Indiqube Spaces का IPO हुआ फ्लॉप, निवेशकों को पहले दिन ही 8.86% का नुकसान! जानिए क्यों टूटा निवेशकों का भरोसा

Saurabh
By Saurabh

Indiqube Spaces Limited, जो कि managed workplace solutions देने वाली कंपनी है, ने 30 जुलाई 2025 को अपने शेयरों का NSE और BSE पर डेब्यू किया, लेकिन शुरुआत निवेशकों के लिए निराशाजनक रही। कंपनी का IPO 23 से 25 जुलाई 2025 के बीच बंद हुआ था, जिसमें कुल सब्सक्रिप्शन लगभग 13 गुना रहा। इसके बावजूद पहली बार ट्रेडिंग में Indiqube Spaces के शेयरों ने अपना प्राइस ₹237 से नीचे खुला और NSE पर 8.86% की गिरावट के साथ ₹216 पर तथा BSE पर 7.7% गिरावट के साथ ₹218.70 पर ट्रेडिंग शुरू की। इस पहली दिन की गिरावट से यह साफ़ हुआ कि बाजार में कंपनी के बिजनेस मॉडल को लेकर चिंता बनी हुई है। IPO के दौरान Indiqube Spaces ने प्रति शेयर ₹237 की कीमत तय की थी, जिसमें निवेशकों को कम से कम 63 शेयर खरीदने थे, जिसका कुल निवेश ₹14,931 बनता था। IPO में Institutional investors (QIB) ने सबसे ज्यादा रुचि दिखाई और 15.12 गुना सब्सक्रिप्शन दिया, वहीं Retail investors का सब्सक्रिप्शन 13.28 गुना रहा, लेकिन Non-Institutional Investors (NII) की भागीदारी 8.68 गुना तक सीमित रही। ये आंकड़े संकेत देते हैं कि संस्थागत निवेशकों ने कंपनी की संभावनाओं को कुछ हद तक समर्थन दिया, लेकिन व्यापक बाजार में संदेह बना रहा। Indiqube Spaces की ताकतों में बाजार में उसकी मजबूत पोजीशन शामिल है। कंपनी भारत के 15 शहरों में कार्यरत है, जिनमें टियर-1 और नॉन-टियर-1 दोनों तरह के लोकेशन शामिल हैं। कंपनी की सेवाएं IndiQube Grow, Bespoke, One और MiQube टेक्नोलॉजी स्टैक जैसी विविध सुविधाओं के साथ आती हैं, जो end-to-end workplace solutions प्रदान करती हैं

FY25 में कंपनी की रेवेन्यू 27% बढ़कर ₹1,102.93 करोड़ हो गई, जबकि EBITDA मार्जिन 58.20% तक पहुंचा, जो ऑपरेशनल लीवरेज की संभावनाओं को दर्शाता है। इसके अलावा, Indiqube का Enterprise-First स्ट्रैटेजी बड़े क्लाइंट्स पर केंद्रित है, जो लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट के जरिए राजस्व स्थिरता और विकास के अवसर प्रदान करती है। हालांकि, कंपनी के सामने कई गंभीर चुनौतियां भी हैं। FY25 में ₹139.62 करोड़ का नेट लॉस हुआ है, जो FY24 के ₹341.51 करोड़ के नुकसान से तो कम है, लेकिन लगातार नुकसान कंपनी की वित्तीय स्थिरता पर सवाल उठाता है। कंपनी का नेट वर्थ भी ₹3.11 करोड़ के नकारात्मक स्तर पर है, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है। इसके अलावा, कंपनी के पास ₹343.96 करोड़ के कर्ज हैं, जिसके कारण इसका debt-to-equity ratio नकारात्मक है, जो वित्तीय दबाव को दर्शाता है। फलेक्‍सिबल वर्कस्पेस सेक्टर की अस्थिरता और आर्थिक मंदी के प्रति इसकी संवेदनशीलता भी कंपनी के लिए जोखिम है, जिससे ओक्यूपेंसी रेट पर असर पड़ सकता है। IPO के जरिए जुटाए गए फंड का इस्तेमाल कंपनी ने विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया है। इसमें ₹462.65 करोड़ नए सेंटर खोलने और कैपिटल खर्च के लिए रखे गए हैं, जिससे कंपनी का भौगोलिक विस्तार और बाजार में पकड़ मजबूत हो सके। साथ ही, ₹93.04 करोड़ कर्ज चुकाने के लिए रिजर्व किए गए हैं, ताकि कंपनी की पूंजी संरचना बेहतर हो और वित्तीय बोझ कम हो

बाकी राशि का उपयोग रणनीतिक पहलों और ऑपरेशनल आवश्यकता के लिए किया जाएगा। Indiqube Spaces के वित्तीय आंकड़े मिला-जुला प्रभाव छोड़ते हैं। जहां राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि और EBITDA मार्जिन में मजबूती साफ दिखती है, वहीं लगातार नुकसान और नकारात्मक नेट वर्थ निवेशकों के लिए चिंता का विषय हैं। ROE नकारात्मक -2.19% है, जबकि ROCE 34.21% पर मजबूत है, जो परिचालन क्षमता को दर्शाता है। कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹4,977 करोड़ है, लेकिन पहली दिन की गिरावट ने निवेशकों के भरोसे को हिला दिया है। कुल मिलाकर Indiqube Spaces का IPO उन निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है जो जोखिम कम रखना चाहते हैं। कंपनी के पास बाजार में नेतृत्व की स्थिति और बढ़ने की क्षमता जरूर है, लेकिन लगातार वित्तीय घाटे और नकारात्मक नेट वर्थ के कारण निवेशकों को बहुत सावधानी बरतनी होगी। पहली दिन की 8.86% की गिरावट ने बाजार की शंका को जाहिर किया है कि इस सेक्टर में निवेश करने वाले को जोखिमों को समझकर कदम उठाना चाहिए। Indiqube Spaces की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन फिलहाल निवेशकों की नजरें कंपनी के भविष्य के सुधारों और वित्तीय प्रदर्शन पर टिकी हैं

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