Asston Pharmaceuticals Limited, जो स्वास्थ्यसेवा उत्पादों की आपूर्ति करती है, ने BSE SME प्लेटफॉर्म पर 16 जुलाई 2025 को निराशाजनक शुरुआत की। कंपनी ने जुलाई 9 से 11 के बीच अपना IPO बंद किया था, जिसमें निवेशकों की जबरदस्त रुचि देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद शेयर ने लिस्टिंग के दिन 3.25% की गिरावट के साथ ट्रेडिंग शुरू की। IPO का इश्यू प्राइस ₹123 था, लेकिन शेयर ₹119 पर खुला, जिससे निवेशकों को शुरुआती नुकसान हुआ। यह लिस्टिंग परिदृश्य कंपनी के लिए उम्मीदों के विपरीत रहा और फार्मास्यूटिकल सेक्टर में निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है। Asston Pharmaceuticals के IPO की मांग अभूतपूर्व थी। पूरे IPO को 186.55 गुना सब्सक्राइब किया गया, जिसमें NII (Non-Institutional Investors) ने सबसे ज्यादा रुचि दिखाते हुए 353.14 गुना सब्सक्रिप्शन किया, रिटेल निवेशकों ने 172.06 गुना और QIB (Qualified Institutional Buyers) ने 85.76 गुना सब्सक्रिप्शन किया। यह दर्शाता है कि संस्थागत निवेशकों समेत आम निवेशकों ने इस इश्यू में गहरी दिलचस्पी दिखाई, बावजूद इसके लिस्टिंग पर शेयर प्राइस कमजोर रहा। कंपनी 2019 में स्थापित हुई और स्वास्थ्यसेवा उत्पादों के निर्यात में विशेषज्ञता रखती है। Asston Pharmaceuticals के प्रोडक्ट्स में टैबलेट्स, कैप्सूल्स, सैशे और सिरप शामिल हैं, जो एनाल्जेसिक्स, एंटीबायोटिक्स, एंटिफंगल्स, और विटामिन्स जैसे चिकित्सीय वर्गों में आते हैं। कंपनी के पास FDA सर्टिफिकेशन और QMS (Quality Management System) का अनुपालन है, जो इसकी गुणवत्ता और वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन को दर्शाता है
कंपनी के विकास के कई मजबूत कारण हैं। इसका एक्सपोर्ट-फोकस्ड बिजनेस मॉडल वैश्विक बाजारों में अच्छी पकड़ बनाता है। FDA सर्टिफिकेशन और NQA मान्यता से गुणवत्ता की गारंटी मिलती है। कंपनी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग की सुविधा भी देती है, जिससे विभिन्न राजस्व स्रोत बनते हैं। वित्तीय प्रदर्शन भी उत्साहजनक रहा है, FY25 में कंपनी की रेवेन्यू 62% बढ़कर ₹25.61 करोड़ हो गई, जबकि नेट प्रॉफिट में 218% की वृद्धि हुई और यह ₹4.33 करोड़ तक पहुंच गया। ROE (Return on Equity) 50.56% और ROCE (Return on Capital Employed) 51.25% के आंकड़े भी कंपनी की परिचालन कुशलता को दर्शाते हैं। हालांकि, कुछ चुनौतियां भी सामने हैं। IPO की मजबूत मांग के बावजूद शेयर लिस्टिंग पर डिस्काउंट में खुला, जो बाजार की कंपनी के मूल्यांकन और दीर्घकालिक स्थिरता को लेकर संदेह को दर्शाता है। कंपनी के पास केवल 52 कर्मचारी हैं, जो फार्मास्यूटिकल उद्योग में तुलनात्मक रूप से छोटे पैमाने का परिचालक होने का संकेत देता है। नेट प्रॉफिट में अचानक आई तेज़ वृद्धि की स्थिरता पर भी सवाल उठ रहे हैं
इसके अलावा, कंपनी का डेब्ट-टू-इक्विटी अनुपात 0.68 है, जो ₹7.26 करोड़ के उधार को दर्शाता है, और इसे सावधानी से प्रबंधित करना आवश्यक है। IPO की रकम का उपयोग कंपनी ने मुख्य रूप से मशीनरी खरीद, कार्यशील पूंजी बढ़ाने, कर्ज के आंशिक भुगतान और कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया है। ₹6 करोड़ मशीनरी के लिए और ₹13 करोड़ इन्वेंट्री और बिजनेस विस्तार के लिए खर्च किए गए हैं, जबकि ₹1 करोड़ कर्ज चुकाने में लगाया गया है। यह दिखाता है कि कंपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और परिचालन सुधार पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस IPO की मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹104.70 करोड़ रही। कंपनी ने EBITDA मार्जिन 24.60% और PAT मार्जिन 17.27% दर्ज किया है, जो परिचालन मार्जिन की मजबूती को दर्शाते हैं। हालांकि, पहली दिन की ट्रेडिंग में हुई गिरावट ने निवेशकों की उत्सुकता को ठेस पहुंचाई है। असल में, यह स्थिति दर्शाती है कि बाजार में फार्मा सेक्टर के प्रति सतर्कता बनी हुई है, भले ही सब्सक्रिप्शन की संख्या बहुत अधिक रही हो। Asston Pharmaceuticals का यह IPO उन निवेशकों के लिए एक चुनौतीपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है जो फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में प्रवेश करना चाहते हैं। कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति और विश्वसनीय उत्पाद गुणवत्ता सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन बाजार की प्रतिक्रिया और स्थिर लाभ क्षमता पर सवाल भी हैं
IPO की मजबूत मांग और खराब लिस्टिंग प्रदर्शन के बीच यह अंतर स्पष्ट करता है कि निवेशकों को भविष्य में कंपनी की वित्तीय रिपोर्ट और बाजार में प्रदर्शन पर नजर रखनी होगी। संक्षेप में, Asston Pharmaceuticals ने एक प्रभावशाली सब्सक्रिप्शन के बावजूद BSE SME पर निराशाजनक लिस्टिंग की। यह फार्मास्यूटिकल सेक्टर में निवेश के प्रति बाजार की सावधानी और कंपनी के सामने आने वाली चुनौतियों का परिचायक है। भविष्य में कंपनी के निर्यात विस्तार, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और वित्तीय प्रबंधन की रणनीतियों पर ही इसके शेयर के मूल्य निर्धारण और निवेशकों के विश्वास का निर्धारण होगा