भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों का ₹18,000 करोड़ का बड़ा पलायन, यूएस-भारत व्यापार तनाव बना मुख्य कारण

Saurabh
By Saurabh

अगस्त 2025 में Foreign Portfolio Investors (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग ₹18,000 करोड़ की भारी निकासी की है, जिससे इस साल कुल विदेशी निवेश निकासी ₹1.13 लाख करोड़ के पार पहुंच गई है। यह आंकड़ा ट्रेडिंग डिपॉजिटरी डेटा पर आधारित है और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में भी FPI का मिजाज नाज़ुक बना रहेगा। बाजार की चाल पर यूएस और भारत के बीच चल रहे व्यापार वार्तालाप और लगाए गए टैरिफ का गहरा प्रभाव देखने को मिलेगा। एक वरिष्ठ Fundamental Analyst ने बताया कि इस बार की तेज बिकवाली का मुख्य कारण अमेरिका द्वारा भारतीय आयात पर लगाए गए 25% टैक्स में वृद्धि है। अगस्त की शुरुआत में यूएस ने भारतीय उत्पादों पर 25% सीमा शुल्क लगाना शुरू किया था, वहीं इसी सप्ताह उस टैक्स को 25% और बढ़ा दिया गया, जिससे कुल टैक्स दर दोगुनी हो गई। इस फैसले ने वैश्विक निवेशकों के भरोसे को झकझोर कर रख दिया है। साथ ही, बढ़ती हुई U.S. Treasury rates ने भी विदेशी पूंजी को भारतीय बाजार से हटने के लिए प्रेरित किया है। इस बाजार बिकवाली की लहर के पीछे प्रमुख कारणों में अमेरिका और भारत के बीच व्यापार तनाव का तेज बढ़ना है। अमेरिकी सरकार ने अगस्त 1 से भारतीय वस्तुओं पर 25% टैरिफ लागू किया, जो इस सप्ताह दोगुना कर दिया गया, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ गई। इससे निवेशकों ने भारतीय शेयरों को छोड़कर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया

साथ ही, भारत के पहली तिमाही के कॉर्पोरेट परिणाम उम्मीदों से कमजोर रहे, जिससे निवेशकों का आत्मविश्वास और टूटा। कई कंपनियों की कमज़ोर प्रदर्शन ने विदेशी निवेशकों को बाहर निकलने के लिए मजबूर किया। इससे बाजार में बिकवाली का दबाव और तेज़ हो गया। भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होता गया, जो विदेशी निवेशकों के लिए चिंता का दूसरा बड़ा कारण बना। कमजोर रुपया भारत में निवेश पर होने वाले रिटर्न की डॉलर में वैल्यू घटा देता है, जिससे विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी कम हो जाती है। हालांकि, इस बेचैनी के बीच कुछ FPIs ने भारत के Debt Market में निवेश जारी रखा है। अगस्त में ₹3,432 करोड़ का निवेश debt general limit के तहत और ₹58 करोड़ debt voluntary retention चैनल के माध्यम से किया गया। यह संकेत है कि विदेशी निवेशक शेयर बाजार से पैसे निकाल कर अभी भी कर्ज आधारित बाजारों में भरोसा दिखा रहे हैं। FPIs की ₹17,924 करोड़ की निकासी अगस्त में हुई है, जो जुलाई में हुई ₹17,741 करोड़ की निकासी के लगभग बराबर है। जबकि मार्च से जून के बीच FPIs ने कुल ₹38,673 करोड़ का निवेश किया था

इस अवधि में विदेशी निवेशकों ने debt voluntary retention route में ₹58 करोड़ और debt general limit में ₹432 करोड़ का निवेश भी किया। कुल मिलाकर, अगस्त की शुरुआत में हुई यह बड़ी FPI निकासी अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी, कमजोर कॉर्पोरेट आय और रुपया की गिरावट का संयुक्त प्रभाव है। जब तक भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्तालाप में प्रगति नहीं होती या कॉर्पोरेट प्रदर्शन में सुधार नहीं आता, तब तक विदेशी निवेशकों का जोखिम से बचाव का रुख जारी रहने की संभावना है। इसके चलते भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रहेगा और बाजार की अस्थिरता बनी रहेगी

Share This Article
By Saurabh
Follow:
Hello friends, my name is Saurabh Sharma. I am a digital content creator. I really enjoy writing blogs and creating code. My goal is to provide readers with simple, pure, and quick information related to finance and the stock market in Hindi.
Leave a comment
Would you like to receive notifications on latest updates? No Yes