मई से जून 2025 के बीच Indian mutual funds ने अपने पोर्टफोलियो में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे बाजार में निवेश की दिशा में एक नई लहर देखने को मिली है। Motilal Oswal Financial Services के Fund Folio के अनुसार, म्यूचुअल फंड्स ने NBFCs, Retail, Consumer Durables, Healthcare, और Telecom सेक्टरों में अपने निवेश को बढ़ाया है, जबकि Private Banks, Automobiles, Technology, Oil & Gas, और Consumer सेक्टरों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है। इस बदलाव से पता चलता है कि फंड मैनेजर्स ने जोखिम और अवसरों को ध्यान में रखते हुए अपने निवेश को पुनः संतुलित किया है। जून 2025 में Equity assets under management (AUM) में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो Rs 36.6 ट्रिलियन तक पहुंच गई है। इस वृद्धि के पीछे Nifty में 3.1 प्रतिशत का उछाल और नेट इक्विटी इनफ्लो में मजबूती का हाथ है, जो मई के Rs 201 बिलियन से बढ़कर Rs 246 बिलियन हो गया। साथ ही, SIP inflows ने भी नया रिकॉर्ड बनाया है, जो रिटेल निवेशकों की मजबूत भागीदारी को दर्शाता है। Private Banks, जो म्यूचुअल फंड सेक्टर का सबसे बड़ा हिस्सा हैं, जून में अपना वजन 17.9 प्रतिशत पर लाए, जो मई के 18.4 प्रतिशत से कम है। यह लगातार दूसरा महीना है जब Private Banks में निवेश घटा है। अप्रैल में इस सेक्टर का वजन 18.9 प्रतिशत था। हालांकि अभी भी यह सेक्टर निवेश में सबसे बड़ा है, लेकिन अब यह BSE 200 इंडेक्स में अपनी 20.8 प्रतिशत की हिस्सेदारी से काफी नीचे आ गया है, जिससे यह सबसे अधिक अंडरवेट सेक्टर बन गया है
इसी तरह Technology सेक्टर में भी दबाव बना रहा, जिसका अलोकेशन जून में 8.1 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो पिछले महीने के 8.3 प्रतिशत से कम है और BSE 200 के 9.3 प्रतिशत से काफी नीचे है। वहीं, Consumption-linked सेक्टरों में म्यूचुअल फंड्स की दिलचस्पी बढ़ी है। NBFCs का अलोकेशन 5.3 प्रतिशत से बढ़कर 5.6 प्रतिशत हो गया, Retail सेक्टर ने इतिहास में पहली बार 2.9 प्रतिशत का उच्च स्तर छुआ, जो मई के 2.6 प्रतिशत से अधिक है। Consumer Durables में भी निवेश 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 2.5 प्रतिशत हो गया। Healthcare सेक्टर का वजन लगभग 7.4 प्रतिशत रहा, जबकि Telecom सेक्टर ने 59 महीनों में सबसे ऊंचा स्तर 3.5 प्रतिशत छुआ। म्यूचुअल फंड्स ने Nifty 50 के 48 प्रतिशत स्टॉक्स में नेट खरीदारी की, जबकि Nifty Midcap 100 के 56 प्रतिशत और Nifty Smallcap 100 के 65 प्रतिशत स्टॉक्स में भी खरीदारी हुई। Nifty 50 में Bharti Airtel, Asian Paints, Reliance Industries, और HDFC Bank के शेयरों में फंड होल्डिंग बढ़ी, जबकि Infosys और HCLTech में बिकवाली हुई। Midcap 100 में Vishal Mega Mart, REC, Jindal Stainless, और APL Apollo में निवेश बढ़ा, जबकि Trent और Persistent Systems से निकासी हुई। Nifty Smallcap 100 में Linde India, Balrampur Chini, Lux Industries, KSB, और Bank of Maharashtra में खरीदारी हुई, लेकिन Nazara Technologies, Dalmia Bharat Sugar, और Tejas Networks में निवेश घटा। सैक्टर्स के स्तर पर Healthcare (16 funds overweight), Consumer Durables (12 funds), Chemicals (11 funds), Capital Goods (9 funds), और Retail (8 funds) को म्यूचुअल फंड्स ने अपनी पोर्टफोलियो में अधिक स्थान दिया है
इसके विपरीत, Consumer (18 funds underweight), Oil & Gas (17 funds), Private Banks (16 funds), Technology (13 funds), और Utilities (11 funds) सेक्टर्स में कम निवेश किया गया है। यह बदलाव फंड मैनेजर्स की सतर्कता और बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपने निवेश पोर्टफोलियो को बेहतर संतुलित करने की रणनीति को दर्शाता है। Private Banks और Technology सेक्टर से निकासी के बावजूद, बाजार में कुल निवेश में तेजी आई है, जो आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। निवेशकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि म्यूचुअल फंड्स की ये चालें बाजार की दिशा और संभावित रिटर्न्स को प्रभावित कर सकती हैं