भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को भारी कमजोरी देखने को मिली, खासकर Capital Market से जुड़ी प्रमुख कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई। Nifty Capital Markets index में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग 4,280 के स्तर पर बंद हुआ, जो लगातार दूसरी बार नुकसान के साथ बंद हुआ है। इस गिरावट ने समग्र बाजार की नकारात्मक स्थिति को दर्शाया, जहां Nifty 50 लगभग 1% (255 अंक) टूटकर 24,800 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे चला गया और Sensex भी करीब 1% (800 से अधिक अंक) गिरकर 80,786.84 के स्तर पर बंद हुआ। India VIX, जो बाजार की अस्थिरता का प्रमुख पैमाना है, लगभग 4% बढ़कर 12.19 के आसपास पहुंच गया, जो निवेशकों की बढ़ती सतर्कता को दर्शाता है। इस सबके पीछे मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर उभरती अनिश्चितताएं और घरेलू बाजार की कमजोरी थी। खासतौर पर अमेरिकी प्रशासन के Donald Trump द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने के मसौदे के आदेश ने बाजार में भारी दबाव बनाया। यह आदेश 27 अगस्त से लागू होगा और भारतीय निर्यातकों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है, क्योंकि भारत के लगभग 86.5 बिलियन डॉलर के अमेरिकी निर्यात पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञों और अनुभवी विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय बाजारों के लिए सबसे बड़ा जोखिम यह है कि क्या Nifty इस ‘Wall of Worry’ को पार कर पाएगा, खासकर Trump के 25% टैरिफ के प्रभाव के चलते। इस टैरिफ के लागू होने से भारत के अधिकांश अमेरिकी निर्यात वाणिज्यिक रूप से अव्यावहारिक हो सकते हैं, जिससे बाजार की अस्थिरता और बढ़ सकती है। ट्रेड तनाव के अलावा, कमजोर वैश्विक संकेत, लगातार विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और रुपये की गिरावट ने घरेलू बाजार की स्थिति को और जटिल बना दिया है
Capital Market से जुड़े शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखने को मिली। Angel One का शेयर भाव 4% से अधिक गिरकर ₹2,339.10 पर बंद हुआ। Kfin Technologies और Multi Commodity Exchange of India (MCX) के शेयर भी लगभग 4% टूटे। Bombay Stock Exchange (BSE) में करीब 3% की गिरावट आई, जबकि CDSL, HDFC AMC और CAMS के शेयर लगभग 2% तक कमजोर हुए। अन्य कंपनियों जैसे 360 One Wam Ltd, Indian Energy Exchange (IEX), Motilal Oswal Financial Services और Nuvama के शेयर भी करीब 1% नीचे बंद हुए। इस गिरावट के पीछे SEBI के हालिया नीति संकेत भी एक कारण बने। SEBI के Chairman Tuhin Kanta Pandey ने FICCI की 22वीं वार्षिक Capital Markets Conference में कहा था कि इक्विटी डेरिवेटिव्स की अवधि (tenure) में बदलाव पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि F&O सेगमेंट में गुणवत्ता और संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इसके तहत SEBI हितधारकों से परामर्श करके डेरिवेटिव उत्पादों की अवधि और परिपक्वता प्रोफ़ाइल में सुधार करेगा, ताकि ये हेजिंग और दीर्घकालिक निवेश के लिए बेहतर काम कर सकें। इस घोषणा ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई और निवेशकों के बीच बेचैनी पैदा की
कुल मिलाकर, Capital Market से जुड़े शेयरों की यह गिरावट वैश्विक व्यापार तनाव, कमजोर निवेशक मनोवृत्ति और नियामक अनिश्चितता का परिणाम है। अमेरिकी टैरिफ के लागू होने के साथ, बाजार में निकट भविष्य में और भी उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है। निवेशकों को सतर्क रहने और बाजार की तेजी-धीमी स्थिति के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता होगी। बाजार की इस स्थिति ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाक्रम का भारतीय बाजार पर कितना गहरा प्रभाव पड़ता है