भारत के स्टॉक मार्केट में घरेलू निवेशकों का दबदबा, जानिए कैसे ₹18 लाख करोड़ से बदला बाजार का खेल!

Saurabh
By Saurabh

भारत के पूंजी बाजार में पिछले छह सालों में घरेलू निवेशकों ने एक अहम भूमिका निभाई है। SEBI के Whole-Time Member, Ananth Narayan ने बताया कि अप्रैल 2019 से जून 2025 के बीच भारतीय निवेशकों ने बाजार में ₹18 लाख करोड़ से अधिक का निवेश किया है, जो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा लाए गए $29 बिलियन से सात गुना ज्यादा है। इस निवेश के इस बड़े उछाल ने बाजार की तस्वीर ही बदल दी है और इसके असर अब पूरे वित्तीय क्षेत्र में महसूस किए जा रहे हैं। Ananth Narayan ने International Conference on Financial Planning के दौरान यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस घरेलू निवेश में इजाफा भारतीय पूंजी बाजार की परिपक्वता का संकेत है। उन्होंने यह भी बताया कि certified financial planners का एक महत्वपूर्ण कर्तव्य है कि वे निवेशकों को सही जानकारी देकर बेहतर निर्णय लेने में मदद करें। SEBI भी इस दिशा में काम कर रहा है ताकि बाजार में विश्वास और स्थिरता बनी रहे जिससे निवेशक लंबे समय तक बाजार में बने रहें। पिछले पांच सालों में भारत में individual investors की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है। मार्च 2020 में जहाँ यह संख्या 4.2 करोड़ थी, वहीं 2025 के मध्य तक यह बढ़कर लगभग 13 करोड़ तक पहुंच गई है। यह दर्शाता है कि आम आदमी भी अब शेयर बाजार में विश्वास करने लगा है और निवेश की ओर अग्रसर हो रहा है। हालांकि, Narayan ने यह भी कहा कि अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है

निवेशकों के हितों की सुरक्षा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बाजार में हेरफेर हो सकता है, अत्यंत जरूरी है। उन्होंने कहा कि fair play सुनिश्चित करना SEBI, stock exchanges, depositories और अन्य सभी stakeholders की साझा जिम्मेदारी है। Mutual funds में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। पिछले वित्तीय वर्ष में equity mutual funds में ₹6.1 लाख करोड़ का रिकॉर्ड निवेश हुआ। इससे कंपनियों को पूंजी जुटाने में काफी मदद मिली और IPOs, FPOs, rights issues, QIPs जैसे माध्यमों से ₹4.6 लाख करोड़ से ज्यादा की धनराशि उपलब्ध कराई गई। Narayan ने इसे बाजार की परिपक्वता का स्पष्ट सबूत बताया। उन्होंने यह भी बताया कि mutual funds में निवेश करने वाले retail investors को पिछले छह वर्षों में औसतन 15.5% की वार्षिक रिटर्न मिली है, जो निवेशकों के भरोसे और बाजार की मजबूती दोनों को दर्शाता है। Alternate Investment Funds (AIFs) भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ये फंड मुख्य रूप से high-net-worth investors के लिए हैं जो unlisted opportunities में निवेश करना चाहते हैं। मार्च 2025 तक AIFs में commitments ₹13.5 लाख करोड़ तक पहुंच गए हैं, जो पिछले एक साल में ₹1.7 लाख करोड़ का इजाफा है

ये फंड पिछले पांच सालों में 30% की वार्षिक दर से बढ़ रहे हैं। हालांकि घरेलू निवेशकों का दबदबा बढ़ा है, Narayan ने यह भी माना कि FPIs भारतीय बाजार के लिए आज भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। जून 2025 तक FPIs के पास ₹74 लाख करोड़ से अधिक के assets हैं, जो लगभग $860 बिलियन के बराबर है। पिछले 30 वर्षों में FPIs को डॉलर के हिसाब से सालाना 10% से अधिक रिटर्न मिला है, जो उनकी भारत की विकास कहानी में लंबे समय से हिस्सेदारी को दर्शाता है। इस पूरे बदलाव से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय वित्तीय परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव आया है। individual investors की संख्या में वृद्धि, mutual funds में निवेश का उछाल और AIFs की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता ने भारतीय पूंजी बाजार को नई दिशा दी है। वहीं, regulators द्वारा पारदर्शिता और विश्वास को मजबूत करने के प्रयास लंबे समय तक सतत और समावेशी विकास के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं। भारत का स्टॉक मार्केट अब सिर्फ विदेशी निवेशकों के भरोसे नहीं रहा, बल्कि घरेलू निवेशकों ने इस खेल में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए न केवल निवेश के नए अवसर पैदा कर रहा है, बल्कि भविष्य में वित्तीय स्थिरता और समृद्धि का रास्ता भी खोल रहा है। Ananth Narayan के अनुसार, इस नई लहर के साथ बाजार और भी अधिक विकसित होगा, जिससे भारत की आर्थिक शक्ति और भी मजबूती से उभरकर सामने आएगी

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