भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FIIs) ने 25 जुलाई को लगभग 1,980 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 2,138 करोड़ रुपये के शेयरों की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की। यह आंकड़े NSE के प्रारंभिक डेटा से सामने आए हैं। DIIs ने कुल 12,786 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 10,648 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, वहीं FIIs ने 12,831 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे लेकिन 14,811 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर नेट सेलर का रुख अपनाया। पूरे साल के हिसाब से देखा जाए तो FIIs अब तक लगभग 1.43 लाख करोड़ रुपये के शेयरों की नेट बिकवाली कर चुके हैं, जबकि DIIs ने 3.84 लाख करोड़ रुपये के शेयरों की खरीदारी की है। इस संतुलन के बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरी बार नीचे बंद हुआ। प्रमुख सूचकांक Sensex में 968 अंक की गिरावट आई और यह 81,699 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 225 अंक गिरकर 25,000 के नीचे आ गया, जो 0.9% की गिरावट दर्शाता है। निफ्टी के मिडकैप 100 और स्मालकैप 100 में क्रमशः 1.6% और 2.2% की गिरावट देखी गई, जो बाजार में जोखिम से बचने की भावना को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार वित्तीय सेक्टर में गिरावट ने बाजार को सबसे अधिक प्रभावित किया। Motilal Oswal Financial Services के Head of Research, Siddhartha Khemka ने बताया कि Bajaj Finance जैसे वित्तीय शेयरों में गिरावट की वजह एसेट क्वालिटी को लेकर बढ़ी चिंताएं हैं
इसके अलावा भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते में प्रगति न होना और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की कमजोरी को बढ़ावा दिया। फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर इस कमजोरी के बीच कुछ हद तक मजबूती के साथ उभरे। इन सेक्टरों में स्टॉक-विशिष्ट मजबूती के चलते 0.6% से 0.7% तक की बढ़त दर्ज की गई। यह स्थिति बाजार के व्यापक हिस्से में गिरावट के बावजूद इन सेक्टरों की मजबूती को दर्शाती है। वैश्विक स्तर पर भी बाजार की चुनौतियां बनी हुई हैं। यूरोप की ओर से European Central Bank (ECB) ने अपने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन Eurozone की आर्थिक वृद्धि को लेकर नकारात्मक संकेत दिए हैं, जिससे वैश्विक निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है। इस बीच भारत और ब्रिटेन ने लंबे समय से चली आ रही Free Trade Agreement (FTA) को औपचारिक रूप से साइन किया। प्रधानमंत्री मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केयर स्टारमर की उपस्थिति में यह समझौता हुआ, जिसके तहत 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 120 अरब डॉलर तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि इस सकारात्मक खबर के बावजूद बाजार पर व्यापक आर्थिक और राजनीतिक असमंजस का दबाव बना रहा। Khemka ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका के व्यापार समझौते में अनिश्चितता, Q1 FY26 की मिक्स्ड अर्निंग रिपोर्ट्स और FIIs की लगातार बिकवाली के कारण बाजार फिलहाल कंसोलिडेशन के दौर में रहेगा
मौजूदा सप्ताहांत में Kotak Mahindra Bank, Macrotech Developers और CDSL की अर्निंग रिपोर्ट्स पर भी नजर रखी जाएगी, जो अगले सप्ताह के लिए बाजार की दिशा तय कर सकती हैं। इस तरह विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी ने भारतीय शेयर बाजार को बड़ी गिरावट से बचाया, लेकिन वैश्विक आर्थिक दबाव और व्यापारिक अनिश्चितताएं निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। बाजार के लिए आने वाले दिनों में इन कारकों पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा