देश की प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज BSE ने गुरुवार, 28 अगस्त को ऐलान किया कि 8 दिसंबर 2025 से इंडेक्स और स्टॉक फ्यूचर्स एवं ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स की ट्रेडिंग प्री-ओपन सेशन में शुरू होगी। यह कदम ट्रेडिंग की सुविधा को बढ़ाने और इक्विटी डेरिवेटिव्स में रिस्क मॉनिटरिंग को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। BSE ने अपने सर्कुलर में बताया कि “Equity Derivatives Segment में इंडेक्स और स्टॉक फ्यूचर्स के लिए प्री-ओपन सेशन 8 दिसंबर 2025 से लागू किया जाएगा। ” ट्रेडिंग में किसी भी तरह के नए बदलाव ETI API या मार्केट डेटा ब्रॉडकास्ट स्ट्रीम्स में नहीं होंगे, क्योंकि एक्सचेंज पहले से ही इक्विटी सेगमेंट में प्री-ओपन ट्रेडिंग सपोर्ट करता है। अब इसी मैसेज स्ट्रक्चर और फील्ड डिफिनिशंस को इक्विटी डेरिवेटिव्स में भी लागू किया जाएगा। इस बदलाव के साथ BSE देश की एकमात्र एक्सचेंज बन जाएगी जो इंडेक्स और स्टॉक फ्यूचर्स एवं ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स की प्री-ओपन ट्रेडिंग सुविधा देगी, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) इस सुविधा को उपलब्ध नहीं कराता। वर्तमान में, इक्विटी मार्केट का प्री-ओपन सेशन सुबह 9:00 बजे शुरू होकर 9:15 बजे समाप्त होता है। BSE का यह नया कदम ट्रेडर्स को पहले से ही बाजार की दिशा जानने और बेहतर निर्णय लेने का मौका देगा, जिससे मार्केट की पारदर्शिता और स्थिरता बढ़ेगी। वहीं, BSE ने अपनी Q1 FY26 की कमाई के आंकड़े भी जारी किए हैं। अप्रैल-जून तिमाही में BSE की कुल आय ₹1,044 करोड़ रही, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही के ₹668 करोड़ से 56% अधिक है
ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹958 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल के ₹601 करोड़ की तुलना में 59% की वृद्धि दर्शाता है। इस दौरान, इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में कुल 498 करोड़ कॉन्ट्रैक्ट्स ट्रेड हुए, जिससे ₹598 करोड़ का रेवेन्यू प्राप्त हुआ। BSE के StAR MF प्लेटफॉर्म पर भी कारोबार में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। Q1 FY26 में यहां 18.3 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जो पिछले साल की इसी अवधि के 14.1 करोड़ से 30% अधिक हैं। इस प्लेटफॉर्म का मार्केट शेयर 89% पर बना हुआ है, जो इसकी मजबूती को दर्शाता है। प्रॉफिट के मामले में भी BSE ने अच्छा प्रदर्शन किया है। प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) पिछले तिमाही के मुकाबले 9% बढ़कर ₹494 करोड़ से ऊपर पहुंच गया। टॉपलाइन में भी 13% की वृद्धि देखी गई, जो Q4 FY25 की ₹847 करोड़ की तुलना में बेहतर है। ऑपरेशनल स्तर पर EBITDA ₹626 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹282 करोड़ से 122% अधिक है। Q4 FY25 के ₹594 करोड़ से यह 5% की बढ़ोतरी दर्शाता है
EBITDA मार्जिन 65% पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में यह केवल 47% था। हालांकि, BSE के शेयरों में कारोबार के दौरान 1.42% की गिरावट दर्ज की गई और शेयर ₹2,184 पर बंद हुए। यह प्रदर्शन NIFTY50 इंडेक्स की गिरावट 0.85% से थोड़ा कमजोर रहा। BSE द्वारा शुरू की जा रही यह नई सुविधा न केवल ट्रेडर्स के लिए नए अवसर लेकर आएगी, बल्कि भारतीय स्टॉक मार्केट के प्रबंधन और निगरानी में भी एक नई क्रांति साबित होगी। प्री-ओपन ट्रेडिंग से बाजार में वॉलैटिलिटी कम होने और कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है। साथ ही, यह कदम BSE को NSE से अलग और आगे स्थापित करेगा, क्योंकि NSE अभी तक इस सुविधा को नहीं दे रहा है। इस पहल से BSE अपने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को और अधिक प्रगतिशील और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। नए नियमों के लागू होने के बाद ट्रेडर्स को अपने ट्रेडिंग सिस्टम्स और रणनीतियों में भी आवश्यक बदलाव करने होंगे ताकि वे प्री-ओपन सेशन के दौरान होने वाले ट्रेडिंग अवसरों का पूरा लाभ उठा सकें। इस महत्वपूर्ण बदलाव के साथ ही BSE ने यह भी स्पष्ट किया है कि ट्रेडिंग में कोई जटिलता नहीं होगी क्योंकि ETI API या डेटा स्ट्रीम्स में कोई बदलाव नही किए जाएंगे, जिससे ट्रेडिंग में सहजता बनी रहेगी। यह कदम भारत के वित्तीय बाजारों की दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक मजबूत संकेत माना जा रहा है
कुल मिलाकर, BSE की यह नई नीति और Q1 FY26 की मजबूत कमाई रिपोर्ट यह दर्शाती है कि एक्सचेंज न केवल तकनीकी उन्नति कर रहा है, बल्कि वित्तीय प्रदर्शन में भी लगातार सुधार कर रहा है, जिससे भारतीय शेयर बाजार में उसकी स्थिति और भी मजबूत होगी