अगली बड़ी गिरावट से पहले सावधान! Carnelian के Vikas Khemani ने Unlisted Shares और Preferential Allotments में ‘FAD–FOMO’ साइकिल का किया बड़ा अलर्ट

Saurabh
By Saurabh

Carnelian Asset Advisor के संस्थापक Vikas Khemani ने हाल ही में एक पत्र के माध्यम से निवेशकों को चेतावनी दी है कि भारत के प्राइवेट मार्केट और preferential allotments में एक नई ‘FAD–FOMO’ साइकिल बनने जा रही है, जो 2021 के नए युग की टेक IPOs में देखी गई बूम और बस्ट जैसी हो सकती है। Khemani ने अपने पत्र में Carnelian के पहले से बताए गए “FAD–FOMO–FADE” फ्रेमवर्क को दोहराया है, जो बताता है कि कैसे किसी सेक्टर या थीम का हाइप (FAD) खरीदारी की दौड़ (FOMO) को जन्म देता है और अंततः उत्साह कम होकर कीमतों में तेज गिरावट (FADE) आ जाती है। पत्र में कहा गया है कि इस बार ‘FAD’ मुख्य रूप से unlisted shares और listed कंपनियों द्वारा preferential allotments में दिखाई दे रहा है। 2021 की घटना को याद करते हुए Khemani ने बताया कि उस वक्त नई टेक कंपनियों के IPOs में अत्यधिक मूल्यांकन और गलत समझ के कारण निवेशकों को भारी नुकसान झेलना पड़ा था। कई स्टॉक्स के प्राइस में गिरावट आई और कई लम्बे समय तक सटैग्नेट रहे। यह पूरी प्रक्रिया निवेशकों को पूंजी हानि के साथ-साथ अवसर लागत का भी सामना कराती है। “FAD” की शुरुआत तब होती है जब कोई सेक्टर या थीम ‘अगली बड़ी चीज’ के रूप में प्रचारित की जाती है और शुरुआती सफलता की कहानियां जोर-शोर से सामने आती हैं। धीरे-धीरे कीमतें बढ़ने लगती हैं, जिससे FOMO पैदा होता है और निवेशक बिना उचित जाँच-पड़ताल के खरीदारी में कूद पड़ते हैं। अंततः वास्तविकता सामने आती है, हाइप खत्म हो जाता है और कीमतें गिरने लगती हैं, जिससे निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है। विशेष रूप से unlisted shares की चर्चा करते हुए पत्र में कहा गया है कि NSE की लिस्टिंग और सक्रिय सेकेंडरी मार्केट के कारण ये शेयर अब फैशनेबल हो गए हैं

कई फैमिली ऑफिसेज ने सीधे unlisted equities में बड़े हिस्से ले लिए हैं, जो ऑनलाइन चैनल्स और बिचौलियों के प्रोत्साहन से बढ़ रहे हैं। हालांकि, Khemani ने सोशल मीडिया, Telegram ग्रुप्स और अनौपचारिक डीलरों की भूमिका पर भी चिंता जताई है, जो बिना कंपनी के fundamentals जैसे profitability और return ratios की चर्चा किए 30 प्रतिशत से अधिक रिटर्न का वादा करते हैं। पत्र में कुछ उदाहरण भी दिए गए हैं जो इस साइकिल की सच्चाई को दर्शाते हैं: HDB Financial का unlisted price IPO से पहले Rs 1,045 था, लेकिन लिस्टिंग के बाद यह Rs 735 के करीब गिर गया। NSDL का unlisted trade Rs 1,275 के उच्चतम स्तर पर था, लेकिन अगस्त 2025 में लिस्टिंग के बाद Rs 800 पर आया। Swiggy का unlisted मूल्य Rs 500 था, जबकि IPO के बाद यह Rs 390 से नीचे गिर गया। Waaree Energies का listed price Rs 2,000 के आसपास था जबकि unlisted में यह Rs 2,500 तक पहुंच चुका था। PharmEasy का unlisted मूल्य 2021 में Rs 135 था, IPO रद्द होने के बाद अब यह Rs 7.5 पर आ गया है। OYO, Good Glamm, BluSmart Mobility जैसी कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट देखी गई है। पत्र में unlisted मार्केट की संरचनात्मक कमजोरियों पर भी प्रकाश डाला गया है। यहां अक्सर कीमतें बिचौलियों द्वारा तय की जाती हैं न कि खुले बाजार में

IPO में देरी और छह महीने की लॉक-इन अवधि से शेयरों की liquidity कम हो जाती है। FOMO के कारण निवेशकों को बिना उचित जानकारी के शेयर मिल जाते हैं। निवेशकों के अधिकारों की कमी और banker की भारी कमीशन संरचना भी इस व्यवस्था को प्रभावित करती है। वहीं, preferential allotments में भी इसी तरह की speculative गतिविधियां बढ़ रही हैं। कंपनियां आकर्षक कहानी बनाकर और कुछ प्रमुख निवेशकों की भागीदारी दिखाकर डिस्काउंट पर शेयर जारी करती हैं। आम तौर पर retail और HNI निवेशक Rs 2-10 करोड़ तक का निवेश करते हैं उम्मीद के साथ कि लॉक-इन अवधि के बाद लाभ होगा, लेकिन जैसे ही कई निवेशक एक साथ बाहर निकलने की कोशिश करते हैं, कीमतों में भारी दबाव आ जाता है। कुछ उदाहरणों में एक मिड-टियर रियल एस्टेट कंपनी का preferential issue Rs 714 पर था जो अब Rs 289 पर ट्रेड कर रहा है, एक सोलर EPC कंपनी के issue में 95 प्रतिशत की गिरावट आई है, और एक payment solutions provider का issue Rs 79 से गिरकर Rs 5 पर आ गया है। Khemani ने निवेशकों को स्पष्ट किया है कि unlisted और preferential allotments में निवेश मुख्य रूप से उन पेशेवर निवेशकों के लिए है जिनके पास जोखिम, illiquidity और गवर्नेंस चुनौतियों का आंकलन करने की क्षमता होती है। उन्होंने सलाह दी है कि आम निवेशकों को fundamentals जैसे management की गुणवत्ता, business मॉडल, valuation और governance को समझकर ही निवेश करना चाहिए और उन आकर्षक लेकिन भ्रमित करने वाले झंझटों से बचना चाहिए जो पोर्टफोलियो के रिटर्न को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने लिखा, “Price ≠ value, scarcity ≠ quality, new ≠ better returns, और सबसे महत्वपूर्ण, unlisted ≠ better returns

” इस चेतावनी के साथ Carnelian ने निवेशकों को यह याद दिलाया है कि बाजार में हो रहे नए ट्रेंड्स में अंधाधुंध भागना भारी नुकसान का कारण बन सकता है। निवेशकों को सतर्क और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की आवश्यकता है ताकि वे ‘FAD–FOMO–FADE’ के चक्र में फंस कर अपनी पूंजी न खो दें

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