SEBI ने हाल ही में equity derivatives की tenure बढ़ाने पर विचार करना शुरू कर दिया है, जिससे बाजार में हड़कंप मच गया है। SEBI के Chairman Tuhin Kanta Pandey ने FICCI के 22वें Annual Capital Markets Conference में इस प्रस्ताव का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि इस योजना को अभी सिर्फ “thought process” के तौर पर देखा जा रहा है और इसे लागू करने से पहले व्यापक consultative approach अपनाई जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जल्द ही consultation paper जारी किया जाएगा, लेकिन अभी कोई निश्चित टाइमलाइन तय नहीं हुई है। Pandey ने बताया कि SEBI का उद्देश्य Futures and Options (F&O) मार्केट में संतुलन बनाना है, क्योंकि इस सेक्टर में रिटेल निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। उन्होंने equity derivatives को capital formation में अहम भूमिका निभाने वाला बताया, लेकिन साथ ही गुणवत्ता और स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि “हम stakeholders के साथ मिलकर derivative products की tenor और maturity profile को बेहतर बनाने के तरीके पर विचार करेंगे ताकि ये hedging और long-term investing के लिए अधिक उपयुक्त हो सकें। ” हालांकि इस प्रस्ताव ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। पिछले कुछ वर्षों में SEBI ने F&O बाजार में speculative गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए कई नियम लागू किए हैं, जैसे केवल एक weekly contract की अनुमति देना और contract expiry days को standardize करना। अब derivative tenure बढ़ाने की खबर से एक्सचेंज और brokerage कंपनियों के शेयरों में भारी दबाव आया है
खासकर BSE और Angel One के शेयर लगभग 5% तक गिर गए। Angel One का शेयर intraday में ₹2,583.9 तक गिरा, हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला। Angel One की July business update बताती है कि कंपनी ने F&O market share में बढ़ोतरी की है, जो जून के 20.8% से बढ़कर 21.2% हो गया है। इसी तरह, उनकी equity market share भी 19.6% से बढ़कर 20.1% हो गई है। इसके बावजूद, Angel One के शेयर पिछले 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर से लगभग 27% नीचे आ चुके हैं। कंपनी के MD और CEO Dinesh Thakkar ने CNBC-TV18 को बताया था कि Angel One की लगभग 45% revenue F&O broking से आती है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई थी कि जून तिमाही में 34% रही मार्जिन मार्च तिमाही तक लगभग 40% तक पहुंच जाएगी। हालांकि, SEBI के इस नए संकेत ने उन ब्रोकर्स के लिए अनिश्चितता बढ़ा दी है जो derivatives ट्रेडिंग पर भारी निर्भर हैं। Pandey ने कहा कि SEBI का व्यापक लक्ष्य भारत के cash equity markets को गहरा और मजबूत बनाना है, जहां पिछले तीन वर्षों में daily trading volumes दोगुने हो गए हैं। फिर भी उन्होंने यह स्वीकार किया कि बाजार की गुणवत्ता सुधारने और रिटेल निवेशकों को जोखिम भरे ट्रेडिंग प्रथाओं से बचाने के लिए अभी और काम करने की जरूरत है
इस पूरी स्थिति ने capital markets में एक नई बहस छेड़ दी है। SEBI की तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि कोई भी बदलाव धीरे-धीरे और विचार-विमर्श के बाद ही होगा, लेकिन बाजार की तत्काल प्रतिक्रिया ने दिखाया है कि निवेशक F&O सेक्टर में संभावित बदलावों के प्रति कितना संवेदनशील हैं। यह बदलाव न केवल derivatives के ट्रेडिंग वॉल्यूम को प्रभावित कर सकता है, बल्कि ब्रोकरेज फर्मों की कमाई पर भी असर डाल सकता है। इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि SEBI की यह योजना किस दिशा में जाती है और बाजार पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है। फिलहाल, Angel One और BSE जैसे प्रमुख खिलाड़ी इस खबर के बाद निवेशकों की नजरों में दबाव में आ गए हैं। निवेशक और बाजार दोनों ही SEBI के अगले कदमों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं