हाल ही में जारी हुई Barclays Private Clients Hurun India Most Valuable Family Businesses 2025 रिपोर्ट ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि भारत के सबसे मूल्यवान फैमिली-रन बिजनेस में केवल कुछ बड़े परिवारों का दबदबा है। इस रिपोर्ट के अनुसार, देश की 300 सबसे बड़ी फैमिली कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू करीब 134 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें से आधे से ज्यादा का नियंत्रण सिर्फ टॉप 10 परिवारों के पास है। सबसे ऊपर Ambani परिवार है, जिनकी कंपनियों का कुल मूल्यांकन 28.2 लाख करोड़ रुपये है। इसके बाद Kumar Mangalam Birla परिवार का स्थान है, जिनकी वैल्यू 6.5 लाख करोड़ रुपये के करीब है। तीसरे नंबर पर Jindal परिवार है, जिनकी कंपनियों का मूल्यांकन 5.7 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। इस तीनों परिवारों की कुल मार्केट वैल्यू 40.4 लाख करोड़ रुपये है, जो लगभग 471 बिलियन डॉलर के बराबर है और फिलीपींस के जीडीपी के बराबर माना जा सकता है। इस साल खास बात यह रही कि Jindal परिवार ने एक लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी के साथ पहली बार टॉप 3 में जगह बनाई है। वहीं Birla परिवार ने भी 1.1 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि के साथ दूसरे नंबर पर क़ाबिज़ी पक्की की है। Ambani परिवार ने लगातार दूसरे साल टॉप स्थान बनाए रखा है, और उनकी कुल वैल्यू भारत की जीडीपी के लगभग बारहवें हिस्से के बराबर है। Barclays-Hurun की यह रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि 300 फैमिली कंपनियों में से 222 कंपनियां यानी करीब 74 प्रतिशत सार्वजनिक रूप से लिस्टेड हैं
इसका मतलब है कि न केवल संस्थागत निवेशक बल्कि खुदरा निवेशक भी इन बड़े परिवारों के व्यवसाय में सीधे तौर पर निवेश कर सकते हैं। वहीं बाकी 78 कंपनियां प्राइवेट हैं, जिनमें Haldiram Snacks सबसे मूल्यवान अनलिस्टेड बिजनेस है, जिसकी वैल्यू 85,800 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह स्थिति पिछले दो सालों से बनी हुई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस बार 2025 की सूची में शामिल होने के लिए न्यूनतम वैल्यूएशन 17 प्रतिशत बढ़कर 6,600 करोड़ रुपये हो गई है, जबकि पिछले साल यह 5,636 करोड़ रुपये था। टॉप 200 और टॉप 50 परिवारों के लिए इस थ्रेसहोल्ड में और भी तेजी देखी गई है, जिसमें क्रमशः 70 प्रतिशत और 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि मिड-साइज़ फैमिली बिजनेस भी देश के व्यापक बाजार रैली का लाभ उठा रहे हैं। रिपोर्ट में कुल 45 शहरों के फैमिली बिजनेस को शामिल किया गया है। मुंबई 91 एंट्री के साथ सबसे आगे है, इसके बाद नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में 62 और कोलकाता में 25 परिवारों के व्यवसाय सूचीबद्ध हैं। क्षेत्रीय तौर पर देखें तो मेटल्स एंड माइनिंग, ऑटोमोबाइल्स, इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स और केमिकल्स सेक्टर्स में फैमिली बिजनेस का दबदबा बना हुआ है, क्योंकि इन सेक्टर्स में पिछले एक साल में मजबूत आय में तेजी देखी गई है। इस रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होता है कि भारत में फैमिली-रन बिजनेस की ताकत लगातार बढ़ रही है और ये व्यवसाय न केवल आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि शेयर बाजार में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं
इन बड़े परिवारों की कंपनियां पूंजी बाजार को स्थिरता और विकास की दिशा में मार्गदर्शन दे रही हैं। इस तरह की वित्तीय रिपोर्ट से यह समझने में मदद मिलती है कि भारतीय आर्थिक परिदृश्य में पारिवारिक व्यवसाय कितने महत्वपूर्ण हैं और कैसे वे देश की समृद्धि में योगदान दे रहे हैं। Ambani, Birla और Jindal जैसे टॉप प्रमोटर परिवारों का बाजार मूल्य में बढ़ता हुआ हिस्सा इस बात का प्रतीक है कि बड़े परिवारों के पास पूंजी, संसाधन और प्रबंधन क्षमता के जरिए टिकाऊ विकास की मजबूत नींव है। सार्वजनिक और निजी दोनों प्रकार के व्यवसायों की इस सूची में वृद्धि और मार्केट वैल्यू के नए रिकॉर्ड यह दर्शाते हैं कि भारतीय फैमिली बिजनेस मॉडल वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ रहे हैं और आने वाले वर्षों में भी इसका प्रभाव राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर गहरा रहने वाला है