भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FIIs/FPI) ने सोमवार को फिर से बिकवाली का रुख अपनाया है। NSE के प्रावधानिक आंकड़ों के अनुसार, FIIs ने कुल 1,202 करोड़ रुपए के शेयर बेचे जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 5,972 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे। पिछले शुक्रवार को जहां FIIs/FPI ने अपनी बिकवाली की प्रवृत्ति को तोड़ा था, वहीं सोमवार को यह प्रवृत्ति फिर से उलट गई। DIIs ने कुल 15,109 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे और 9,136 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। दूसरी ओर, FIIs/FPI ने 9,477 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे और 10,679 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। इस साल अब तक DIIs नेट खरीदार बने हुए हैं, जिनकी खरीदारी 4.51 लाख करोड़ रुपए के आसपास है, जबकि FIIs/FPI कुल 1.77 लाख करोड़ रुपए के शेयर बेच चुके हैं। भारतीय इक्विटी बाजार ने सोमवार को सप्ताह की शुरुआत थोड़ी सतर्कता के साथ की, लेकिन दिन के दौरान खरीदारी की गति बढ़ने से बाजार में तेजी देखने को मिली। निफ्टी 50 ने 24,600 के स्तर के करीब वापसी की और सेंसेक्स 689 अंक की बढ़त के साथ 81,712 पर बंद हुआ, दोनों प्रमुख सूचकांक लगभग 0.9% की तेजी के साथ समाप्त हुए। सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान पर बंद हुए, जिसमें PSU Bank इंडेक्स ने 2% से अधिक की तेजी दिखाई। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में खरीदारी का दबाव बढ़ा, खासकर SBI के बेहतर Q1 नतीजों के बाद
वहीं, निफ्टी Midcap100 और Smallcap100 ने क्रमशः 0.9% और 0.4% की बढ़त दर्ज की। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के शेयरों में भी तेजी देखी गई, क्योंकि केंद्र सरकार ने LPG के अंडर-रिकवरी पर 30,000 करोड़ रुपए के मुआवजे को मंजूरी दी। इस कदम से OMCs के शेयरों को मजबूती मिली। मोटिलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के हेड ऑफ रिसर्च, वैल्थ मैनेजमेंट, सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि जुलाई में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में शुद्ध प्रवाह 81% बढ़कर 42,672 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जिससे AMC के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ेगी। उन्होंने आगे कहा कि कमाई के सीजन के अंतिम चरण में स्टॉक और सेक्टर विशेष गतिविधियां जारी रह सकती हैं। साथ ही, अमेरिकी टैरिफ और यूएस-रूस वार्ता के परिणाम पर नजर बनी रहेगी। तकनीकी दृष्टि से निफ्टी में 24,650-24,750 स्तर पर तत्काल प्रतिरोध मौजूद है। इस स्तर को पार करने पर तेजी की गति फिर से मजबूत हो सकती है। वहीं, 24,500-24,450 स्तर समर्थन प्रदान करेगा, जबकि 24,400-24,350 का क्षेत्र एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार में मजबूती बनी हुई है, जबकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार के उतार-चढ़ाव का कारण बनी हुई है
निवेशक आगामी अमेरिकी आर्थिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, जो बाजार के अगले रुख को प्रभावित कर सकते हैं। इस प्रकार, भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को सकारात्मक शुरुआत की है, लेकिन विदेशी निवेशकों के बेचने के दबाव के कारण सतर्कता बरती जा रही है। बाजार के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निकट भविष्य में FIIs का रुख कैसा रहता है और DIIs अपनी खरीदारी जारी रख पाते हैं या नहीं