Nifty 50 में बड़ा उलटफेर: जानिए क्यों 24,900 के स्तर पर नजर बनी हुई है और Bank Nifty के लिए क्या है अगला कदम?

Saurabh
By Saurabh

Nifty 50 ने 7 अगस्त को ट्रेड के अंतिम घंटे में जबरदस्त रिकवरी दिखाई, जो कि Trump के टैरिफ घोषणा के बाद आई शुरुआती गिरावट से उबरने का संकेत है। दिन के अंत में Nifty 50 ने 22 पॉइंट्स की बढ़त के साथ 24,596 के स्तर पर बंद किया। खास बात यह रही कि इंडेक्स ने दिन के निचले स्तर से लगभग 250 पॉइंट्स की वापसी कर 100-day EMA (24,595) के ऊपर बंद किया। हालांकि, यह 20-day और 50-day EMA (24,850 से 24,900 के बीच) के नीचे ही रहा, जो बाजार में बियरिश दबाव की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, Nifty 50 को 100-day EMA के ऊपर मजबूती से टिकना होगा तभी यह 24,900 के करीब बढ़ने की संभावना दिखाएगा। फिलहाल बाजार में रेंजबाउंड ट्रेडिंग और कंसोलिडेशन जारी रहने की उम्मीद है। सपोर्ट के तौर पर 24,350 (गुरुवार का लो) महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टेक्निकल इंडिकेटर्स की बात करें तो Nifty 50 ने एक बुलिश कैंडल बनाई है जिसमें लंबी लोअर शैडो है, जो दर्शाता है कि निवेशक गिरावट पर खरीदारी कर रहे हैं। लेकिन इंडेक्स की लोअर हाईज और लोअर लो की स्थिति अभी भी बरकरार है। 20-day EMA ने 50-day EMA को नीचे से क्रॉस किया है, जो अल्पकालिक कमजोरी का संकेत है

RSI 39 के स्तर पर बना हुआ है, जो बियरिश क्रॉसओवर को दर्शाता है। MACD ज़ीरो लाइन के नीचे है लेकिन हिस्टोग्राम की कमजोरी कम हुई है। ये सभी संकेत मिलकर बताते हैं कि बाजार में फिलहाल सतर्कता बनी हुई है। Bank Nifty ने भी 7 अगस्त को बुलिश कैंडल के साथ लोअर विक दिखाया, जो निचले स्तरों पर खरीदारी रुचि को दर्शाता है। हालांकि यह इंडेक्स भी लोअर टॉप्स और लोअर बॉटम्स की फॉर्मेशन में ट्रेड कर रहा है। Bank Nifty ने 100-day EMA के ऊपर मजबूती दिखाई लेकिन 20-day और 50-day EMAs के नीचे ही कारोबार किया। साथ ही, Bollinger Bands की मिडलाइन से भी नीचे रहा। MACD ज़ीरो लाइन के नीचे है, परंतु मोमेंटम की कमजोरी कम हुई है। RSI 38.76 के स्तर पर है, जो बियरिश क्रॉसओवर को दर्शाता है। इन तकनीकी संकेतों से पता चलता है कि Bank Nifty में भी मजबूती के लिए और पुष्टि की जरूरत है

ऑप्शंस डेटा पर नजर डालें तो Nifty 50 के लिए सबसे ज्यादा Call open interest 25,000 स्ट्राइक पर देखा गया है, जो 53.4 लाख कॉन्ट्रैक्ट्स के साथ एक मजबूत रेसिस्टेंस बन सकता है। इसके बाद 25,500 और 24,200 स्ट्राइक पर भी काफी Call open interest है। Call writing भी 25,000 स्ट्राइक पर सबसे अधिक हुई है, जिसका मतलब है कि इस स्तर पर बिकवाली का दबाव हो सकता है। Put ऑप्शंस में 24,500 स्ट्राइक पर अधिकतम open interest (46.26 लाख कॉन्ट्रैक्ट्स) है, जो सपोर्ट का मजबूत स्तर हो सकता है। Bank Nifty के ऑप्शन में 57,000 स्ट्राइक पर सबसे ज्यादा Call open interest (21.94 लाख कॉन्ट्रैक्ट्स) है, जो अगले रेसिस्टेंस के तौर पर काम कर सकता है। Put open interest अधिकतम 57,000 स्ट्राइक पर दिखा, जो इस स्तर को महत्त्वपूर्ण सपोर्ट बनाता है। Call और Put writing/ unwinding में भी कई स्तरों पर उतार-चढ़ाव नजर आए, जो बाजार में जटिलता को दर्शाते हैं। Put-Call Ratio (PCR) में भी बदलाव देखने को मिला। 7 अगस्त को Nifty का PCR 1.06 पर पहुंच गया, जो पहले के 0.74 से काफी ऊपर है। PCR के बढ़ने का मतलब होता है कि Put ऑप्शंस की बिक्री Call ऑप्शंस की बिक्री से अधिक हो रही है, जो आमतौर पर बाजार में तेजी की ओर संकेत करता है

यदि PCR 0.7 से नीचे गिरता है तो यह मंदी का संकेत हो सकता है। फिलहाल बाजार में निवेशकों का मूड थोड़ा सकारात्मक नजर आ रहा है। India VIX, जो बाजार की भय指数 है, ने 12 के ऊपर चढ़ाई की, लेकिन अंत में 2.28 प्रतिशत गिरकर 11.69 पर बंद हुआ। VIX के इस स्तर पर आने से निवेशकों को कुछ सहजता मिली है, क्योंकि यह संकेत देता है कि बाजार में डर कम हुआ है। शेयर बाजार में 71 स्टॉक्स में Long Build-up देखा गया, यानी इन स्टॉक्स की कीमत और ओपन इंटरेस्ट दोनों बढ़े। वहीं, 28 स्टॉक्स में Long Unwinding हुआ, जहां कीमत और ओपन इंटरेस्ट दोनों घटे। Short Build-up 43 स्टॉक्स में हुआ, जबकि 78 स्टॉक्स में Short Covering हुई, जो बाजार के मिश्रित मूड को दर्शाता है। F&O सेगमेंट में PNB Housing Finance पर प्रतिबंध जारी रहा, जबकि कोई नया स्टॉक F&O Ban में नहीं जोड़ा गया। आर्थिक और तकनीकी संकेतों के आधार पर कहा जा सकता है कि Nifty 50 और Bank Nifty फिलहाल महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेसिस्टेंस स्तरों के बीच मजबूती के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 100-day EMA के ऊपर स्थिरता हासिल करना दोनों इंडेक्स के लिए तेजी की शुरुआत का संकेत होगा

निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहना चाहिए और बाजार के मूड के अनुसार ट्रेडिंग करनी चाहिए, क्योंकि वैश्विक और घरेलू कारकों का प्रभाव बाजार पर अभी भी बना हुआ है

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