Open Offer Process में बड़ा बदलाव! Sebi की नई Panel Report से खुलेंगे निवेशकों के लिए नए रास्ते

Saurabh
By Saurabh

Open offer प्रक्रिया में अब तेजी आने वाली है, क्योंकि Sebi की एक विशेषज्ञ पैनल ने इस प्रक्रिया के लिए प्रस्तावित समय सीमा में लगभग 20 दिनों की कटौती का सुझाव दिया है। यह बदलाव निवेशकों और कंपनियों दोनों के लिए लाभकारी साबित होगा क्योंकि इससे open offer की पूरी प्रक्रिया ज्यादा तेज और प्रभावी तरीके से पूरी हो सकेगी। फिलहाल, open offer पूरी करने के लिए कुल 62 कार्य दिवस लगते हैं, लेकिन Sebi के Takeover Review Panel ने अपने ड्राफ्ट में इसे घटाकर 42 कार्य दिवस करने की सिफारिश की है। यदि यह सुझाव लागू हो जाता है, तो इससे न केवल प्रक्रिया जल्दी पूरी होगी, बल्कि शेयरधारकों को भुगतान भी तेजी से मिलेगा। इस रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बदलावों की सिफारिश की गई है, जिनमें Detailed Public Statement (DPS) को प्रकाशित करने की अवधि को 5 कार्य दिवस से घटाकर 3 कार्य दिवस करने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा, Draft Letter of Offer (DLOF) को Sebi के समक्ष जमा करने की अवधि को भी 10 कार्य दिवस से घटाकर 5 कार्य दिवस करने का सुझाव दिया गया है। पैनल ने ये भी कहा है कि escrow deposit को DPS जमा करने के बजाय DLOF जमा करने से 2 कार्य दिवस पहले किया जा सकता है, क्योंकि सार्वजनिक घोषणा में offer size, price, और acquirer की जानकारी पहले से ही उपलब्ध होती है। Letter of Offer (LOF) को eligible शेयरधारकों तक भेजने की प्रक्रिया भी तेज की जाएगी। वर्तमान में LOF को Sebi की टिप्पणियों के 7 कार्य दिवस के भीतर भेजना होता है, लेकिन पैनल ने इसे घटाकर 5 कार्य दिवस करने का सुझाव दिया है। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए अब अधिकांश शेयर demat फॉर्म में होते हैं, इसलिए LOF को ईमेल के माध्यम से भेजा जा सकता है, जिससे डाक के कारण होने वाली देरी खत्म हो जाएगी

Tendering period, यानी शेयरधारकों द्वारा अपने शेयर जमा करने की अवधि भी कम की जाएगी। फिलहाल यह अवधि 10 कार्य दिवस है, लेकिन पैनल की समीक्षा में पाया गया कि 91 प्रतिशत शेयर अंतिम 5 कार्य दिवसों में ही जमा किए जाते हैं। इसलिए पैनल ने इस अवधि को घटाकर 5 कार्य दिवस करने की सिफारिश की है। इसके साथ ही, tendering शुरू होने से एक दिन पहले pre-offer advertisement जारी करना जारी रहेगा ताकि निवेशकों को offer price में बदलाव की जानकारी मिलती रहे। शेयरधारकों को भुगतान की प्रक्रिया में भी तेजी आएगी। अभी acquirers को tendering अवधि खत्म होने के बाद भुगतान के लिए 10 कार्य दिवस मिलते हैं, लेकिन पैनल ने इसे घटाकर 5 कार्य दिवस करने का सुझाव दिया है। तकनीकी प्रगति जैसे T+1 settlement और streamlined process की वजह से यह संभव हो पाया है। चूंकि शेयरधारकों के demat खाते में शेयर ब्लॉक रहते हैं, इसलिए जोखिम भी कम हो जाता है। Post-offer public announcements भी अब तेज हो जाएंगे। वर्तमान में, offer closing के 5 कार्य दिवस के भीतर post-offer advertisement प्रकाशित करना होता है, लेकिन नया प्रस्ताव इसे घटाकर 2 कार्य दिवस करने का है

क्योंकि सभी आवश्यक डेटा offer closing के तुरंत बाद उपलब्ध हो जाता है, इसलिए यह बदलाव तर्कसंगत है। यदि Sebi इन सभी सुझावों को स्वीकार करता है, तो यह open offer प्रक्रिया को वर्तमान से लगभग 20 कार्य दिवस तेज कर देगा। यह कदम open offer के साथ-साथ delisting प्रक्रिया को भी बेहतर तालमेल देगा। इससे शेयरधारकों के लिए भुगतान का समय कम होगा और बाजार की समग्र कार्यक्षमता बढ़ेगी। खास बात यह है कि जबसे retail investors की भागीदारी बाजार में बढ़ी है, तबसे corporate actions जैसे acquisitions और buy-backs के प्रति निवेशकों का विश्वास भी महत्वपूर्ण हो गया है। Sebi की यह पहल निवेशकों को अधिक सुविधा और पारदर्शिता प्रदान करेगी, जिससे वे बेहतर निर्णय ले सकेंगे। यह प्रस्ताव Sebi की takeover panel की तरफ से एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है, जो पूंजी बाजारों में डिजिटलीकरण और संचालन दक्षता को बढ़ावा देगा। अनावश्यक देरी को खत्म करते हुए और तेजी से संवाद तथा निपटान की तकनीकों का उपयोग करते हुए, regulator open offer को अधिक पारदर्शी, तेज़ और निवेशक-मुखी बनाना चाहता है। हालांकि, यह रिपोर्ट अभी ड्राफ्ट चरण में है और Sebi ने इसे सार्वजनिक रूप से परामर्श के लिए जारी नहीं किया है। नियामक प्रक्रिया के तहत Sebi अब सार्वजनिक प्रतिक्रिया लेगा और उसके बाद ही अंतिम रूप से इन बदलावों को लागू किया जाएगा

इस बदलाव के बाद बाजार में open offer से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक चुस्त-दुरुस्त होंगी, जिससे कंपनियों को acquisitions या buy-backs के दौरान तेजी से निर्णय लेने और क्रियान्वयन करने में मदद मिलेगी। निवेशकों के लिए भी यह एक बड़ी राहत होगी क्योंकि उनका पैसा और शेयर जल्द से जल्द सुरक्षित रूप से ट्रांसफर हो सकेंगे। संक्षेप में कहा जाए तो Sebi की यह नई panel report open offer प्रक्रिया को एक नई दिशा देने वाली है, जो बाजार की गतिशीलता और निवेशकों की सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। आने वाले समय में यदि यह बदलाव लागू होते हैं तो भारतीय पूंजी बाजारों की कार्यक्षमता और निवेशकों का भरोसा दोनों ही नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं

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