म्युचुअल फंड इंडस्ट्री के शीर्ष विशेषज्ञों ने Moneycontrol के Mutual Fund Summit 2025 में एक महत्वपूर्ण चर्चा की, जिसमें उन्होंने हाल के बाजार के रुख और निवेश के रुझानों पर गहराई से विचार किया। पिछले दो सालों की तेज रैली के बाद जब बाजार में कुछ कंसेलिडेशन देखने को मिला है, तो फंड मैनेजर्स ने मिड और स्मॉल कैप्स के फ्रोथी सेगमेंट को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी है। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत की स्ट्रक्चरल ग्रोथ की कहानी अभी भी मजबूत है, लेकिन वैल्यूएशंस की स्थिति में अधिक अनुशासन की जरूरत है। अगला अल्फा संभवतः लार्ज कैप्स से आ सकता है। ICICI Prudential AMC के Co-CIO (Equity) Anish Tawakley ने कहा कि हाल की कंसेलिडेशन वाजिब है, क्योंकि पिछले दो सालों में बाजार ने मजबूत अर्निंग्स और रेटिंग्स देखी हैं। उन्होंने बताया, “अर्थव्यवस्था की गति थोड़ी धीमी हुई है, लेकिन यह कोई स्ट्रक्चरल समस्या नहीं है। उम्मीदें बहुत अधिक बढ़ गई थीं। अब मैं लार्ज कैप्स को प्राथमिकता दूंगा क्योंकि मिड और स्मॉल कैप्स में बहुत अधिक फ्रोथ है। कई कंपनियां जिनका बिजनेस मॉडल कमजोर है, उन्हें छुपे हुए रत्न की तरह आंका जा रहा है। इसलिए इस वक्त निवेश को उन लार्ज कैप्स की तरफ मोड़ना चाहिए जिनकी विजिबिलिटी और बैलेंस शीट मजबूत है
” Kotak Mahindra AMC के CIO Harsha Upadhyaya भी इस विचार के साथ सहमत हुए। उन्होंने कहा कि लार्ज कैप्स आज बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल प्रदान करते हैं। “लार्ज कैप्स स्थिरता और अपेक्षाकृत सही वैल्यू देते हैं। ये सस्ते नहीं हैं, लेकिन महंगे भी नहीं। मिड और स्मॉल कैप्स के मुकाबले लार्ज कैप्स ने पिछली परफॉर्मेंस में कमजोरी दिखाई है, लेकिन अब ये कैप्स कैच-अप ट्रेड के लिए तैयार हैं। सुरक्षा और लिक्विडिटी की वजह से ये इस मार्केट साइकिल में निवेश के लिए स्वाभाविक विकल्प हैं। ” वहीं Capitalmind AMC के CEO Deepak Shenoy ने बाजार की साइज आधारित कैटेगरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पूरी तरह से सही नहीं है। “जब SEBI ने सात साल पहले स्मॉल कैप्स को परिभाषित किया था, तब सबसे बड़ा स्मॉल कैप लगभग Rs 7,000 करोड़ का था। आज वही स्मॉल कैप Rs 36,000 करोड़ से ऊपर पहुंच चुका है। इसका मतलब है कि आप पाँच गुना बढ़ भी जाएं तो भी स्मॉल कैप ही रहेंगे
” उन्होंने जोर देकर कहा कि अल्फा हर मार्केट सेगमेंट में मिल सकता है, यह निर्भर करता है कि निवेशक कहां देख रहे हैं। “बड़े कैप्स भी मजबूत रिटर्न दे सकते हैं। अमेरिका के बाजार में ‘Magnificent Seven’ यानी सबसे बड़ी कंपनियां मार्केट गेन में बढ़त बना रही हैं। भारत में भी ऐसा ट्रेंड देखने को मिल सकता है। ” Deepak Shenoy ने निवेशकों को संतुलन बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “कुछ मिड और स्मॉल कैप्स अच्छा प्रदर्शन करेंगी, लेकिन सभी नहीं। निवेशक को प्रदर्शन के पीछे भागना नहीं चाहिए, बल्कि स्थायी और मजबूत बिजनेस मॉडल वाली कंपनियों को पहचान कर धैर्य के साथ पकड़ना चाहिए। ” इस चर्चा ने यह स्पष्ट किया कि वर्तमान दौर में निवेशकों के लिए फोकस केवल कंपनी के आकार पर नहीं बल्कि उसके बिजनेस मॉडल, वित्तीय मजबूती और दीर्घकालीन संभावनाओं पर होना चाहिए। बाजार में तेजी के बाद आई कंसेलिडेशन को एक नेचुरल करेक्शन के रूप में देखा जा रहा है, और इसके चलते मिड और स्मॉल कैप्स में अत्यधिक उत्साह को संयमित करना जरूरी है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, लार्ज कैप्स में निवेश से न केवल जोखिम कम होगा बल्कि स्थिरता और बेहतर वैल्यूएशन भी मिलेगी
वहीं, मिड और स्मॉल कैप्स में सावधानीपूर्वक चयन जरूरी है क्योंकि इनमें कई कंपनियां फंडामेंटल्स के बिना भी ऊंची वैल्यूएशंस पर कारोबार कर रही हैं, जो भविष्य में जोखिम भरा साबित हो सकता है। इस समिट में व्यक्त किए गए विचार यह संकेत देते हैं कि भारत के इक्विटी बाजार का स्ट्रक्चरल ग्रोथ ट्रेंड अभी भी मजबूत है, लेकिन निवेश रणनीतियों को बदलते आर्थिक और बाजार के माहौल के अनुसार एडजस्ट करना होगा। निवेशकों को चाहिए कि वे बाजार के फ्रोथी सेगमेंट से बचें और उन कंपनियों पर ध्यान दें जिनकी वित्तीय स्थिति मजबूत और बिजनेस मॉडल टिकाऊ है। अंततः इस फंड समिट ने यह स्पष्ट किया कि आने वाले समय में अल्फा की तलाश बड़े कैप्स से होगी, जबकि मिड और स्मॉल कैप्स में निवेशकों को ज्यादा सतर्कता और विवेक के साथ कदम बढ़ाना होगा। बाजार की यह नई दिशा निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है, जो उनके पोर्टफोलियो की संरचना में बदलाव ला सकती है