भारत-अमेरिका ट्रेड डील ना होने पर Anil Rego का बड़ा खुलासा: जानिए कैसे प्रभावित होंगे Nifty और GST कटौती के फैसले

Saurabh
By Saurabh

Anil Rego, जो Right Horizons PMS के Founder और Fund Manager हैं, ने एक महत्वपूर्ण इंटरव्यू में भारत और अमेरिका के बीच अगस्त तक ट्रेड डील ना होने की स्थिति में आने वाले आर्थिक हालात पर अपनी गहरी सोच साझा की है। उन्होंने कहा है कि अगर अगस्त की डेडलाइन तक दोनों देशों के बीच कोई व्यापार समझौता नहीं होता है, तो व्यापक GST कटौती की बजाय चुनिंदा GST rationalization देखने को मिलेगा, जो खासतौर पर उन सेक्टर्स पर केंद्रित होगा जो सीधे तौर पर टैरिफ के प्रभाव में हैं। इनमें textile, auto components और pharmaceuticals जैसी इंडस्ट्रीज शामिल हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का फिस्कल रेस्पॉन्स काफी सावधानीपूर्ण होगा ताकि मैक्रोइकॉनॉमिक स्टेबिलिटी बनी रहे, साथ ही सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्टर्स को कुछ राहत भी मिले। इसका मतलब यह है कि सरकार बिना ज्यादा वित्तीय दबाव डाले, टैरिफ से प्रभावित क्षेत्रों को आर्थिक सहारा देने की रणनीति अपनाएगी। Nifty के मौजूदा हालात पर बात करते हुए Anil Rego ने कहा कि यह इंडेक्स 23,500 से 25,000 के रेंज में कंसॉलिडेट करेगा और त्योहारों के बाद एक मजबूत ब्रेकआउट देखने को मिलेगा। यह ब्रेकआउट घरेलू खपत में सुधार और नीतिगत स्पष्टता से प्रेरित होगा। उनका मानना है कि घरेलू मांग में मजबूती और बेहतर पॉलिसी क्लैरिटी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत होंगे। GST के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अगस्त में GST के सिम्प्लीफिकेशन और कुछ रेट कट की उम्मीद है, जो खासकर कंजम्पशन-ड्रिवन सेक्टर्स को राहत देगी। हालांकि भारत पर रूस से तेल खरीद पर लगभग 50% टैरिफ लगने के कारण सरकार को फिस्कल प्रूडेंस और निर्यातोन्मुख सेक्टर्स के लिए लक्षित सहायता के बीच संतुलन बनाना होगा

RBI की मौद्रिक नीति पर सवाल के जवाब में Anil Rego ने बताया कि RBI को अमेरिकी टैरिफ घोषणाओं के कारण जटिल स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। घरेलू विकास की जरूरतें दरों में छूट की मांग करती हैं, लेकिन आयातित महंगाई और टैरिफ की वजह से RBI की नीति में सीमाएं हैं। वे मानते हैं कि RBI अगस्त में मौजूदा दरों को स्थिर रखेगा, क्योंकि मुद्रा स्थिरता और महंगाई नियंत्रण को प्राथमिकता देना जरूरी है। संभवतः Q3FY26 में ही कोई राहतकारी कदम देखने को मिल सकता है जब टैरिफ के प्रभावों का पूरा आंकलन हो जाएगा और रुपये की अस्थिरता कम होगी। आय में सुधार के बारे में उन्होंने कहा कि H2 में आय का सुधार सब सेक्टर्स में समान रूप से नहीं होगा। घरेलू-केंद्रित कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करेंगी, जबकि निर्यातक कंपनियों को टैरिफ के चलते मार्जिन दबाव का सामना करना पड़ सकता है। बैंकिंग, घरेलू उपभोग और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स मजबूत आय वृद्धि बनाए रखेंगे। Nifty की कुल आय वृद्धि FY26 में 8-10% के बीच रहने की संभावना है, जिसमें घरेलू गुणवत्ता कंपनियां प्रीमियम मूल्यांकन प्राप्त करेंगी। टैरिफ के शोर को नजरअंदाज कर घरेलू-केंद्रित सेक्टर्स पर ध्यान देने की वकालत करते हुए Anil Rego ने कहा कि मौजूदा माहौल में बैंकिंग, इंश्योरेंस, कैपिटल गुड्स और घरेलू उपभोग वाले सेक्टर्स बेहतर जोखिम-इनाम अनुपात प्रदान करते हैं। ये सेक्टर्स वैश्विक व्यापार बाधाओं से कम प्रभावित होते हैं

सरकार के कैपेक्स, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और प्रीमियमाइजेशन ट्रेंड से जुड़े सेक्टर्स में मिड-कैप कंपनियां विशेष रूप से आकर्षक अवसर पेश कर रही हैं। टैरिफ से प्रभावित संभावित सेक्टर्स की बात करें तो डायमंड प्रोसेसिंग, IT सर्विसेज, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटो कंपोनेंट निर्माता सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। डायमंड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में लगभग 20 लाख भारतीय काम करते हैं और ये विश्व के 14 में से 15 कट डायमंड्स की सप्लाई करती है, जो 50% टैरिफ से भारी प्रभावित होगी। IT सर्विसेज कंपनियों को H1B वीजा नीतियों और संभावित सर्विस टैक्स के चलते अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। फार्मा कंपनियों को टैरिफ के अलावा दवाओं की कीमतों पर दबाव भी झेलना पड़ सकता है। ऑटो कंपोनेंट सेक्टर भी अमेरिकी सप्लाई चेन से जुड़ा होने के कारण व्यापार तनाव से वंचित नहीं रहेगा। Fed की मौद्रिक नीति पर Anil Rego ने कहा कि Fed Chair Powell ने स्पष्ट किया है कि टैरिफ योजनाओं के कारण अब तक रेपो दरों में कटौती नहीं की गई है। Fed राजनीतिक दबाव के बावजूद स्वतंत्रता बनाए रखने और टैरिफ से उत्पन्न महंगाई से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। 2025 तक Fed की दरें स्थिर रहने की संभावना है, केवल आर्थिक डेटा में गंभीर गिरावट आने पर मामूली कटौती हो सकती है। अंत में Anil Rego ने कहा कि सितंबर से बाजार में टैरिफ से जुड़ी नकारात्मक खबरों को नजरअंदाज कर निवेशक सक्रिय हो सकते हैं

गुणवत्ता वाली कंपनियां, जो उचित मूल्यांकन पर ट्रेड कर रही हैं, संस्थागत निवेशकों का आकर्षण बनेंगी। घरेलू तरलता मजबूत बनी रहेगी और SIP फ्लो हर गिरावट पर समर्थन देगा। Nifty त्योहारों के बाद मजबूत ब्रेकआउट के साथ नए स्तरों पर पहुंचने की उम्मीद है, जो घरेलू खपत वृद्धि और नीति स्पष्टता से प्रेरित होगा। इस प्रकार, Anil Rego का विश्लेषण बताता है कि व्यापार तनावों के बीच भी भारत का घरेलू आर्थिक परिदृश्य मजबूत बना हुआ है, जहां चुनिंदा राहत उपाय और घरेलू मांग बाजार को गतिशील बनाए रखने में मदद करेंगे

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