क्या Indian Markets में फिर लौटेगी तेजी? जानिए 25,000 के NIFTY50 स्तर पर क्या होगा असर

Saurabh
By Saurabh

Indian markets ने पिछले सप्ताह की बढ़त को बरकरार नहीं रख पाया और दोपहर के सत्र में लाभ कम होते देखे गए। शुरुआत में Asian markets से मिली सकारात्मकता ने निवेशकों का मनोबल बढ़ाया था, खासकर जब US Federal Reserve के अध्यक्ष Jerome Powell ने दरों में कटौती के संकेत दिए। इसके अलावा, Reserve Bank of India के Governor Sanjay Malhotra द्वारा India और US के बीच व्यापार वार्ता को सकारात्मक समाप्ति की उम्मीद जताने वाली एक निजी रिपोर्ट ने भी निवेशकों में उम्मीद जगा दी। Commerce Ministry की ओर से यह भी जानकारी मिली कि India और Australia के बीच comprehensive free trade agreement के लिए एक और दौर की बातचीत सफलतापूर्वक पूरी हो गई है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत होंगे। हालांकि, बावजूद इसके, Indian markets पिछले सप्ताह की तेजी को कायम नहीं रख सके और उच्च स्तर पर profit booking ने बाजार में दबाव बनाया। Global बाजारों की सकारात्मक चाल से भी Indian markets में उत्साह नहीं दिखा, जिससे यह साफ हो गया कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ अनिश्चितताएं अभी भी बाजार की दिशा तय कर रही हैं। इस सप्ताह बाजार के मूड को प्रभावित करने वाले मुख्य कारकों में शामिल हैं: सबसे पहले, tariff imposition का मामला। US ने Indian exports पर 25% का टैरिफ लगाया है, साथ ही रूस से तेल खरीदने पर अतिरिक्त दंड भी लगाया गया है। यह टैरिफ 27 अगस्त से प्रभावी होंगे। हालांकि, दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और निवेशक आशान्वित हैं कि टैरिफ लगाने की तारीख में विस्तार हो सकता है

अगर बातचीत में सकारात्मक प्रगति होती है और टैरिफ लागू करने की समय सीमा बढ़ती है, तो यह Indian markets के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो सकता है। दूसरी बड़ी चिंता FII selling की है। अगस्त महीने में विदेशी निवेशकों ने Indian equities में ₹22,000 करोड़ से अधिक की बिकवाली की है, जिससे Indian stocks ने अपने वैश्विक समकक्षों के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टैरिफ विवाद में कोई हल निकलता है और GST में सुधार होता है, तो विदेशी निवेशक फिर से Indian markets में वापसी कर सकते हैं। फिलहाल, FII की बिकवाली बाजार की तेजी को सीमित कर रही है। इस सप्ताह निवेशक GDP और IIP (Index of Industrial Production) के आंकड़ों पर भी नजर रखेंगे, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति और अगले महीनों में बाजार की दिशा तय करेंगे। Q1FY26 के earnings रिपोर्ट में अधिकांश सेक्टर्स में मन्दी देखने को मिली है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है। वैश्विक टैरिफ युद्ध के बीच India का GDP growth एक महत्वपूर्ण संकेतक होगा। GST को लेकर भी चर्चा तेज है। Finance Minister की अध्यक्षता में GST council की दो दिवसीय बैठक चल रही है, जिसमें दरों की rationalisation पर फैसला लिया जाएगा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नई GST दरें 22 सितंबर तक लागू हो सकती हैं, जो Navratri जैसे त्योहारों के सीजन से पहले बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती हैं। GST दरों में कटौती या कोई बड़ा बदलाव भारतीय बाजारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। तकनीकी रूप से देखें तो NIFTY50 ने शुक्रवार को bearish engulfing pattern दिखाया था, जो बाजार में कमजोरी का संकेत है। सोमवार की दोपहर तक यह 24,870 से 25,000 के स्तर पर कारोबार कर रहा था और doji pattern ने बाजार में दिशा की कमी को दर्शाया। विशेषज्ञों का मानना है कि 25,000 का स्तर इस सप्ताह एक महत्वपूर्ण resistance रहेगा, जबकि 24,750 का स्तर मजबूत support के रूप में काम करेगा। इस प्रकार, Indian markets इस सप्ताह कई घरेलू और वैश्विक घटनाक्रमों से प्रभावित रहेंगे। टैरिफ वार्ता, FII के रुख, GST दरों में बदलाव, और आर्थिक आंकड़ों की रिपोर्टिंग निवेशकों की रणनीति को दिशा देंगे। फिलहाल, बाजार में सतर्कता और अस्थिरता बनी हुई है, जिससे निवेशकों को मूड और तकनीकी संकेतों पर खास ध्यान देना होगा। निवेशकों के लिए यह सप्ताह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आर्थिक नीति निर्धारकों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होगा। ऐसे में बाजार की दिशा और निवेश के मौके दोनों ही उतार-चढ़ाव भरे रह सकते हैं

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