मंगलवार, 5 अगस्त को capital market से जुड़े कई प्रमुख शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। BSE, Angel One, CDSL, Motilal Oswal और Anand Rathi के शेयर 1.5% से लेकर 4.5% तक टूट गए। इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण Securities and Exchange Board of India (SEBI) की ओर से जल्द ही weekly derivatives expiry पर नए प्रतिबंध लगाने की खबरें हैं। SEBI का यह कदम options segment में हो रही अत्यधिक speculative trading को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। हाल ही में Ministry of Finance ने SEBI के अधिकारियों के साथ चर्चा की, जिसमें यह चिंता जताई गई कि वर्तमान weekly expiry प्रणाली बाजार में अनावश्यक अटकलें बढ़ा रही है और इसका वास्तविक अर्थव्यवस्था पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ रहा। इस बात का खुलासा Zee Business ने किया। इसके जवाब में SEBI संभावित नियमों पर विचार कर रहा है, जिनका मकसद derivatives बाजार में speculative व्यवहार को कम करना है। सूत्रों के अनुसार, SEBI के विचाराधीन प्रमुख प्रस्तावों में weekly expiry को खत्म करके इसे bi-monthly या monthly expiry में बदलना शामिल है। इसके अलावा, options ट्रेडिंग के लिए margin requirements बढ़ाने पर भी विचार हो रहा है, जबकि cash market के लिए margin requirements को कम करने की योजना है। यह कदम निवेशकों को equity में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने और जोखिम भरे derivative कारोबार को सीमित करने के उद्देश्य से लिया जा रहा है
एक और प्रस्ताव के तहत Securities Transaction Tax (STT) में बदलाव की संभावना भी है। SEBI options ट्रेडिंग पर STT बढ़ाने के लिए सोच रहा है ताकि speculative गतिविधि महंगी हो जाए, जबकि cash market पर STT को घटाकर लंबी अवधि के निवेश को बढ़ावा दिया जा सके। हालांकि STT में बदलाव के लिए Union Budget में संशोधन आवश्यक होगा, इसलिए इसे तुरंत लागू नहीं किया जा सकता। ये सभी प्रस्ताव अभी प्रारंभिक चरण में हैं और SEBI जल्द ही एक discussion paper जारी कर stake holders से प्रतिक्रिया मांगेगा। बाजार के विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि ये कड़े नियम लागू होते हैं तो capital market intermediaries की कमाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। option trading की मात्रा और expiry-day की volatility दोनों ही बाजार के turnover के महत्वपूर्ण घटक हैं, और इन पर प्रतिबंध लगने से brokerage और clearing सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों की आय में कमी आ सकती है। यह पहला मौका नहीं है जब SEBI ने F&O (Futures and Options) सेक्टर पर नियंत्रण कड़ा किया हो। पिछले साल भी SEBI ने retail निवेशकों की सुरक्षा के लिए upfront margins बढ़ाए और weekly expiries की संख्या सीमित की थी। बावजूद इसके, F&O सेक्टर में retail investors को भारी नुकसान हुआ है। SEBI की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में retail investors ने F&O क्षेत्र में कुल ₹1.10 लाख करोड़ का नुकसान झेला, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 41% ज्यादा है
इस बढ़ते नुकसान ने SEBI को छोटे निवेशकों के जोखिम को कम करने पर खास ध्यान देने के लिए मजबूर कर दिया है, खासकर उन निवेशकों के लिए जो जटिल financial instruments में बिना पर्याप्त ज्ञान या पूंजी के ट्रेड कर रहे हैं। इस पूरे परिदृश्य के बीच, capital market के प्रमुख players और निवेशक SEBI के प्रस्तावित नियमों के संभावित प्रभाव की निगरानी कर रहे हैं। यदि ये नियम लागू हुए तो derivatives segment की trading activity में निश्चित तौर पर कमी आएगी, जिससे market volatility और liquidity दोनों प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, cash market को प्रोत्साहित करने के लिए margin और STT में जो बदलाव हो सकते हैं, वे निवेशकों के लिए बेहतर अवसर भी पैदा कर सकते हैं। इस स्थिति में यह देखना रोचक होगा कि SEBI का अगला कदम क्या होगा और भारतीय capital market पर इसका किस प्रकार का प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल, बाजार की दिशा और निवेशकों की प्रतिक्रिया इस बात के संकेत देंगे कि क्या speculative trading पर लगाम लगाना बाजार के दीर्घकालिक हित में होगा या नहीं