पिछले कुछ वर्षों में डिफेंस सेक्टर ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिए हैं और इस क्षेत्र ने मल्टीबैगर स्टॉक्स के रूप में अपनी ताकत साबित की है। लेकिन अब बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए निवेशकों को ज्यादा सतर्क और चयनात्मक होना होगा। Moneycontrol के Mutual Fund Summit 2025 – Bengaluru Edition में हुए चर्चाओं के दौरान कई प्रमुख फंड मैनेजरों ने डिफेंस सेक्टर की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से बात की। Capitalmind AMC के CEO Deepak Shenoy ने कहा कि डिफेंस थीम हाल के वर्षों में निवेश के लिए सबसे सफल विषयों में से एक रहा है, लेकिन अब निवेशकों को एक अधिक संतुलित और मापी हुई वृद्धि के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शुरुआती उत्साह खत्म हो चुका है और जो मूल्य पहले ही बाजार ने पहचान लिया है, लेकिन भारत की मैन्युफैक्चरिंग कहानी अभी शुरू ही हुई है। Shenoy ने यह भी कहा कि यह जो consolidation का दौर चल रहा है, उसे किसी slowdown के रूप में नहीं देखना चाहिए। डिफेंस ऑर्डर पाइपलाइन मजबूत है, कैपेक्स बढ़ रहा है और घरेलू कंपनियां बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा कर रही हैं। हालांकि तिमाही आधार पर नंबर स्थिर दिखाई दे सकते हैं, लेकिन ये लंबे समय तक चलने वाले बिजनेस हैं जो बेहतर execution के साथ लगातार परिणाम देंगे। Kotak Mahindra AMC के CIO Harsha Upadhyaya ने बताया कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को लेकर बाजार की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले इसे एक अस्पष्ट और सरकारी निर्भर सेक्टर माना जाता था, लेकिन अब इसमें स्पष्टता और ऑर्डर्स की दृश्यता आ गई है
साथ ही, प्राइवेट कंपनियों की विश्वसनीयता और सरकार की दीर्घकालिक रणनीति इस सेक्टर को और मजबूत बना रही है। Upadhyaya ने यह भी कहा कि भले ही वैल्यूएशंस में सुधार हो चुका है, लेकिन कमाई का असली उछाल अभी शुरू हुआ है। कंपनियों के बैलेंस शीट बेहतर हो रहे हैं, उनकी प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ रही है और ऑर्डर रेवेन्यू में बदल रहे हैं। अब ये कंपनियां केवल कहानियों पर नहीं, बल्कि वास्तविक नकदी प्रवाह पर आधारित हैं। इसके विपरीत, ICICI Prudential AMC के Co-CIO (Equity) Anish Tawakley ने निवेशकों को सतर्कता बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि डिफेंस सेक्टर अब एक consensus trade बन चुका है, और जब भी ऐसा होता है, तो निवेशकों को सावधानी रखनी चाहिए। मौके की कोई कमी नहीं है, लेकिन हर डिफेंस स्टॉक विजेता नहीं होगा। कई छोटी कंपनियां इस थीम का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उनके व्यवसाय मॉडल स्थायी नहीं हैं और न ही वे मजबूत निष्पादन कर पाती हैं। तीनों फंड मैनेजरों ने इस बात पर सहमति जताई कि डिफेंस सेक्टर भारत की दीर्घकालिक औद्योगिक और निर्यात महत्वाकांक्षाओं का आधार बना हुआ है। हालांकि, अब समय आ गया है कि निवेशक सिर्फ हेडलाइंस पर ध्यान न दें, बल्कि कंपनी के मूलभूत तत्वों पर ध्यान दें
Deepak Shenoy ने कहा, “यह थीम अभी भी आगे बढ़ सकती है, लेकिन अब यह तेजी पकड़ने का नहीं, बल्कि उन कंपनियों को पकड़ कर रखने का समय है जो दशक भर के लिए मजबूत प्रदर्शन कर सकें, न कि सिर्फ एक तिमाही के लिए। ” इस तरह के विचार इस बात को दर्शाते हैं कि डिफेंस सेक्टर में अभी भी निवेश के अवसर हैं, लेकिन यह दौर अब सरल नहीं रहा। निवेशकों को ज्यादा सोच-समझकर और कंपनी की क्षमता को परखते हुए निवेश करना होगा, ताकि वे स्थिर और लाभकारी रिटर्न हासिल कर सकें