सरकार ने FY26 के अपने disinvestment रोडमैप में एक बड़ा कदम उठाते हुए Life Insurance Corporation of India (LIC) में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए Offer for Sale (OFS) को मंजूरी दे दी है। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC में सरकार के पास फिलहाल 96.5% की हिस्सेदारी है, जबकि जनता के पास मात्र 3.5% है। इस कदम का मकसद रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना, नियमों का पालन करना और खजाने के लिए बड़ी रकम जुटाना बताया जा रहा है। LIC की मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹6 लाख करोड़ के आसपास है, जिसका मतलब है कि केवल 1% हिस्सेदारी बेचने से लगभग ₹6,000 करोड़ की राशि प्राप्त हो सकती है। यह OFS FY26 का एक प्रमुख डिसइन्वेस्टमेंट सौदा बनने की संभावना रखता है, जो कई चरणों में हजारों करोड़ रुपये जुटा सकता है। सरकार के इस फैसले से न सिर्फ राजस्व बढ़ेगा, बल्कि यह SEBI के minimum public shareholding (MPS) नियमों के अनुरूप LIC को भी ढालने में मदद करेगा। SEBI ने मई 2023 में LIC को कम से कम 10% पब्लिक होल्डिंग बनाए रखने का निर्देश दिया था, जो 2027 तक पूरा करना होगा। यह सरकार की उस योजना से मेल खाता है जिसमें LIC में अपनी 96.5% हिस्सेदारी को धीरे-धीरे कम करने की बात कही गई थी। 2022 में हुए LIC IPO के दौरान सरकार ने मात्र 3.5% हिस्सेदारी बेचकर ₹21,000 करोड़ जुटाए थे। अब इस OFS के जरिए सरकार अपनी बची हुई हिस्सेदारी को भी बाजार में उतारने की योजना बना रही है
सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार अगले दो वर्षों में LIC की हिस्सेदारी को चरणबद्ध तरीके से बेच सकती है। वर्तमान बाजार मूल्य के हिसाब से, SEBI के 75% की सीमा से ऊपर की बची हिस्सेदारी की कीमत लगभग ₹1.28 लाख करोड़ आंकी गई है। हालांकि, अभी भी LIC की फ्री फ्लोट बहुत कम है, जिसमें म्यूचुअल फंड्स के पास केवल 1.13% और करीब 23 लाख रिटेल शेयरहोल्डर्स के पास 1.67% हिस्सेदारी है। इस खबर के सामने आने के बाद LIC के शेयरों में गिरावट देखी गई। 10 जुलाई को NSE पर LIC के शेयर 1.23% की गिरावट के साथ ₹934.35 पर बंद हुए। यह शेयर अपने IPO प्राइस ₹949 के करीब ही ट्रेड कर रहे हैं और 2025 में अब तक करीब 5.5% की मामूली बढ़त दर्ज की है। हालांकि, यह शेयर 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर ₹1,222 से नीचे आए हुए हैं। LIC के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो, Q4 FY25 में कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस अवधि में LIC का नेट प्रॉफिट 38% की वृद्धि के साथ ₹19,013 करोड़ रहा, जबकि कुल आय ₹2.41 लाख करोड़ रही जो पिछले साल के ₹2.50 लाख करोड़ से थोड़ी कम है। कंपनी के बोर्ड ने ₹12 प्रति शेयर का अंतिम लाभांश देने का प्रस्ताव भी रखा है, जिससे निवेशकों को अतिरिक्त रिटर्न मिल सकेगा
सरकार द्वारा LIC की हिस्सेदारी बेचना वित्तीय और बाजार दोनों ही दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल बाजार में निवेशकों की रुचि बढ़ेगी, बल्कि LIC को भी पब्लिक शेयरिंग नियमों के अनुरूप लाने में मदद मिलेगी। Dalal Street पर LIC का अगला OFS निश्चित रूप से एक बड़ा इवेंट बनने जा रहा है, जिससे निवेशकों की नजरें पूरी तरह LIC पर टिकी रहेंगी। यह डिसइन्वेस्टमेंट कदम भारत की disinvestment यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ने वाला है, जो सरकार को महत्वपूर्ण राजस्व उपलब्ध कराएगा और बाजार में LIC के शेयरों की ट्रेडिंग को और अधिक प्रभावशाली बनाएगा। आने वाले हफ्तों में इस बारे में और अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है, जो निवेशकों के लिए नए अवसर लेकर आएगी