SEBI के नए नियम: Expiry-Day Trading पर पड़ेगा बड़ा असर, क्या खत्म होगी बड़ी कंपनियों की मनमानी?

Saurabh
By Saurabh

Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने हाल ही में index options के position limits में बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है, जो शेयर बाजार में expiry-day trading को पूरी तरह से बदल सकता है। इस प्रस्ताव के तहत expiry days पर position limits के उल्लंघन पर penalties लगाई जाएंगी, जिससे expiry-day पर ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट आने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से expiry-day की तेज और केंद्रित ट्रेडिंग पर लगाम लगेगी, जिससे बाजार में अधिक अनुशासन और पारदर्शिता आएगी। वर्तमान में index options के intraday monitoring threshold की सीमा Rs 1,500 करोड़ है, जिसे SEBI ने बढ़ाकर Rs 5,000 करोड़ करने का प्रस्ताव दिया है। वहीं, कुल gross ceiling Rs 10,000 करोड़ पर बनी रहेगी। हालांकि, सबसे अहम बात यह है कि expiry days पर नियमों के उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। इसका मतलब यह है कि prop traders और बड़े institutional players अब expiry-day पर बड़े और जोखिम भरे दांव लगाने से बचेंगे, क्योंकि दंड के कारण नुकसान का खतरा बढ़ जाएगा। LKP Securities के Senior Technical Analyst Rupak De ने बताया कि यह कदम expiry-days पर ट्रेडिंग वॉल्यूम को कम करेगा। उन्होंने कहा, “expiry window पर यह क्लैंपडाउन सीधे निशाना साधता है और उल्लंघन पर penalties के कारण expiry-day के वॉल्यूम में कमी आएगी। ” उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि यह असर मुख्य रूप से top 1% क्लाइंट्स पर पड़ेगा, लेकिन ये ही वे खिलाड़ी हैं जो एक्सचेंज के बड़े हिस्से का टर्नओवर देते हैं

इस वजह से expiry-day पर ट्रेडिंग वॉल्यूम में लगभग 15 से 20 फीसदी की गिरावट आ सकती है। विश्लेषकों के अनुसार, बड़े proprietary trading firms अब expiry-day पर अपने exposure को लेकर ज्यादा सतर्क होंगे। इसके अलावा, arbitrageurs और market makers के वॉल्यूम में भी थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे short-term में बाजार की liquidity पर असर पड़ सकता है। हालांकि non-expiry days पर Rs 5,000 करोड़ की बड़ी intraday limit से HFT (High Frequency Trading) और portfolio traders को ज्यादा ट्रेडिंग के अवसर मिलेंगे, जिससे इस दौरान बाजार में बेहतर भागीदारी देखी जा सकती है। Rupak De का कहना है कि expiry-day की “थिएट्रिकल” मूवमेंट्स कम हो जाएंगी। उन्होंने कहा, “expiry पर अक्सर sharp swings देखे जाते हैं, जहां लोग long straddle लेकर lottery-type मूव की उम्मीद करते हैं। अब ये सब नियंत्रित होंगे, volatility कम होगी और market manipulation में कमी आएगी। ” इस बदलाव से बाजार में बेहतर क़ानूनी और तकनीकी अनुशासन आएगा, जो लंबे समय में निवेशकों के लिए फायदेमंद साबित होगा। Samco Securities के Executive Director एवं President Nilesh Sharma ने कहा कि SEBI का यह कदम manipulative activities को रोकने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। उन्होंने बताया, “कुछ बड़े खिलाड़ी अपनी पूंजी और बड़े दांवों के चलते बाजार को प्रभावित कर लेते हैं, लेकिन इन position limits और penalties के कारण अब कोई भी खिलाड़ी अकेले बाजार को इतनी बड़ी हानि नहीं पहुंचा सकेगा

यह कदम बाजार को अधिक लोकतांत्रिक और नियंत्रित बनाएगा। ” न केवल penalties, बल्कि SEBI ने exposure के गणना के तरीके में भी बदलाव किया है। पहले कुल position को notional या turnover के आधार पर मापा जाता था, लेकिन अब delta exposure के आधार पर मापा जाएगा, जो in-the-money options को ज्यादा महत्व देता है। इससे trading में अधिक सटीकता आएगी और बाजार में वास्तविक जोखिम को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। Nilesh Sharma ने बताया, “SEBI चाहता है कि volumes और participation बढ़ें, लेकिन ऐसी व्यवस्था हो जो market manipulation को रोक सके। ” हालांकि इस नए प्रस्ताव से brokers और exchanges पर compliance लागत बढ़ने की संभावना है, जो अंततः ग्राहकों पर भी असर डाल सकती है। बाजार में विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव शुरुआती समय में वॉल्यूम में अस्थिरता ला सकता है, लेकिन लंबे समय में यह बाजार की स्थिरता और पारदर्शिता के लिए लाभकारी होगा। इस प्रकार SEBI का यह प्रस्ताव expiry-day की ट्रेडिंग गतिविधियों को नियंत्रित करने के साथ-साथ बाजार में बेहतर अनुशासन और ईमानदारी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बड़े traders अब ज्यादा सतर्क होंगे और बाजार की liquidity का वितरण expiry-days से अन्य दिनों में बेहतर होगा। इससे न केवल निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि भारत के वित्तीय बाजार और अधिक मजबूत और सुव्यवस्थित होंगे

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