Aaradhya Disposal Industries Limited, जो कि पेपर उत्पादों का निर्माण करती है, ने NSE SME पर 11 अगस्त 2025 को कमजोर शुरुआत की। कंपनी ने अपने IPO का बंद बोलीकरण 4 से 6 अगस्त 2025 के बीच पूरा किया था, लेकिन इसके बाद पहली बार ट्रेडिंग के दौरान शेयर की कीमत ₹116 की इश्यू प्राइस के मुकाबले 4.31% गिरकर ₹111 पर खुली। इस गिरावट ने निवेशकों के बीच सतर्कता और पेपर उद्योग के मौलिक पहलुओं पर चिंता को दर्शाया, भले ही कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा हो और वह टिकाऊ पेपर समाधानों पर केंद्रित हो। IPO के दौरान Aaradhya Disposal का इश्यू प्राइस ₹116 प्रति शेयर था, जिसमें न्यूनतम निवेश 2,400 शेयर यानी ₹2,78,400 था। हालांकि IPO को लेकर बाज़ार की प्रतिक्रिया कमजोर रही और सब्सक्रिप्शन केवल 1.41 गुना हुआ। इस सब्सक्रिप्शन में QIB का योगदान 2.51 गुना था, व्यक्तिगत निवेशकों का 1.46 गुना था, जबकि NII का भागीदारी स्तर केवल 1.25 गुना रहा, जो निवेशकों की कम रुचि को दर्शाता है, खासकर पेपर निर्माण के बिजनेस मॉडल को लेकर। पहले दिन की ट्रेडिंग के दौरान शेयर कीमत में गिरावट ने निवेशकों को नुकसान पहुंचाया और इस बात का संकेत दिया कि बाजार में पेपर उद्योग की मौजूदा स्थिति और विकास संभावनाओं को लेकर संदेह है। हालांकि, कंपनी के वित्तीय आंकड़े इसके विपरीत हैं। FY25 में Aaradhya Disposal का राजस्व 54% बढ़कर ₹113.69 करोड़ हो गया, जबकि नेट प्रॉफिट 158% की वृद्धि के साथ ₹10.27 करोड़ पर पहुंचा। इस शानदार वृद्धि ने ऑपरेशनल दक्षता और मांग में वृद्धि को स्पष्ट किया है
कंपनी ने पर्यावरण-संवेदनशील उत्पादों पर भी ध्यान केंद्रित किया है जिसमें पेपर कप ब्लैंक्स, फूड ग्रेड पेपर्स और ईको-फ्रेंडली PE कोटेड, PLA कोटेड तथा बैरियर कोटेड उत्पाद शामिल हैं। ये उत्पाद टिकाऊपन की बढ़ती मांग को पूरा करते हैं। कंपनी की उत्पादन क्षमता मध्य प्रदेश के Dewas में स्थित 52,151 वर्ग फीट के फैक्ट्री में 15,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जो उत्पादन और वितरण में दक्षता सुनिश्चित करती है। इसके साथ ही कंपनी भारतीय और वैश्विक बाजारों में एशिया और मध्य पूर्व को निर्यात करती है, जो राजस्व विविधीकरण और विकास के अवसर प्रदान करता है। हालांकि, कंपनी को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। IPO की कमजोर सब्सक्रिप्शन ने निवेशकों के बीच विश्वास की कमी को दर्शाया है। कंपनी का कर्ज भार भी चिंता का विषय है, क्योंकि इसका debt-to-equity ratio 1.35 है और कुल कर्ज ₹39.66 करोड़ है, जो वित्तीय दबाव पैदा कर सकता है। इसके अलावा, राजस्व में अस्थिरता और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव कंपनी की लाभप्रदता पर दबाव डालते हैं। पेपर मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा भी कंपनी के लिए जोखिम पैदा करती है। IPO से प्राप्त राशि का उपयोग कंपनी ने कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के लिए ₹20 करोड़, उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए ₹15.86 करोड़ और कर्ज पूर्व भुगतान के लिए ₹1.60 करोड़ करने का निर्णय लिया है
कार्यशील पूंजी निवेश से कंपनी को इन्वेंट्री प्रबंधन और संचालन में मदद मिलेगी, जबकि पूंजीगत व्यय से उत्पादन में वृद्धि और तकनीकी सुधार संभव होंगे। कर्ज पूर्व भुगतान से वित्तीय संरचना में सुधार होगा और ब्याज भार कम होगा। वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो FY25 में ₹113.69 करोड़ के राजस्व के साथ कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष ₹73.93 करोड़ की तुलना में बेहतर प्रदर्शन दिखाया। नेट प्रॉफिट में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले वर्ष ₹3.99 करोड़ से बढ़कर ₹10.27 करोड़ हो गया। कंपनी का ROE 44.53% और RoNW 34.87% है, जो शेयरधारकों के लिए सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि, ROCE 25.15% और EBITDA मार्जिन 15.69% मध्यम स्तर पर हैं। कुल मिलाकर, Aaradhya Disposal Industries Limited का IPO और पहली दिन की ट्रेडिंग कमजोर रही और इसके शेयर की कीमत में गिरावट ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ाई है। लेकिन कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और टिकाऊ उत्पादों पर फोकस को देखते हुए, दीर्घकालिक विकास की संभावनाएं मौजूद हैं। निवेशकों की निगाहें अब कंपनी की भविष्य की रणनीतियों और बाजार की प्रतिस्पर्धा में टिकाऊपन पर टिकी हैं