अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत से आयातित सामानों पर 1 अगस्त से 25% टैरिफ लागू करने की घोषणा की है। इस फैसले के पीछे मुख्य कारण भारत की ऊंची कस्टम ड्यूटी, व्यापक व्यापार बाधाएं और रूस के साथ भारत की आर्थिक संलिप्तता बताई गई है। हालांकि, इस नई नीति के तहत 25 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के भारतीय निर्यात—जिनमें Pharmaceuticals और Smartphones शामिल हैं—को फिलहाल छूट दी गई है। इस छूट के बावजूद, इस टैरिफ के कारण दोनों देशों के व्यापार संबंधों में खटास बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। टैरिफ लागू होने से पहले भारतीय निर्यातकों ने अपनी Shipments को तेज कर दिया, जिससे निर्यात में असामान्य वृद्धि देखी गई है। वित्त वर्ष के पहले हिस्से में भारत के कुल माल निर्यात का लगभग 23% हिस्सा अमेरिका को गया, जो कि वर्ष की शुरुआत में लगभग 17-18% था। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण अमेरिका के लिए निर्यात बढ़ाने की तेज़ी और आगामी टैरिफ से बचने की रणनीति रही। विशेष रूप से, Pharmaceuticals निर्यात को लगभग 10.5 अरब डॉलर और Electronics, खासकर Smartphones, को 14.6 अरब डॉलर के मूल्य पर टैरिफ से छूट मिली है। ये दोनों सेक्टर भारत के अमेरिका निर्यात का लगभग 29% हिस्सा हैं। इस छूट को व्यापारिक दृष्टि से बड़ा फायदा माना जा रहा है, क्योंकि ये दोनों सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
फिर भी, विशेषज्ञों का कहना है कि ये छूट स्थायी नहीं हो सकती। Donald Trump ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में Pharmaceuticals पर भी टैरिफ बढ़ाकर 200% तक किया जा सकता है, और Smartphones पर दी गई छूट भी नीति के अनुसार वापस ली जा सकती है। ऐसे में भारतीय निर्यातकों और नीति निर्माताओं के लिए यह चिंता का विषय है कि ये राहतें केवल अस्थायी हैं और भविष्य में व्यापार में और भी बाधाएं आ सकती हैं। भारत के Commerce Secretary Rajiv Kumar ने इस घोषणा को स्थायी नीति के तौर पर नहीं देखा है। उन्होंने इसे एक नेगोशिएशन टैक्टिक बताया है और कहा है कि अभी यह पूरी तरह से फाइनल नहीं हुआ है। वह उम्मीद जता रहे हैं कि अगली व्यापार वार्ता के दौरान इस पर बदलाव हो सकता है और दोनों देशों के बीच संतुलित समाधान निकल सकता है। वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल-जून तिमाही में भारत का अमेरिका को निर्यात 25.52 अरब डॉलर रहा, जो कि पिछले वर्ष के समान अवधि से लगभग 23% अधिक है। हालांकि, इस बढ़ोतरी के बावजूद भारत के कुल निर्यात में धीमी वृद्धि देखी गई है, जिसमें FY25 की अंतिम तिमाही में 4% से अधिक की गिरावट भी शामिल है। पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी लगभग 4.09 अरब डॉलर मूल्य का है, जो फिलहाल टैरिफ से छूट के दायरे में है। हालांकि, इस टैरिफ नीति से श्रम-गहन क्षेत्रों जैसे Textiles, Gems & Jewellery, Auto Components, और Petrochemicals को काफी खतरा है
ये सेक्टर अमेरिकी बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सतर्क हो गए हैं। साथ ही, Trump प्रशासन ने “Secondary Tariffs” की भी चेतावनी दी है, जो भारत के रूस और BRICS देशों के साथ व्यापार संबंधों के कारण लगाए जा सकते हैं। ये अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ हो सकते हैं जिनका अनुपात अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। साथ ही, S&P 500 Futures और Nasdaq 100 Futures में सुधार देखा गया है, खासकर Microsoft और Meta Platforms के मजबूत Earnings रिपोर्ट के बाद, जिससे अमेरिकी बाजार में सकारात्मक माहौल बना है। भारत सरकार ने इस बीच निरंतर यह आश्वासन दिया है कि वह अमेरिका के साथ एक “Fair, Balanced, Mutually Beneficial” द्विपक्षीय व्यापार समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा हो और घरेलू उद्योगों को सुरक्षा मिले। हालांकि मोबाइल और फार्मा निर्यात फिलहाल टैरिफ से छूट पाए हैं, लेकिन व्यापारिक अनिश्चितता बनी हुई है। “Secondary Tariffs” के संभावित लागू होने से भारतीय निर्यातकों को सतर्क रहना होगा। ये छूट अस्थायी हो सकती हैं और अंतिम फैसला व्यापार वार्ताओं के परिणामों पर निर्भर करेगा। भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में इस नए मोड़ के चलते दोनों देशों के व्यापारिक माहौल में आने वाले महीनों में काफी बदलाव देखने को मिल सकते हैं