प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर Red Fort से GST दरों के तर्कसंगत पुनर्गठन की घोषणा ने बाजार और अर्थव्यवस्था में नई उम्मीदें जगाई हैं। Diwali तक GST की दरों में संशोधन होने की संभावना से Cement, White Goods, Automobile और Consumer Goods सेक्टर्स को बड़ा फायदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस कदम को कई बड़े निवेश बैंक और एनालिस्ट्स ने सकारात्मक माना है, जो न केवल उपभोक्ता मांग बढ़ाएगा बल्कि आर्थिक वृद्धि को भी नई गति देगा। Goldman Sachs ने अपने क्लाइंट नोट में कहा है कि जो Consumer Products फिलहाल 12% GST स्लैब में आते हैं, वे इस बदलाव से सबसे ज्यादा लाभान्वित हो सकते हैं। इस कदम से उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में कमी आएगी, जिससे उनकी मांग में वृद्धि होगी। Morgan Stanley ने भी कहा है कि भारतीय स्टॉक मार्केट के लिए इस GST सुधार से नए रिकॉर्ड स्तरों तक पहुंचने के लिए मजबूत ट्रिगर्स बन रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस सुधार का प्रभाव 2026 तक जारी रहेगा और इससे ब्याज दरों में गिरावट भी देखने को मिल सकती है। Kotak Institutional Equities ने अपने नोट में कहा है कि नई GST दरों से देश की अर्थव्यवस्था को लगभग ₹2.4 ट्रिलियन का फायदा हो सकता है, खासतौर पर Automobile और Durable Goods सेक्टर को। CLSA का मानना है कि Cement और Air Conditioners जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल आइटम जिनपर वर्तमान में 28% GST है, उसे 18% तक कम करने की संभावना है। CLSA ने यह भी कहा कि Air Conditioners की बिक्री में आए हाल के कमजोर संकेतों को देखते हुए यह बदलाव मांग को मजबूती देगा
Morgan Stanley ने विश्लेषण किया है कि Automobile सेक्टर भी 28% GST स्लैब में आता है। यदि इसे 18% पर ला दिया जाता है, तो कीमतों में तीव्र गिरावट आएगी, जो वाहन उद्योग के लिए अगला अपसाइकिल शुरू करने में सहायक होगा। UBS ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि यह GST सुधार समय के लिहाज से उपयुक्त है। साथ ही, व्यक्तिगत आयकर में राहत, चालू वित्त वर्ष में 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती, कम महंगाई दर और क्रेडिट की बेहतर उपलब्धता जैसी नीतिगत मदद से अगले 2-3 क्वार्टर में घरेलू उपभोग में मजबूती आएगी। UBS के अनुसार, GST दरों में कटौती से वार्षिक राजस्व हानि लगभग ₹1.1 ट्रिलियन की हो सकती है, लेकिन यह नुकसान FY26 में ₹43,000 करोड़ तक सीमित रहेगा, क्योंकि इसे Cess संग्रह और RBI के अधिक डिविडेंड ट्रांसफर से संतुलित किया जाएगा। UBS ने यह भी बताया कि GST कटौती की बहुपरिणामी प्रभाव आयकर या कॉर्पोरेट टैक्स कटौती से कहीं अधिक होगी, क्योंकि यह सीधे खरीदारी के समय उपभोक्ता खर्च को प्रभावित करती है, जिससे उपभोग बढ़ेगा। इसके अलावा, GST दरों में कमी महंगाई दर को कम करेगी और RBI द्वारा मौद्रिक नीति में और नरमी की संभावना को बढ़ाएगी। UBS ने यह भी कहा है कि मौजूदा आधारभूत मुद्रास्फीति दबाव कम है और RBI की तटस्थ नीति दर 1.4% से 1.9% के बीच है, इसलिए टर्मिनल रेपो रेट 5.0% से 5.25% के दायरे में आ सकती है। कंपनियों की बात करें तो Blue Star, Voltas और Symphony जैसी AC कंपनियों के स्टॉक्स ने बाजार में अच्छी चमक दिखाई है। GST सुधार के बाद ये कंपनियां और मजबूत प्रदर्शन कर सकती हैं, क्योंकि AC जैसे उत्पादों की मांग में गिरावट के बावजूद GST दर कम होने से कीमतों में कमी आएगी, जिससे उपभोक्ता आकर्षित होंगे
यह बदलाव न केवल कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर को प्रभावित करेगा बल्कि Cement और Automobile जैसे मटेरियल सेक्टर में भी नई ऊर्जा लाएगा। GST की इन संभावित दरों की समीक्षा से उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में समायोजन होगा, जो आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही, इनकम टैक्स में राहत और ब्याज दरों में कमी घरेलू खपत को मजबूत बनाएगी, जो भारत की आर्थिक पुनरुद्धार प्रक्रिया को और गति देगी। इस प्रकार, Diwali तक GST की दरों में प्रस्तावित बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है। यह न केवल उपभोक्ता मांग को बढ़ावा देगा, बल्कि स्टॉक मार्केट में भी निवेशकों के विश्वास को मजबूत करेगा। Cement, White Goods, Automobile और Consumer Goods सेक्टर में इस सुधार का प्रभाव लंबी अवधि तक देखने को मिलेगा और यह भारत के आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा