हाल के समय में भारत के शेयर बाजार में बड़े Initial Public Offerings (IPOs) में retail participation को लेकर फिर से चर्चा तेज हो गई है। Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने हाल ही में एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें mega issues में retail quota को कम करने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में इस प्रस्ताव को वापस ले लिया गया। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल उठा दिया कि क्या बड़े IPOs में retail investors की भागीदारी टिकाऊ है या नहीं। हालांकि, ताज़ा बाजार आंकड़े बताते हैं कि जब pricing और business outlook सही होता है, तो retail investors की प्रतिक्रिया बेहद मजबूत रहती है। PRIME Database के आंकड़ों के अनुसार, अब तक कम से कम 10 IPOs ऐसे रहे हैं जिनमें retail investors ने ₹10,000 करोड़ से ज़्यादा की बोली लगाई है। 2024 में भी चार IPOs – Waaree Energies, Bajaj Housing Finance, KRN Heat Exchanger & Refrigeration, और Unimech Aerospace & Manufacturing – ने इस मामले में खासा ध्यान आकर्षित किया है। इन सभी IPOs में retail investors की दिलचस्पी साफ नजर आई है, जो यह साबित करती है कि केवल issue के आकार से ज़्यादा महत्वपूर्ण होता है valuation और sector fundamentals। IPO की इतिहास में सबसे बड़ा उदाहरण Reliance Power का 2008 वाला IPO है। उस समय इस issue ने ₹10,123 करोड़ जुटाए, लेकिन retail investors की मांग इससे कहीं ज़्यादा थी। करीब 46.23 लाख retail applications मिलीं और कुल bid लगभग ₹40,000 करोड़ तक पहुंच गई, जो भारतीय IPO इतिहास में सबसे अधिक retail subscription का रिकॉर्ड है
इसके बाद के वर्षों में कई IPOs ने ₹10,000 करोड़ से ₹17,000 करोड़ के बीच retail bids आकर्षित किए हैं। 2023 में Waaree Energies ने ₹4,321 करोड़ का IPO लॉन्च किया, जिसमें 70 लाख से अधिक retail applications आईं। कुल bid ₹16,470 करोड़ तक पहुंचा, जो renewable energy सेक्टर में निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। वहीं, 2024 में Bajaj Housing Finance, KRN Heat Exchanger & Refrigeration, और Unimech Aerospace & Manufacturing के IPOs ने भी retail investors से ₹10,000 करोड़ से अधिक की बोली पाई। खास बात यह है कि KRN Heat Exchanger & Refrigeration और Unimech Aerospace & Manufacturing ने क्रमशः ₹342 करोड़ और ₹500 करोड़ के छोटे-से issue का प्रबंधन किया, फिर भी retail निवेशकों की भारी भागीदारी देखी गई। विशेषज्ञों की राय में यह संकेत मिलता है कि retail demand कोई स्थायी कमी नहीं है। बल्कि, valuation और कंपनी तथा उसके सेक्टर की growth prospects ही इस मांग को प्रभावित करते हैं। PRIME Database के Managing Director Pranav Haldea के अनुसार, “हमें यह स्वीकार करना होगा कि retail investors IPOs में निवेश करना पसंद करते हैं, और आंकड़े दिखाते हैं कि यदि बड़े issues attractively priced हों तो वे भी जबरदस्त प्रतिक्रिया देते हैं। ” हाल ही में NSDL के IPO ने भी इस बात को साबित किया है। NSDL ने ₹4,011 करोड़ जुटाए, लेकिन retail investors की बोली लगभग ₹10,500 करोड़ रही, जो लगभग 46 लाख applications से आई
इसके पहले Tata Technologies, MOIL, Reliance Petroleum, और Coal India जैसे बड़े नामों के IPOs में भी retail investors की मजबूत भागीदारी देखी गई थी। इन आंकड़ों और विशेषज्ञों की बातों से यह स्पष्ट हो जाता है कि mega IPOs में retail investors की भागीदारी सिर्फ issue के साइज पर निर्भर नहीं करती, बल्कि valuation और business fundamentals ज्यादा मायने रखते हैं। यह रुझान इस बात का भी प्रमाण है कि छोटे निवेशक भारतीय पूंजी बाजारों की एक महत्वपूर्ण ताकत बने हुए हैं। अंततः, चाहे regulatory debates हों या policy proposals, retail investors की enthusiasm कम नहीं हुई है। यदि कंपनियां सही मूल्यांकन और मजबूत growth outlook के साथ IPO लाती हैं, तो retail investors उन्हें खूब सपोर्ट देते हैं। यह स्थिति भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है और यह दर्शाती है कि भविष्य में भी retail participation में वृद्धि की संभावना बनी रहेगी