भारतीय शेयर बाजार में 30 जुलाई को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) के बीच रोचक फेरबदल देखने को मिला। NSE के प्राविजनल डेटा के अनुसार, इस दिन FII ने भारतीय इक्विटीज में कुल 850 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री की, जबकि DII ने 1,829 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। आंकड़ों को विस्तार से देखें तो DIIs ने कुल 12,890 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 11,061 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, वहीं FPIs ने 11,888 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे लेकिन 12,738 करोड़ रुपये के शेयर भी बेचे। यह गतिरोध दर्शाता है कि विदेशी निवेशक बाजार से निकासी कर रहे हैं, जबकि घरेलू निवेशक सक्रिय रूप से खरीदारी कर रहे हैं। साल भर के आंकड़ों पर नजर डालें तो FII कुल मिलाकर 1.57 लाख करोड़ रुपये के शेयरों के नेट सेलर रहे हैं, जबकि DIIs 4.02 लाख करोड़ रुपये के नेट खरीदार। यह साफ संकेत है कि भारतीय बाजार में घरेलू संस्थान विदेशी निवेशकों की तुलना में अधिक उत्साहित और भरोसेमंद नजर आ रहे हैं। बाजार के तकनीकी प्रदर्शन की बात करें तो 30 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक Sensex और Nifty दोनों ने मामूली बढ़त के साथ कारोबार बंद किया। Sensex ने 143.91 अंक यानी 0.18% की तेजी के साथ 81,481.86 के स्तर पर बंद किया, जबकि Nifty ने 33.95 अंक या 0.14% की बढ़त के साथ 24,855.05 पर अपना सत्र समाप्त किया। हालांकि, यह बढ़त उतनी मजबूत नहीं थी क्योंकि सत्र में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, खासकर जुलाई के महीने के F&O एक्सपायरी से जुड़ी गतिविधियों और अमेरिकी Federal Reserve के ब्याज दर के फैसले से पहले निवेशकों की सतर्कता के कारण। सेक्टोरल स्तर पर IT, FMCG और Capital Goods सेक्टर ने बाजार में तेजी का नेतृत्व किया, जबकि Auto, PSU Banks और Real Estate सेक्टर्स ने कमजोरी दिखाई और बाजार की रफ्तार को थोड़ा दबाया
तकनीकी दृष्टिकोण से Nifty ने एक बुलिश हैमर कैंडल बनाई और पिछले सत्र के उच्च स्तर से ऊपर बंद किया, जो एक सकारात्मक संकेत माना जाता है। Choice Equity Broking के वरिष्ठ तकनीकी एवं डेरिवेटिव विश्लेषक Mandar Bhojane के अनुसार, “Nifty वर्तमान में अपने 100-day EMA के ऊपर ट्रेड कर रहा है, और यदि यह 50-day EMA के स्तर 24,935 से ऊपर बंद होता है तो यह बुलिश रिवर्सल को पुष्ट करेगा। ” उन्होंने आगे कहा कि यदि Nifty इस महत्वपूर्ण जोन के ऊपर बना रहता है, तो आने वाले सत्रों में यह 25,200 और 25,800 के स्तर तक पहुंच सकता है। वहीं, नीचे के समर्थन स्तर 24,590 से 24,400 के बीच है, जो ट्रेडर्स के लिए डिप-बायिंग जोन के रूप में काम कर सकता है। Bank Nifty ने भी हाल ही में अपनी कंसॉलिडेशन रेंज से ब्रेकडाउन के बाद पुनः टेस्ट किया है, लेकिन अभी भी कन्फ्यूज्ड मूवमेंट दिखा रहा है। 56,275 के ऊपर ब्रेकआउट होने पर यह 57,000 और 57,630 के स्तरों की ओर बढ़ सकता है। नीचे समर्थन 55,500 से 55,150 के बीच बना हुआ है। Bank Nifty का RSI 44.14 के आस-पास स्थिर है, जो फिलहाल धीमी गति का संकेत देता है, लेकिन लंबी अवधि का ट्रेंड अभी भी बुलिश ही है। मौद्रिक बाजार की अस्थिरता में थोड़ी कमी आई है, जिससे बाजार में सुधार की भावना देखने को मिल रही है। India VIX 2.78% गिरकर 11.2050 पर आ गया, जो निवेशकों के बीच बेहतर सेंटिमेंट को दर्शाता है
ऑप्शंस मार्केट में 25,000 और 25,200 के कॉल स्ट्राइक प्राइस पर भारी कॉल राइटिंग देखने को मिली है, जो इन स्तरों को मजबूत रेसिस्टेंस के रूप में इंगित करती है। वहीं, 24,800 के पुट स्तर पर बड़ी पुट ओपन इंटरेस्ट है, जो मजबूत सपोर्ट की ओर इशारा करता है। कुल मिलाकर, विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी और तकनीकी संकेतक यह दर्शाते हैं कि भारतीय शेयर बाजार की स्थिति फिलहाल सकारात्मक बनी हुई है। निवेशक Federal Reserve के ब्याज दर फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो आगे बाजार की दिशा तय करेगा। फिलहाल, Nifty और Bank Nifty दोनों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर नजर बनाए रखना आवश्यक होगा, जिससे अगले कुछ सत्रों में बाजार के रुख का सही अंदाजा लगाया जा सके