Nifty 50 में बड़ी गिरावट! क्या Reliance, ICICI Bank और HDFC Bank के Q1FY26 Earnings से मिलेगी राहत? शेयर बाजार ने तीसरे लगातार सप्ताह भी मंदी का दौर जारी रखा, जिसमें Nifty 50 ने 25,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे गिरावट दर्ज की। 18 जुलाई को समाप्त सप्ताह में, BSE Sensex 743 अंक गिरकर 81,758 पर बंद हुआ जबकि Nifty 50 में 181 अंकों की गिरावट के साथ यह 24,968 पर आ गया। इस कमजोरी के पीछे जून तिमाही के कमजोर शुरुआत और ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति के कारण वैश्विक व्यापार में अस्थिरता का असर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले सप्ताह बाजार संचयी अवस्था में रहेगा, क्योंकि निवेशक मुख्य रूप से जून तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों और अमेरिका-भारत के बीच संभावित ट्रेड डील की खबरों पर नजर बनाए रखेंगे। शुक्रवार और शनिवार को Reliance Industries, ICICI Bank, और HDFC Bank जैसे बड़े इंडेक्स स्टॉक्स के Q1FY26 के नतीजे आएंगे, जो बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। मोटीलाल ओसवाल के Siddhartha Khemka ने कहा है कि वैश्विक व्यापार अस्थिरता और कमजोर कॉरपोरेट नतीजों के बीच बाजार में मजबूती की उम्मीद कम है और बाजार अगले सप्ताह भी सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। वहीं, Geojit Investments के Vinod Nair ने US-India मिनी ट्रेड एग्रीमेंट के सकारात्मक समाधान को एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स के लिए बड़ा अवसर बताया है, जो भारत को अन्य उभरते बाजारों की तुलना में और आकर्षक बना सकता है। जून तिमाही में कुल 286 कंपनियां अपनी आय रिपोर्ट जारी करेंगी, जिनमें Nifty 50 के 12 प्रमुख नाम शामिल हैं जैसे Infosys, Kotak Mahindra Bank, Bajaj Finance, UltraTech Cement, Dr Reddys Laboratories, Tata Consumer Products, Nestle India, SBI Life Insurance, Bajaj Finserv, Cipla और Shriram Finance। इसके अलावा Bank of Baroda, Canara Bank, Paytm, Havells India और Zee Entertainment Enterprises जैसी कंपनियों के नतीजे भी निवेशकों की निगाहों में रहेंगे। दूसरी तरफ, वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स ने मजबूती दिखाई और 0.61 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.46 पर बंद हुआ, जो अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और डॉलर की मांग का संकेत है
इसी सप्ताह 22 जुलाई को फेडरल रिजर्व के चेयर Jerome Powell का भाषण भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इससे आगामी ब्याज दरों के रुख का अनुमान लगाया जाएगा। 24 जुलाई को यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की ब्याज दर की घोषणा भी निवेशकों के लिए अहम रहेगी, जहां ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम दिखाई दे रही है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव डाला है। पिछले सप्ताह FIIs ने लगभग Rs 6,672 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की, जिससे इस महीने कुल बिकवाली लगभग Rs 17,000 करोड़ के करीब पहुंच गई है। इसके विपरीत, डोमेस्टिक इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने इस बिकवाली को पूरी तरह कवर करते हुए Rs 9,491 करोड़ की खरीदारी की, जिससे बाजार में सपोर्ट बना रहा। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, Nifty 50 ने 20-दिवसीय EMA के नीचे कारोबार किया और 50-दिवसीय EMA के करीब 24,900 के स्तर को टेस्ट किया। यह संकेत है कि बाजार में निचला दबाव बढ़ा है। RSI इंडिकेटर भी कमजोर होकर 43.07 पर आ गया है। यदि Nifty 50 24,900 से नीचे टूटता है तो 24,800 से 24,500 के बीच का स्तर भी टूट सकता है। हालांकि, अगर यह स्तर बचता है तो बाजार में 24,200 से 24,300 के बीच सुधार की संभावना बनी रहेगी
विकल्प बाजार में भी Nifty की अपेक्षित रेंज 24,500 से 25,500 के बीच बताई गई है, जिसमें 25,200 और 24,900 के स्तर पर अधिक ओपन इंटरेस्ट देखने को मिला। IPO मार्केट भी अगले सप्ताह काफी सक्रिय रहेगा, जिसमें कुल 11 नए IPO लॉन्च होंगे। प्रमुख IPO में PropShare Titania का Rs 473 करोड़ का REIT IPO, Indiqube Spaces का Rs 700 करोड़ का IPO, और Brigade Hotel Ventures का Rs 759.6 करोड़ का IPO शामिल हैं। इसके अलावा SME सेगमेंट में भी कई नए आईपीओ बाजार में आएंगे, जो निवेशकों के लिए नए अवसर पेश करेंगे। अंततः, इस सप्ताह बाजार की चाल का फैसला मुख्य रूप से जून तिमाही के नतीजों, अमेरिकी टैरिफ नीति, और फेडरल रिजर्व के संकेतों पर निर्भर करेगा। फिलहाल FIIs की बिकवाली जारी है, जो बाजार के लिए चिंता का विषय है, लेकिन DIIs की खरीदारी ने बाजार में स्थिरता बनाए रखी है। निवेशकों को अगले सप्ताह वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर आर्थिक व राजनीतिक घटनाओं पर नजर बनाए रखनी होगी, क्योंकि ये कारक आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करेंगे। इस बीच, Nifty 50 का 25,000 का स्तर टूटना निवेशकों के मनोबल पर प्रभाव डाल सकता है, लेकिन कॉरपोरेट नतीजों में आश्चर्यजनक सुधार और अमेरिकी-भारतीय व्यापार समझौते के सकारात्मक संकेत बाजार को राहत दे सकते हैं। इसलिए, इस सप्ताह बाजार में सतर्कता और सही समय पर फैसले लेना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी होगा