीमतें भी नीचे आईं, जो बिकवाली की पुष्टि करता है। वहीं, केवल 1 स्टॉक में long build-up देखा गया, जबकि short build-up के रूप में 4 स्टॉक्स में open interest बढ़ा। 20 स्टॉक्स में short-covering हुई, जिनमें open interest कम हुआ और कीमतें बढ़ीं। डेरिवेटिव सेक्टर में कोई नया स्टॉक F&O बैन में नहीं आया है, जबकि RBL Bank को F&O बैन से हटाया गया है। तकनीकी विश्लेषण और ऑप्शन्स डेटा दोनों संकेत दे रहे हैं कि फिलहाल बाजार में मंदी का दबाव अधिक है और Nifty 50 और Bank Nifty दोनों ही कमजोर स्थिति में हैं। हालांकि, यदि Nifty 50 24,700 के आसपास rebound करता है, तो यह 100-day EMA और Bollinger Bands की midline के कारण एक मजबूत resistance साबित हो सकता है। निवेशकों और ट्रेडर्स को अगले कुछ दिनों में 24,340 से 24,400 के स्तरों पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि ये सपोर्ट स्तर बाजार के मूड को तय कर सकते हैं। इस समय बाजार में तेजी से कोई बड़ा रिवर्सल नहीं दिख रहा है, इसलिए सावधानी बरतना महत्वपूर्ण होगा। बाजार की स्थिति को देखते हुए short-term में bearish ट्रेंड जारी रहने की संभावना अधिक है, जब तक कि कोई स्पष्ट और मजबूत सकारात्मक संकेत न आए

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